नई दिल्ली/बीजिंग | 23 अगस्त 2026
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर उच्चस्तरीय कूटनीतिक बातचीत का नया दौर सोमवार से शुरू होने जा रहा है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल सोमवार को बीजिंग पहुंचेंगे, जहां मंगलवार को चीन के विदेश मंत्री और भारत-चीन सीमा वार्ता के चीनी विशेष प्रतिनिधि वांग यी के साथ विशेष प्रतिनिधि स्तर की 25वें दौर की बातचीत प्रस्तावित है।
यह वार्ता ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देश पिछले कुछ समय से सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा द्विपक्षीय संवाद को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। अगस्त की शुरुआत में हुई भारत-चीन Working Mechanism for Consultation and Coordination (WMCC) की 36वीं बैठक में दोनों पक्षों ने 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता की तैयारियों पर चर्चा की थी। चीन के विदेश मंत्रालय ने भी इस बैठक में सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन और दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की पुष्टि की थी।
25वें दौर की वार्ता क्यों अहम ?
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद के समाधान के लिए विशेष प्रतिनिधि तंत्र वर्ष 2003 में स्थापित किया गया था। इसका उद्देश्य करीब 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़े व्यापक सीमा विवाद का राजनीतिक समाधान तलाशना है।
हालांकि, इस तंत्र के जरिए अभी तक सीमा विवाद का अंतिम समाधान नहीं निकला है, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव के दौर में यह संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है।
अगस्त 2025 में हुई 24वें दौर की वार्ता में दोनों देशों ने सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने, सीमा प्रबंधन को बेहतर करने और सीमा विवाद के समाधान के लिए उचित राजनीतिक एवं कूटनीतिक ढांचा तलाशने पर सहमति जताई थी। दोनों पक्षों ने 2026 में चीन में 25वें दौर की बातचीत आयोजित करने पर भी सहमति बनाई थी।
सीमा पर शांति को भारत ने बताया रिश्तों की कुंजी
भारत लगातार यह रुख दोहराता रहा है कि चीन के साथ द्विपक्षीय संबंधों में वास्तविक प्रगति के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल में कहा कि 2020 से 2024 के बीच दोनों देशों के संबंधों में मुश्किल दौर रहा और सीमा की स्थिति का द्विपक्षीय संबंधों पर सीधा प्रभाव पड़ा।
नई दिल्ली की नीति का मूल संदेश स्पष्ट है—सीमा पर शांति होगी तो ही भारत-चीन संबंधों में व्यापक सुधार की गुंजाइश बढ़ेगी।
भारत के विदेश मंत्रालय ने भी LAC पर शांति और स्थिरता को दोनों देशों के संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है।
अरुणाचल प्रदेश भी बना अहम मुद्दा
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद में अरुणाचल प्रदेश लंबे समय से संवेदनशील मुद्दा रहा है।
चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा जताता रहा है, जबकि भारत स्पष्ट रूप से कहता है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।
हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में चीनी गतिविधियों को लेकर भी चर्चाएं हुई हैं। बीजिंग ने दूसरी ओर चीन-भारत सीमा की मौजूदा स्थिति को सामान्य रूप से स्थिर बताया है। अगस्त में WMCC की बैठक के दौरान दोनों देशों ने सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए राजनयिक और सैन्य स्तर पर संवाद जारी रखने पर सहमति जताई थी।
शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा का कनेक्शन
डोभाल-वांग वार्ता की टाइमिंग को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत सितंबर में BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है।
18वां BRICS शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होना निर्धारित है। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सम्मेलन में शामिल होने की संभावित भारत यात्रा को लेकर भी चर्चा है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उनकी यात्रा की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी संभावित मुलाकात दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है।
ऐसे में डोभाल और वांग यी की वार्ता को केवल सीमा विवाद तक सीमित बैठक के तौर पर नहीं, बल्कि भारत-चीन संबंधों में आगे की कूटनीतिक दिशा तय करने वाले संवाद के रूप में भी देखा जा रहा है।
2025 की बातचीत में क्या हुआ था ?
अगस्त 2025 में नई दिल्ली में हुई 24वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता में दोनों देशों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया था।
इसके अलावा दोनों पक्षों ने सीमा निर्धारण के कुछ क्षेत्रों में शुरुआती प्रगति तलाशने के लिए विशेषज्ञ समूह बनाने, प्रभावी सीमा प्रबंधन के लिए कार्य समूह गठित करने और राजनयिक तथा सैन्य तंत्र के जरिए तनाव कम करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी।
दोनों देशों ने पारंपरिक सीमा व्यापार बाजारों को फिर से खोलने और सीमा-पार नदियों से जुड़े मुद्दों पर संपर्क बनाए रखने पर भी चर्चा की थी।
अब आगे क्या ?
25वें दौर की वार्ता में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही रहेगा कि क्या दोनों देश सीमा प्रबंधन और तनाव कम करने के मौजूदा तंत्र को आगे बढ़ाते हुए सीमा विवाद के दीर्घकालिक समाधान की दिशा में कोई ठोस प्रगति कर पाते हैं।
वार्ता का परिणाम भारत-चीन संबंधों की व्यापक दिशा के लिए भी महत्वपूर्ण होगा—खासकर तब, जब सितंबर में नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन होना है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि भारत और चीन ने संवाद की प्रक्रिया को जारी रखा है और सीमा विवाद के प्रबंधन के लिए स्थापित विशेष प्रतिनिधि तंत्र एक बार फिर सक्रिय भूमिका में है।











