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विश्व मीडिया की नजर में भारत: योगी की सियासी दावेदारी से लेकर शिक्षा संकट, टाटा की नेतृत्व चुनौती और कैश की बढ़ती मांग तक

नई दिल्ली। भारत इस समय राजनीति, शिक्षा, कॉरपोरेट प्रशासन, पर्यावरणीय अधिकारों और डिजिटल भुगतान—इन सभी मोर्चों पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया के विश्लेषण का विषय बना हुआ है। हालिया रिपोर्टों में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राष्ट्रीय राजनीतिक संभावनाओं, भारत के उच्च शिक्षा और रोजगार संकट, टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन, असम के काजीरंगा क्षेत्र में भूमि-अधिकार विवाद तथा डिजिटल भुगतान के बावजूद नकदी की मजबूत मांग जैसे मुद्दों को प्रमुखता मिली है।

योगी आदित्यनाथ: क्या 2027 का उत्तर प्रदेश चुनाव बढ़ाएगा राष्ट्रीय कद ?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मीडिया के फोकस में हैं। Financial Times की हालिया रिपोर्ट ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित उत्तराधिकारियों की दौड़ में एक प्रमुख नाम के रूप में देखा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में तीसरी लगातार जीत योगी आदित्यनाथ के राष्ट्रीय राजनीतिक कद को और मजबूत कर सकती है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है और इसकी राजनीति का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी व्यापक रूप से पड़ता है।

FT ने योगी की राजनीतिक शैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कई समानताएं भी रेखांकित की हैं—जैसे विकास-केंद्रित शासन की छवि, आम लोगों से जुड़ने की कोशिश और मजबूत राजनीतिक संचार।

हालांकि, रिपोर्ट में योगी की राजनीति को लेकर आलोचनाओं का भी उल्लेख है। विशेष रूप से उनकी हिंदुत्व-केंद्रित राजनीति और मुस्लिम समुदाय को लेकर उनकी कुछ टिप्पणियां लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही हैं।

योगी आदित्यनाथ स्वयं फिलहाल प्रधानमंत्री पद की किसी महत्वाकांक्षा की सार्वजनिक घोषणा नहीं करते हैं और प्रधानमंत्री मोदी के प्रति अपनी राजनीतिक निष्ठा पर जोर देते रहे हैं। लेकिन 2027 का उत्तर प्रदेश चुनाव उनके राष्ट्रीय भविष्य के लिहाज से महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है।

भारत का शिक्षा मॉडल: डिग्री बढ़ीं, लेकिन नौकरियां कितनी ?

अंतरराष्ट्रीय मीडिया का दूसरा बड़ा फोकस भारत की शिक्षा और रोजगार व्यवस्था पर है।

Bloomberg की हालिया रिपोर्ट ने भारत में उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत और सीमित रोजगार अवसरों के बीच पैदा हो रहे दबाव को रेखांकित किया है। रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में परिवार अपने बच्चों की शिक्षा पर भारी खर्च कर रहे हैं, जबकि अच्छी तनख्वाह वाली नौकरियां उसी गति से नहीं बढ़ रही हैं।

यह समस्या केवल कॉलेज की फीस तक सीमित नहीं है। प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी, निजी कोचिंग, रहने-खाने और अन्य खर्च मिलाकर उच्च शिक्षा भारतीय मध्यम वर्ग के लिए बड़ा आर्थिक निवेश बनती जा रही है।

2026 में परीक्षा व्यवस्था को लेकर हुए बड़े छात्र आंदोलनों ने भी इस संकट को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया। NEET-UG सहित परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर हुए विरोध के बीच तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जुलाई 2026 में इस्तीफा दे दिया।

यानी समस्या सिर्फ यह नहीं है कि भारत में कितने युवा कॉलेज जा रहे हैं। असली सवाल यह है कि कॉलेज से निकलने के बाद उन्हें किस तरह का रोजगार मिल रहा है और उस शिक्षा की आर्थिक कीमत कौन चुका रहा है।

Tata Sons में नेतृत्व संकट: 18 अगस्त की बैठक से शुरू हुई बड़ी हलचल

भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक Tata Group भी अंतरराष्ट्रीय मीडिया के निशाने पर है।

Financial Times के अनुसार, Tata Sons के भीतर शासन और उत्तराधिकार से जुड़ी जटिलताएं अभी पूरी तरह सुलझी नहीं हैं। कंपनी के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने फरवरी 2027 में अपना कार्यकाल समाप्त होने के बाद दोबारा पद न लेने का फैसला किया है।

