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AIIMS ऋषिकेश पर CAG की ऑडिट रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं के सवाल, ₹1.78 करोड़ की वसूली अटकी; ₹60.21 लाख के भत्ते पर भी आपत्ति

नई दिल्ली/ऋषिकेश। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ऋषिकेश की वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ऑडिट में गंभीर सवाल सामने आए हैं। ऑडिट के अनुसार संस्थान एक ठेकेदार से करीब ₹1.78 करोड़ की बकाया राशि की वसूली नहीं कर सका, जबकि एक अलग मामले में कॉलेज ऑफ नर्सिंग के फैकल्टी को करीब ₹60.21 लाख के नर्सिंग और ड्रेस भत्ते का भुगतान किया गया, जिसे ऑडिट ने नियमों के अनुरूप नहीं माना।

पार्किंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट कॉन्ट्रैक्ट में ₹1.78 करोड़ बकाया

CAG के ऑडिट के मुताबिक AIIMS ऋषिकेश ने अगस्त 2019 में तीन वर्ष के लिए पार्किंग और ट्रैफिक मैनेजमेंट का ठेका दिया था। इसके लिए ठेकेदार को हर महीने ₹9.015 लाख प्लस टैक्स लाइसेंस फीस का भुगतान करना था।

ऑडिट के अनुसार ठेकेदार ने शुरुआत से ही भुगतान में चूक करना शुरू कर दिया। इसके बावजूद संस्थान की ओर से बकाया राशि की समय पर वसूली के लिए प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। ठेकेदार ने लगभग ढाई वर्षों तक केवल आंशिक भुगतान किया और अक्टूबर 2022 में अस्पताल परिसर छोड़ दिया। उस समय तक बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया था।

CAG के मुताबिक इस स्थिति के कारण AIIMS ऋषिकेश की ₹1.78 करोड़ की राशि अवसूलित रह गई। बाद में संस्थान ने कानूनी कार्रवाई शुरू की और ठेकेदार की ₹18 लाख की सुरक्षा राशि जब्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। हालांकि जुलाई 2025 तक यह सुरक्षा राशि जब्त नहीं की गई थी।

₹60.21 लाख के नर्सिंग और ड्रेस भत्ते पर सवाल

ऑडिट में एक अन्य वित्तीय मुद्दा कॉलेज ऑफ नर्सिंग के फैकल्टी को दिए गए भत्तों से संबंधित है।

CAG के अनुसार अप्रैल 2018 से मार्च 2023 के बीच कॉलेज ऑफ नर्सिंग के फैकल्टी को कुल ₹60.21 लाख के नर्सिंग और ड्रेस भत्ते का भुगतान किया गया।

ऑडिट का तर्क था कि संबंधित फैकल्टी पहले से ही अकादमिक और संसाधन-शिक्षण से जुड़े भत्ते प्राप्त कर रहे थे। साथ ही ऑडिट के अनुसार उनकी जिम्मेदारियों में मरीजों की नर्सिंग करना या यूनिफॉर्म पहनना शामिल नहीं था। इसी आधार पर इन भत्तों की पात्रता पर आपत्ति दर्ज की गई।

मंत्रालय ने क्या किया ?

रिपोर्ट के मुताबिक बाद में मंत्रालय ने AIIMS सहित 10 संस्थानों को नर्सिंग कॉलेज के फैकल्टी को नर्सिंग भत्ता बंद करने का निर्देश दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि संबंधित संस्थानों ने मंत्रालय के निर्देश का अनुपालन किया।

मामला क्यों महत्वपूर्ण है ?

CAG की ऑडिट टिप्पणियां सरकारी संस्थानों में सार्वजनिक धन के इस्तेमाल, अनुबंध प्रबंधन और वित्तीय नियंत्रण की अहमियत को सामने लाती हैं।

एक तरफ जहां संस्थान को ठेकेदार से बड़ी राशि की वसूली सुनिश्चित करनी थी, वहीं दूसरी ओर ऐसे भत्तों के भुगतान पर भी सवाल उठे जिनकी पात्रता ऑडिट के अनुसार स्पष्ट नहीं थी।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि CAG की ऑडिट टिप्पणी अपने आप में किसी व्यक्ति या अधिकारी को भ्रष्टाचार का दोषी घोषित नहीं करती। यह वित्तीय प्रक्रिया और नियमों के अनुपालन पर ऑडिट की आपत्तियों और निष्कर्षों को सामने रखती है।

हिंदी विंडो की संपादकीय टिप्पणी: सार्वजनिक संस्थानों में वित्तीय अनुशासन केवल लेखांकन का विषय नहीं है। यह करदाताओं के पैसे, संस्थागत जवाबदेही और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में नागरिकों के विश्वास से सीधे जुड़ा प्रश्न है।