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भारत की पहली फ्लाइट-प्रूवन स्वदेशी सैटेलाइट बैटरी तैयार: निर्मला सीतारमण ने सराहा, अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत को बड़ी उड़ान

नई दिल्ली / हैदराबाद।

देशी Flight-Proven (Flight Heritage Certified) सैटेलाइट बैटरी बन गई है। इस उपलब्धि पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे भारत के लिए “शानदार उपलब्धि” बताते हुए कहा कि इससे देश की आयातित सैटेलाइट बैटरियों पर निर्भरता कम होगी।

वित्त मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अब तक भारतीय सैटेलाइट निर्माता इस महत्वपूर्ण कंपोनेंट को विदेशी कंपनियों से अधिक कीमत और लंबी प्रतीक्षा अवधि के साथ खरीदने को मजबूर थे। लेकिन अब स्वदेशी तकनीक इस स्थिति को बदलने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।

यह उपलब्धि 18 जुलाई को Skyroot Aerospace के Vikram-1 रॉकेट के पहले मिशन ‘Agaman’ के दौरान हासिल हुई। मिशन में PowerBank-50 बैटरी को ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल में स्थापित किया गया, जहां इसने लगभग 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित CosmoServe Space के प्रायोगिक पेलोड को सफलतापूर्वक ऊर्जा प्रदान की।

पूरे मिशन के दौरान बैटरी ने अपेक्षित प्रदर्शन किया, जिसके बाद इसे अंतरिक्ष उद्योग का प्रतिष्ठित “Flight Heritage” प्रमाणन प्राप्त हुआ। यह प्रमाणन केवल उन हार्डवेयर को दिया जाता है जो वास्तविक अंतरिक्ष मिशन में सफलतापूर्वक कार्य कर चुके हों।

कंपनी के अनुसार, इस बैटरी में High Energy Density Lithium-Ion Cells, Smart Battery Management System (BMS), Integrated Cell Heater तथा Lightweight Aluminium Enclosure जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। इसे लॉन्च के दौरान होने वाले तीव्र कंपन, विकिरण, निर्वात और अंतरिक्ष के अत्यधिक तापमान को सहन करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।

PowerBank-50 का वजन लगभग 380 ग्राम है और यह 50 Wh से अधिक ऊर्जा संग्रहित कर सकती है। इसे विशेष रूप से CubeSat और Micro Satellite मिशनों के लिए विकसित किया गया है तथा यह Low Earth Orbit (LEO) में लगभग 5 वर्षों तक ऊर्जा उपलब्ध कराने में सक्षम है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस उपलब्धि से भारत के तेजी से विकसित हो रहे निजी अंतरिक्ष उद्योग, स्टार्टअप्स, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों को बड़ा लाभ मिलेगा। साथ ही, विदेशी बैटरियों पर निर्भरता घटने से लागत और समय दोनों की बचत होगी तथा भारतीय स्पेस इकोसिस्टम को नई गति मिलेगी।