इस घटनाक्रम के बीच Tata Sons की 18 अगस्त 2026 को प्रस्तावित AGM भी महत्वपूर्ण बन गई। Sir Ratan Tata Trust से प्रतिनिधि नामित किए जाने में आई नियामकीय अड़चन के कारण बैठक के quorum पर सवाल उठे। बाद में Tata Sons ने AGM को स्थगित कर दिया।

Tata Group के सामने नेतृत्व परिवर्तन के अलावा कारोबार से जुड़ी चुनौतियां भी हैं। FT ने विशेष रूप से Tata Consultancy Services पर AI के कारण बदलते IT उद्योग के दबाव और समूह की भविष्य की रणनीति को लेकर सवाल उठाए हैं।

इसलिए Tata Sons की मौजूदा चुनौती केवल यह तय करना नहीं है कि अगला चेयरमैन कौन होगा, बल्कि यह भी है कि AI, Air India, संभावित लिस्टिंग और समूह की दीर्घकालिक रणनीति के बीच Tata Group का अगला नेतृत्व किस दिशा में जाएगा।

काजीरंगा के पास लग्जरी होटल का विरोध और Pranab Doley पर NSA

असम में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पास प्रस्तावित लग्जरी होटल परियोजना के विरोध ने भूमि-अधिकार और संरक्षण के बीच टकराव की बहस को फिर सामने ला दिया है।

भूमि-अधिकार कार्यकर्ता Pranab Doley को जुलाई में प्रस्तावित होटल परियोजना के खिलाफ विरोध के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। 29 जुलाई को एक स्थानीय अदालत ने उन्हें जमानत दी, लेकिन इसके तुरंत बाद असम सरकार ने उनके खिलाफ National Security Act यानी NSA के तहत कार्रवाई की, जिससे उनकी रिहाई रुक गई।

सरकार ने Doley के खिलाफ पहले से दर्ज मामलों और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े आरोपों को अपने आदेश का आधार बताया है। दूसरी ओर, उनके समर्थकों और अधिकार समूहों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि काजीरंगा UNESCO World Heritage Site है और यहां संरक्षण, पर्यटन, स्थानीय समुदायों के अधिकार और विकास परियोजनाओं के बीच संतुलन लंबे समय से संवेदनशील मुद्दा रहा है।

UPI के दौर में भी क्यों बढ़ रही है नकदी की मांग ?

भारत को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान बाजारों में गिना जाता है। UPI ने छोटे से छोटे लेनदेन को भी डिजिटल बना दिया है। लेकिन इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में नकदी की मांग खत्म नहीं हुई है।

एक हालिया शोध में पाया गया कि UPI का डिजिटल भुगतान में हिस्सा तेजी से बढ़ने के बावजूद भारत में currency in circulation जनवरी 2026 में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। शोध ने इसे डिजिटल भुगतान के विस्तार और नकदी की मजबूत मांग के साथ-साथ मौजूद रहने वाले “cash paradox” के रूप में रेखांकित किया है।

इसी बीच भारत सरकार ने ₹10 और ₹20 के polymer banknotes के field trials के लिए RBI के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। प्रस्ताव के तहत दोनों denominations के एक-एक अरब polymer notes का परीक्षण किया जाएगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि इसका अर्थ मौजूदा कागजी नोटों को तुरंत हटाना नहीं है; polymer notes को फिलहाल परीक्षण के तौर पर कागजी नोटों के साथ चलाने की योजना है।

यह बदलाव बताता है कि भारत में डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ने के बावजूद नकदी अभी भी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।

निष्कर्ष

इन अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों को एक साथ देखें तो भारत की तस्वीर कई स्तरों पर सामने आती है।

एक तरफ उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक प्रभाव राष्ट्रीय उत्तराधिकार की बहस से जोड़ा जा रहा है। दूसरी तरफ भारत की युवा आबादी के सामने शिक्षा और रोजगार का सवाल लगातार गंभीर हो रहा है।

कॉरपोरेट क्षेत्र में Tata Group नेतृत्व और शासन से जुड़े बदलावों से गुजर रहा है, जबकि काजीरंगा में विकास बनाम पर्यावरण और स्थानीय अधिकारों का संघर्ष सामने है।

और इन सबके बीच डिजिटल भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक UPI भी उस वास्तविकता को पूरी तरह नहीं बदल पाया है जिसमें भारतीय अर्थव्यवस्था में नकदी की मांग लगातार बनी हुई है।

यानी भारत तेजी से बदल रहा है—लेकिन इस बदलाव के साथ नए सवाल भी उतनी ही तेजी से सामने आ रहे हैं।