देहरादून | विशेष रिपोर्ट
उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-भानियावाला चार लेन सड़क परियोजना को लेकर चल रहे विवाद के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने परियोजना के लिए प्रस्तावित लगभग 3,000 पेड़ों की कटाई पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह रोक तब तक जारी रहेगी जब तक सभी संबंधित पक्षों—स्थानीय नागरिकों, पर्यावरणविदों, विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन—के बीच व्यापक सहमति नहीं बन जाती।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य के विकास की आवश्यकता से सरकार पीछे नहीं हटेगी, लेकिन विकास की कीमत पर्यावरण, जनभावनाओं और स्थानीय हितों की अनदेखी करके नहीं चुकाई जाएगी।
सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संवाद और सर्वसम्मति की नीति पर विश्वास करती है तथा इसी उद्देश्य से मुख्य सचिव स्तर पर सभी हितधारकों के साथ पुनः विस्तृत वार्ता के निर्देश दिए गए हैं।
परियोजना क्या है?
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा प्रस्तावित इस परियोजना के अंतर्गत ऋषिकेश से भानियावाला तक लगभग 20 किलोमीटर सड़क को चार लेन में विकसित किया जाना है।
सरकार का तर्क है कि इससे—
- ऋषिकेश और देहरादून के बीच यातायात सुगम होगा।
- चारधाम यात्रा के दौरान लगने वाले जाम में कमी आएगी।
- दुर्घटनाओं में कमी होगी।
- पर्यटन एवं आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
विवाद की मुख्य वजह
इस परियोजना के लिए लगभग 3,000 परिपक्व वृक्षों की कटाई प्रस्तावित है।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि सड़क का महत्वपूर्ण हिस्सा राजाजी टाइगर रिजर्व के संवेदनशील हाथी कॉरिडोर से होकर गुजरता है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि—
- हाथियों का प्राकृतिक आवागमन प्रभावित हो सकता है।
- जैव विविधता को नुकसान होगा।
- कार्बन अवशोषण क्षमता घटेगी।
- भविष्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ सकता है।
कई दिनों से चल रहा था विरोध
पिछले कई दिनों से सात मोड़ क्षेत्र सहित विभिन्न स्थानों पर
- पर्यावरण कार्यकर्ता,
- स्थानीय नागरिक,
- छात्र,
- सामाजिक संगठन
लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि वृक्षों की कटाई पुलिस सुरक्षा में की जा रही थी जबकि स्थानीय लोगों की आपत्तियों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा—
“मेरे लिए उत्तराखंड का पर्यावरण, जनभावना और राज्य का विकास—तीनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।”
उन्होंने कहा कि परियोजना के संबंध में नागरिकों से मिले सुझावों का गंभीरता से अध्ययन किया गया है।

सरकार का पक्ष
राज्य सरकार के अनुसार—
- परियोजना उत्तराखंड हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप आगे बढ़ रही है।
- सभी वैधानिक एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ प्राप्त की जा चुकी हैं।
- वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए लगभग 3.5 किलोमीटर लंबा अंडरपास बनाया जाना प्रस्तावित है।
- विशेष वन्यजीव पुलिया भी विकसित की जाएंगी ताकि हाथियों सहित अन्य वन्यजीव सुरक्षित रूप से आवागमन कर सकें।
आगे क्या होगा?
सरकार अब—
- सभी हितधारकों से पुनः चर्चा करेगी।
- वैकल्पिक डिज़ाइन और समाधान पर विचार करेगी।
- व्यापक सहमति बनने के बाद ही अगला निर्णय लेगी।
निष्कर्ष
ऋषिकेश-भानियावाला परियोजना उत्तराखंड के लिए केवल सड़क निर्माण का प्रश्न नहीं है। यह उस संतुलन की परीक्षा है जिसमें विकास, पर्यावरण और जनभागीदारी—तीनों को समान महत्व देना होगा। यदि व्यापक संवाद के आधार पर समाधान निकलता है, तो यह हिमालयी राज्यों के लिए भविष्य की विकास परियोजनाओं का एक महत्वपूर्ण मॉडल बन सकता है।











