CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पदाधिकारियों के कार्यकाल और सेवा शर्तों को नए कानून के दायरे में लाने पर BCCI और राज्य क्रिकेट संघों से जवाब मांगा
तारीख: 9 सितंबर 2026
स्थान: नई दिल्ली
नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट प्रशासन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी BCCI और सभी राज्य क्रिकेट संघों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उन पर National Sports Governance Act, 2025 यानी राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 लागू क्यों नहीं होना चाहिए।
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने BCCI और राज्य क्रिकेट संघों की ओर से पेश वकीलों से इस मुद्दे पर निर्देश लेने को कहा। खास तौर पर अदालत ने यह सवाल उठाया कि इन संस्थाओं के पदाधिकारियों के कार्यकाल और सेवा की शर्तें क्या अब 2025 के कानून के तहत नियंत्रित नहीं होनी चाहिए।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 का उद्देश्य खेल प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही, नैतिक आचरण और सुशासन को बढ़ावा देना है। कानून 18 अगस्त 2025 को अधिनियमित हुआ था और इसे अलग-अलग प्रावधानों के जरिए चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। India Code के अनुसार अधिनियम का प्रवर्तन 1 जनवरी 2026 से शुरू हुआ और बाद में इसके अन्य प्रावधान भी अधिसूचित किए गए।
BCCI पर क्या असर पड़ सकता है ?
सुप्रीम कोर्ट का ताजा सवाल सीधे तौर पर इस बात से जुड़ा है कि BCCI और राज्य क्रिकेट संघों के प्रशासनिक ढांचे तथा उनके पदाधिकारियों की सेवा शर्तों को नए राष्ट्रीय खेल शासन ढांचे के साथ किस तरह देखा जाए।
अदालत ने फिलहाल यह फैसला नहीं सुनाया है कि BCCI पर अधिनियम निश्चित रूप से लागू होगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने BCCI और राज्य क्रिकेट संघों से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है। इसलिए इसे अभी अंतिम न्यायिक निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
मामला नया नहीं, पुराना विवाद जारी
BCCI से जुड़ी यह न्यायिक कार्यवाही वर्ष 2014 से सुप्रीम कोर्ट के सामने चल रही है। इस दौरान क्रिकेट प्रशासन में सुधार से जुड़े कई आवेदन अदालत में आते रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले पूर्व CJI आर.एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी। समिति को BCCI के कामकाज और संरचना में सुधार के लिए सुझाव देने की जिम्मेदारी दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने बाद में समिति की कई सिफारिशों को स्वीकार करते हुए BCCI की संरचना, संगठन और कामकाज में सुधार का रास्ता तैयार किया।
2022 में BCCI के कार्यकाल पर क्या फैसला हुआ था ?
सितंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने BCCI के संविधान में संशोधन की अनुमति दी थी। उस व्यवस्था के तहत किसी पदाधिकारी के लिए राज्य क्रिकेट संघ और BCCI में लगातार कार्यकाल को लेकर नियमों में बदलाव किया गया।
अदालत ने कहा था कि एक पदाधिकारी राज्य क्रिकेट संघ में छह साल और BCCI में छह साल, यानी कुल 12 साल तक लगातार पद पर रह सकता है, जिसके बाद तीन साल का cooling-off period लागू होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि किसी व्यक्ति को राज्य संघ और BCCI—दोनों स्तरों पर एक ही पद पर लगातार दो कार्यकाल की अनुमति हो सकती है, जिसके बाद तीन वर्ष का कूलिंग-ऑफ लागू होगा।
अब नए National Sports Governance Act, 2025 के लागू होने के बाद यह सवाल फिर महत्वपूर्ण हो गया है कि BCCI और उसके राज्य संघों के प्रशासनिक नियमों तथा पदाधिकारियों की सेवा शर्तों का नए वैधानिक ढांचे के साथ क्या संबंध होगा।
National Sports Governance Act क्या है ?
National Sports Governance Act, 2025 संसद द्वारा पारित कानून है। इसका उद्देश्य भारत में खेल प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना तथा खेल संस्थाओं में सुशासन, नैतिकता और निष्पक्षता को मजबूत करना है।
कानून में राष्ट्रीय खेल निकायों, National Sports Board, मान्यता प्राप्त खेल संगठनों, आचार संहिता, सुरक्षित खेल व्यवस्था, चुनावी प्रक्रिया और Sports Tribunal जैसे प्रावधान शामिल हैं।
सरकार ने कानून को एक साथ लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू किया है। 1 जनवरी 2026 से इसके कई महत्वपूर्ण प्रावधान लागू किए गए थे और मई 2026 में दूसरे चरण के कुछ प्रावधानों को भी अधिसूचित किया गया।
अब आगे क्या होगा ?
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने BCCI और राज्य क्रिकेट संघों को इस सवाल पर अपने पक्ष और निर्देश स्पष्ट करने को कहा है।
इसका मतलब यह है कि अभी BCCI पर National Sports Governance Act लागू होने को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। आगे की सुनवाई में अदालत इस बात पर विचार कर सकती है कि कानून के प्रावधान क्रिकेट प्रशासन पर किस सीमा तक लागू होंगे और मौजूदा BCCI संविधान तथा न्यायालय के पूर्व आदेशों के साथ उनका क्या संबंध होगा।
हिंदी विंडो की रिपोर्टिंग में इस स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है—सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया है और स्पष्टीकरण मांगा है; अदालत ने अभी अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।












