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‘मुझे लगा मेरा करियर खत्म हो गया’: चीन की हिरासत में पहुंच गई थी खुफिया टीम, IIT रुड़की में अजीत डोभाल ने सुनाया करियर के शुरुआती दौर का किस्सा

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में अपने शुरुआती खुफिया करियर की एक घटना साझा की। उनके मुताबिक, सिक्किम में तैनाती के दौरान सीमा क्षेत्र में भेजी गई एक टीम निर्धारित समय पर वापस नहीं लौटी। बाद में पता चला कि टीम चीनी हिरासत में थी। डोभाल ने कहा कि उस समय उन्हें लगा था कि उनका करियर खत्म हो गया है।

रुड़की, 20 सितंबर 2026: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अपने खुफिया करियर के शुरुआती दिनों की एक बेहद चुनौतीपूर्ण घटना का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जब वह युवा अधिकारी के तौर पर सिक्किम में खुफिया जिम्मेदारी संभाल रहे थे, तब सीमा क्षेत्र में भेजी गई एक टीम तय समय पर वापस नहीं लौटी। कई दिनों तक टीम की कोई जानकारी नहीं मिलने के बाद उन्हें चिंता हुई। बाद में मुख्यालय से उन्हें बताया गया कि टीम चीन की हिरासत में है।

डोभाल ने यह घटना 19 सितंबर 2026 को IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए साझा की। IIT रुड़की के 2026 के दो दिवसीय दीक्षांत समारोह में डोभाल पहले दिन मुख्य अतिथि थे। संस्थान के अनुसार समारोह में कुल 2,701 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की जानी हैं।

सिक्किम में थी खुफिया जिम्मेदारी

डोभाल के मुताबिक, वह उस समय 20 की उम्र में थे और सिक्किम में खुफिया गतिविधियों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके अनुसार उस दौर में सिक्किम भारत के साथ एकीकरण की प्रक्रिया से गुजर रहा था और सीमा क्षेत्र में गतिविधियों पर नजर रखना उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा था।

उन्होंने बताया कि एक टीम को सीमा के उस इलाके में भेजा गया था और उम्मीद थी कि वह लगभग पांच-छह दिनों में वापस लौट आएगी। लेकिन निर्धारित समय गुजरने के बाद भी टीम वापस नहीं आई। कई दिन बीतने के बावजूद कोई सूचना नहीं मिली। डोभाल ने कहा कि उस समय उन्हें यह तक पता नहीं था कि टीम के साथ क्या हुआ—वे सुरक्षित हैं या किसी दुर्घटना का शिकार हो गए हैं।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब मुख्यालय से उन्हें फोन आया। वहां से पूछा गया कि क्या उन्होंने कुछ लोगों को सीमा पार भेजा था। डोभाल ने बताया कि उन्होंने जवाब दिया कि टीम को लौट आना चाहिए था, लेकिन अब कई दिन हो चुके थे।

इसके बाद उन्हें जानकारी दी गई कि टीम चीनी हिरासत में है। डोभाल के अनुसार, चीनी पक्ष ने टीम के सदस्यों को पकड़कर पूछताछ की थी। बाद में वे भारतीय अधिकारी/ऑपरेटिव वापस लौटे। डोभाल ने कहा कि उनकी रिहाई संभवतः बातचीत, किसी समझौते या किसी तरह की वार्ता के बाद हुई होगी। उन्होंने यह भी बताया कि लौटने पर टीम के सदस्य बेहद खराब मानसिक और शारीरिक स्थिति में थे।

‘मुझे लगा था करियर खत्म हो गया’

इस घटना के बाद जांच शुरू हुई। डोभाल ने बताया कि उस समय वह काफी युवा थे और उन्हें लगा कि यह घटना उनके करियर का अंत साबित हो सकती है।

उन्होंने कहा कि उन्हें लगा था कि अब उन्हें अपना करियर किसी दूसरे क्षेत्र में शुरू करना पड़ेगा। उन्होंने उस घटना को अपने लिए बेहद गैर-पेशेवर स्थिति के रूप में देखा।

हालांकि जांच पूरी होने के बाद उन्हें इस घटना के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया। डोभाल के अनुसार, जांच में यह सामने आया कि मुख्यालय से उपलब्ध कराए गए नक्शों और स्केच में कुछ गलतियां और खामियां थीं। उनके मुताबिक, इसी वजह से मिशन में समस्या पैदा हुई।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये विवरण डोभाल द्वारा 19 सितंबर को IIT रुड़की में सुनाए गए उनके व्यक्तिगत अनुभव और उनके बयान पर आधारित हैं। सार्वजनिक रिपोर्टों में इस पुराने ऑपरेशन के बारे में इससे अधिक परिचालन संबंधी विवरण उपलब्ध नहीं हैं।

एक शेरपा की सलाह बनी जीवन का सूत्र

डोभाल ने इस घटना के बाद मिले एक महत्वपूर्ण जीवन-पाठ का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि खुफिया विभाग में उनके साथ काम करने वाले एक तिब्बती शेरपा ने उन्हें नक्शा पढ़ने से जुड़ी एक सरल लेकिन गहरी सलाह दी।

डोभाल के अनुसार, उस शेरपा ने उन्हें समझाया कि जीवन में सबसे जरूरी तीन बातें हैं—आप अभी कहां हैं, आपको कहां जाना है और वहां पहुंचने का रास्ता क्या है।

डोभाल के लिए यह सलाह केवल पहाड़ों या किसी मिशन तक सीमित नहीं रही। उन्होंने बताया कि समय के साथ यह उनके लिए जीवन को समझने का एक तरीका बन गई।

युवाओं के लिए तकनीक और अवसरों का संदेश

IIT रुड़की में अपने संबोधन के दौरान डोभाल ने केवल अपने पुराने अनुभव ही साझा नहीं किए, बल्कि आज की युवा पीढ़ी के सामने मौजूद अवसरों की भी चर्चा की।

उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी के सामने तकनीक के कारण असाधारण अवसर मौजूद हैं। उनके अनुसार, तकनीकी बदलाव आने वाले समय में देशों और समाजों के विकास का एक महत्वपूर्ण चालक होगा।

IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह के पहले दिन 1,277 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। समारोह में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि भी मौजूद रहे।

डोभाल की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि जिस घटना को उन्होंने उस समय अपने करियर का अंत समझा था, वही अनुभव बाद में उनके लिए सीख का हिस्सा बन गया। उन्होंने छात्रों के सामने अपने अनुभव को साझा करते हुए यह संदेश दिया कि किसी कठिन परिस्थिति को अंतिम असफलता मानने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है।