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अलीगढ़ के बाजारों में UPI पर ‘कैश ही कैश’ का दबाव ! दुकानदारों ने QR कोड हटाए, नई MDR व्यवस्था पर जताई नाराजगी

अलीगढ़ में कुछ दुकानदारों ने नई UPI MDR व्यवस्था के विरोध में QR कोड हटाकर नकद भुगतान पर जोर दिया है। जानिए ₹2,000 से ऊपर UPI भुगतान पर क्या बदलने वाला है और ग्राहकों पर इसका क्या असर होगा।

अलीगढ़ में दुकानों से हटने लगे UPI QR कोड, व्यापारी बोले—बड़े भुगतान पर बढ़ेगा खर्च

अलीगढ़ के कई बाजारों में UPI भुगतान को लेकर व्यापारियों की नाराजगी अब दुकानों के काउंटर तक दिखाई देने लगी है। अमर उजाला की 17 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, रसलगंज, जयगंज, महावीरगंज, रेलवे रोड, घंटाघर, रामघाट रोड और दुबे का पड़ाव जैसे इलाकों में कुछ दुकानदारों ने QR कोड हटाने और नकद भुगतान को प्राथमिकता देने की बात कही। कुछ चाय और फल विक्रेताओं द्वारा UPI भुगतान स्वीकार नहीं करने की भी रिपोर्ट सामने आई है।

मामला उस नई MDR व्यवस्था से जुड़ा है, जिसके तहत 15 अक्टूबर 2026 से कुछ ₹2,000 से अधिक के व्यापारी UPI लेनदेन पर 0.4% MDR लागू किया जाना है। सामान्य श्रेणी में इसकी अधिकतम सीमा ₹300 बताई गई है। हालांकि, सरकारी स्पष्टीकरण के अनुसार यह ग्राहकों से सीधे लिया जाने वाला UPI शुल्क या टैक्स नहीं है।

सरकार के अनुसार, व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा। इसी तरह ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान पर MDR नहीं लगेगा। ₹1 लाख तक मासिक UPI प्राप्ति वाले पात्र छोटे व्यापारियों के लिए भी शून्य-MDR व्यवस्था जारी रहने की बात सरकार ने कही है। PIB के अनुसार लगभग 96% P2M लेनदेन इस नई MDR व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।

अलीगढ़ में क्यों बढ़ा विरोध ?

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने नई व्यवस्था पर आपत्ति जताई है। व्यापारियों का कहना है कि बड़े भुगतान पर MDR का खर्च उनके मार्जिन को प्रभावित कर सकता है। कुछ कारोबारियों ने यह भी चिंता जताई कि त्योहारी सीजन में बड़े लेनदेन बढ़ने पर अतिरिक्त लागत का असर कारोबार पर पड़ सकता है।

दुबे का पड़ाव के एक व्यापारी ने बड़े UPI भुगतान पर अतिरिक्त लागत की चिंता जताई, जबकि महावीरगंज के कारोबारी ने कहा कि व्यापारी खुद थोक बाजार से माल खरीदने के लिए डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल करते हैं। रेलवे रोड के एक कचौड़ी विक्रेता ने बताया कि उनके यहां नकद की तुलना में ऑनलाइन भुगतान अधिक आता है।

ग्राहकों की परेशानी भी सामने आई

अलीगढ़ में कुछ ग्राहकों ने कहा कि UPI उनके रोजमर्रा के भुगतान का हिस्सा बन चुका है। कई लोग बिना ज्यादा नकदी रखे घर से निकलते हैं और छोटी-बड़ी खरीदारी मोबाइल से कर लेते हैं। ऐसे में यदि अधिक दुकानदार UPI स्वीकार करना बंद करते हैं तो ग्राहकों को नकदी रखने या ATM से पैसे निकालने की जरूरत बढ़ सकती है।

पूरे विवाद का दूसरा पहलू

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। MDR और ग्राहक से लिया जाने वाला UPI शुल्क एक ही चीज नहीं हैं। वित्त मंत्रालय के आधिकारिक स्पष्टीकरण के अनुसार MDR भुगतान प्रणाली में शामिल भागीदारों के बीच वितरित होने वाला शुल्क है और इसे सरकार द्वारा ग्राहकों से वसूला जाने वाला टैक्स नहीं माना गया है।

दूसरी ओर, कारोबारी संगठनों ने इस व्यवस्था पर चिंता जताई है। Reuters के अनुसार Retailers Association of India समेत कुछ व्यापारिक संगठनों ने आशंका जताई है कि अतिरिक्त लागत से खासकर कम मार्जिन वाले कारोबार प्रभावित हो सकते हैं।

अर्थात, अलीगढ़ की मौजूदा तस्वीर UPI बंद होने की राष्ट्रीय घोषणा नहीं है, बल्कि नई MDR व्यवस्था को लेकर कुछ स्थानीय व्यापारियों की प्रतिक्रिया है।