दलेर मेहंदी विवाद :
कुंजापुरी मेले में मंच पर हुई घटना के बाद बढ़ा विवाद; मुख्यमंत्री ने बातचीत से मामला सुलझाने की बात कही
देहरादून। उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में आयोजित कुंजापुरी मेले के दौरान गायक दलेर मेहंदी और कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बीच हुए ‘दलेर मेहंदी विवाद’ ने नया मोड़ ले लिया है। गायक मीका सिंह ने एक बार फिर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हस्तक्षेप करने की अपील की है। मीका का कहना है कि मंत्री सुबोध उनियाल को एक वीडियो जारी कर अपनी टिप्पणी पर स्पष्टीकरण देना चाहिए और दलेर मेहंदी से माफी मांगनी चाहिए।
मीका सिंह ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री धामी के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने इस मामले में उनसे व्यक्तिगत रूप से फोन पर बातचीत की थी। मीका ने इसके लिए उनका आभार जताया और उम्मीद व्यक्त की कि इस विवाद को सम्मानजनक तरीके से समाप्त किया जा सकता है।
क्या है पूरा मामला ?
विवाद 18 अक्टूबर 2026 को टिहरी जिले के नरेंद्रनगर क्षेत्र में आयोजित सिद्धपीठ मां कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले के सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान शुरू हुआ। नवरात्र के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में दलेर मेहंदी प्रस्तुति दे रहे थे। इसी दौरान उत्तराखंड सरकार में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल मंच पर पहुंचे और गायक की प्रस्तुति पर सवाल उठाए।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मंत्री ने आरोप लगाया कि दलेर मेहंदी लाइव गाने के बजाय पहले से रिकॉर्ड किए गए संगीत पर लिप-सिंक कर रहे थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि गायक नशे की हालत में थे। इस दौरान मंच पर हुई बातचीत के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए, जिसके बाद मामला सार्वजनिक बहस का विषय बन गया।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मंत्री की ओर से लगाए गए नशे संबंधी आरोप को साबित करने वाली किसी चिकित्सकीय जांच की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं की गई है। इसलिए इस आरोप को प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
मीका सिंह ने क्या कहा ?
मीका सिंह ने अपने भाई दलेर मेहंदी का समर्थन करते हुए कहा कि कलाकारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक मंच पर किसी प्रतिष्ठित कलाकार को इस तरह डांटे जाने पर सवाल उठाया और आरोपों को गलत बताते हुए माफी की मांग की।
मीका ने मुख्यमंत्री धामी से आग्रह किया कि वे इस मामले को देखें और मंत्री से ऐसा कदम उठाने को कहें, जिससे विवाद का सम्मानजनक समाधान निकल सके। उन्होंने यह भी कहा कि कलाकार उत्तराखंड से प्रेम करते हैं, लेकिन उनके सम्मान और गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
मीका ने दलेर मेहंदी के कार्यक्रम में शामिल होने की परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, एक अन्य कलाकार सुनंदा शर्मा के अस्वस्थ होने के बाद दलेर मेहंदी ने कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के लिए सहमति दी थी। इस दावे को मीका का पक्ष मानते हुए ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का क्या रुख है ?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 22 अक्टूबर को मीका सिंह से फोन पर बातचीत की थी। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कहा कि किसी भी गलतफहमी या मतभेद को आपसी बातचीत और सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने उत्तराखंड में कलाकारों के सम्मान की परंपरा का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मंत्री सुबोध उनियाल अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं और उनका उद्देश्य कलाकार का अपमान करना नहीं था। धामी ने संकेत दिया कि अब इस विवाद को समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने दलेर मेहंदी से भी बातचीत करने की बात कही थी।

दलेर मेहंदी और विधायक सुबोध उनियाल – फोटो : सोशल मीडिया
सुबोध उनियाल की सफाई और ₹35 लाख का सवाल
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सुबोध उनियाल ने अपनी टिप्पणी का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें उस समय लगा था कि गायक सामान्य स्थिति में नहीं थे। उन्होंने प्रस्तुति में लिप-सिंक किए जाने पर भी सवाल उठाए और कार्यक्रम के लिए ₹35 लाख भुगतान किए जाने का उल्लेख किया।
मीका सिंह ने भुगतान संबंधी दावे पर भी सवाल उठाते हुए भुगतान की रसीद या संबंधित प्रमाण सार्वजनिक करने की मांग की। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर भुगतान की वास्तविक राशि, उसके तरीके और नशे संबंधी आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

कलाकारों के सम्मान और सार्वजनिक जवाबदेही का सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा किया है—यदि किसी कार्यक्रम में कलाकार की प्रस्तुति, भुगतान या अनुबंध को लेकर समस्या हो, तो उसका समाधान किस तरीके से किया जाना चाहिए?
आयोजकों को कार्यक्रम की गुणवत्ता और सार्वजनिक धन के उपयोग पर सवाल उठाने का अधिकार है। दूसरी ओर, किसी कलाकार के खिलाफ गंभीर आरोप लगाने से पहले तथ्यों की पुष्टि और सार्वजनिक व्यवहार में संयम भी जरूरी है। ऐसे मामलों में मंच पर टकराव के बजाय आयोजकों, कलाकार और संबंधित प्रशासन के बीच संवाद अधिक प्रभावी रास्ता हो सकता है।
फिलहाल विवाद के केंद्र में मीका सिंह की माफी की मांग और मुख्यमंत्री धामी की मामला समाप्त करने की अपील है। आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित पक्षों के बीच बातचीत होती है या नहीं और क्या इस मामले में कोई औपचारिक स्पष्टीकरण अथवा माफी सामने आती है।











