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सौर शक्ति से बदलेगा भारत का ऊर्जा परिदृश्य: PM-SSY से फ्लोटिंग सोलर को नई रफ्तार, 2030 के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य को मिलेगा बड़ा बल

सौर शक्ति से बदलेगा भारत का ऊर्जा परिदृश्य: PM-SSY

सौर ऊर्जा से आत्मनिर्भरता तक, विकसित भारत की राह रोशन कर रहा नया ऊर्जा मॉडल

नई दिल्ली। भारत ने स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY) को मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत देशभर में 5,000 मेगावाट फ्लोटिंग सोलर फोटोवोल्टिक परियोजनाओं का विकास किया जाएगा। इन परियोजनाओं के साथ ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Battery Energy Storage Systems) भी स्थापित की जाएगी, जिससे बिजली की उपलब्धता अधिक स्थिर और विश्वसनीय बन सके।

केंद्र सरकार के अनुसार इस योजना पर ₹5,070 करोड़ खर्च किए जाएंगे और इसे वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू किया जाएगा।

सौर ऊर्जा में भारत की ऐतिहासिक छलांग

पिछले एक दशक में भारत की स्थापित सौर क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। वर्ष 2014 में जहां देश की कुल सौर क्षमता लगभग 3 गीगावाट थी, वहीं 30 जून 2026 तक यह बढ़कर 162.15 गीगावाट हो चुकी है। यह वृद्धि भारत को दुनिया के सबसे तेज़ी से विकसित होते सौर ऊर्जा बाजारों में शामिल करती है।

फ्लोटिंग सोलर क्यों है खास?

फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं जलाशयों, बांधों और औद्योगिक तालाबों की सतह पर स्थापित की जाती हैं।

इससे—

  • कृषि भूमि का उपयोग नहीं करना पड़ता।
  • पानी के वाष्पीकरण में कमी आती है।
  • सोलर पैनलों की कार्यक्षमता बढ़ती है।
  • भूमि अधिग्रहण से जुड़ी चुनौतियां कम होती हैं।

ऊर्जा भंडारण से मिलेगी बड़ी राहत

PM-SSY के तहत कम से कम 10,000 मेगावाट ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी, जिससे लगभग दो घंटे तक अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे राज्यों को पीक डिमांड के दौरान बिजली आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी।

पर्यावरण और रोजगार दोनों को लाभ

राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (NISE) के अनुसार भारत में 102.18 GWp फ्लोटिंग सोलर क्षमता की संभावना है।

सरकार का अनुमान है कि PM-SSY के माध्यम से—

  • प्रतिवर्ष लगभग 10 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आएगी।
  • 16,000 से 17,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे।
  • घरेलू सोलर मॉड्यूल, बैटरी और फ्लोटेशन सिस्टम निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

2025 रहा रिकॉर्ड वर्ष

भारत ने वर्ष 2025 में 37 गीगावाट नई सौर क्षमता जोड़ी, जिससे वह वार्षिक वृद्धि के मामले में अमेरिका से आगे निकल गया।

वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 44.61 GW नई क्षमता जोड़ी गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी है।

2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म क्षमता का लक्ष्य

भारत ने COP26 में घोषित पंचामृत संकल्पों के तहत वर्ष 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता तथा 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि PM-SSY जैसी योजनाएं इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।