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UN में भारत का पाकिस्तान पर तीखा हमला: ‘आतंक का फ्रेंकस्टीन’ अब अपने ही घर में मचा रहा तबाही

UN में भारत का पाकिस्तान

UN में भारत का पाकिस्तान पर … UN में भारत ने पाकिस्तान को घेरा, कहा—जिस आतंक को पाला वही अब पाकिस्तान के लिए बना बड़ा खतरा !

संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में भारत ने पाकिस्तान पर आतंकवादी नेटवर्क को समर्थन देने और बाद में उन पर नियंत्रण खोने का आरोप लगाया। भारतीय राजनयिक रघू पुरी ने पाकिस्तान के नेताओं के हालिया बयानों, मसूद अजहर, पहलगाम और 26/11 का हवाला देते हुए आतंकवाद के खिलाफ ठोस वैश्विक कार्रवाई की मांग की।

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद के मुद्दे पर एक बार फिर तीखा कूटनीतिक टकराव देखने को मिला। भारत ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह लंबे समय से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में खुद को पीड़ित और ‘फ्रंटलाइन स्टेट’ के रूप में पेश करता रहा है, लेकिन उसके अपने क्षेत्र में सक्रिय आतंकी और चरमपंथी नेटवर्क अब पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बन चुके हैं।

 

भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में प्रथम सचिव रघू पुरी ने पाकिस्तान के प्रतिनिधि के वक्तव्य के जवाब में ‘राइट ऑफ रिप्लाई’ के दौरान यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को केवल बयानों और राजनीतिक दावों से समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए आतंकवादियों के साथ-साथ उनके आयोजकों, वित्तपोषकों, समर्थकों और सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।

भारतीय पक्ष ने पाकिस्तान की स्थिति में कथित विरोधाभास को रेखांकित करते हुए कहा कि जिन आतंकी नेटवर्कों का इस्तेमाल लंबे समय तक पड़ोसी देशों को निशाना बनाने के लिए किया गया, वे अब पाकिस्तान के भीतर भी हिंसा और अस्थिरता पैदा कर रहे हैं। पुरी ने इस संदर्भ में ‘फ्रेंकस्टीन’ का रूपक इस्तेमाल किया और कहा कि पाकिस्तान ने जिन ताकतों को पैदा किया या संरक्षण दिया, वे अब उसके अपने समाज के लिए खतरा बन गई हैं। यह भारत का आरोप है; इसे संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

पाकिस्तान के अपने नेताओं के बयानों का हवाला

भारत ने अपने तर्क के समर्थन में पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व के हालिया बयानों का भी उल्लेख किया। भारतीय पक्ष ने पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज की सितंबर 2026 की टिप्पणी का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पंजाब को पड़ोसी देशों की तुलना में पड़ोसी पाकिस्तानी प्रांतों से अधिक सुरक्षा खतरा है। पाकिस्तान की स्थानीय रिपोर्टिंग के अनुसार, उन्होंने आतंकवाद के पंजाब में पड़ोसी प्रांतों और सीमावर्ती क्षेत्रों से आने की बात भी कही थी।

भारत ने इस संदर्भ को पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के 2018 के एक इंटरव्यू से भी जोड़ा, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों और मुंबई हमले जैसे घटनाक्रमों के संदर्भ में सवाल उठाए थे। भारतीय प्रतिनिधि ने इसी तर्क को आगे बढ़ाते हुए कहा कि किसी देश के लिए एक तरफ आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का दावा करना और दूसरी तरफ उसी पारिस्थितिकी तंत्र के प्रति अलग-अलग रवैया रखना लंबे समय तक संभव नहीं है।

मसूद अजहर का मुद्दा भी उठा

भारत ने जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर का मुद्दा भी संयुक्त राष्ट्र में उठाया। मसूद अजहर संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध व्यवस्था में सूचीबद्ध आतंकवादी है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध व्यवस्था के संदर्भ में उसकी सूचीबद्धता पहले से दर्ज है।

सितंबर 2026 में पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी की कथित 2026 ‘रेड बुक’ में मसूद अजहर को भगोड़े के तौर पर सूचीबद्ध किए जाने और उस पर सूचना देने वाले के लिए इनाम बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इससे पहले 2021 में उसके खिलाफ 50 लाख पाकिस्तानी रुपये के इनाम की घोषणा की गई थी।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में इस कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि मीडिया तक मसूद अजहर की पहुंच संभव है, तो पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों को भी उसके ठिकाने की जानकारी होनी चाहिए। हालांकि, यह भारतीय पक्ष की दलील है और अजहर के वास्तविक वर्तमान ठिकाने को लेकर सार्वजनिक रूप से अलग-अलग दावे मौजूद हैं। इसलिए इस बिंदु को निर्विवाद तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

पहलगाम और 26/11 का संदर्भ

भारत ने अपने वक्तव्य में 9/11, 26/11 और पहलगाम आतंकी हमले का भी उल्लेख किया। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि आतंकवाद के पीड़ितों को राजनीतिक पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि इंसानी जान के नुकसान के रूप में देखा जाना चाहिए।

भारत ने विशेष रूप से पहलगाम हमले का उल्लेख करते हुए धार्मिक पहचान के आधार पर पर्यटकों को निशाना बनाए जाने का आरोप दोहराया। भारत का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं सीमा पार आतंकवाद और धार्मिक चरमपंथ के खतरे को रेखांकित करती हैं। इस पूरे संदर्भ में भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ समान और प्रभावी मानदंड अपनाने की अपील की।

पाकिस्तान में आतंकवाद की वास्तविक चुनौती

संयुक्त राष्ट्र के अपने बयानों से भी यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान स्वयं गंभीर आतंकवादी हिंसा से जूझ रहा है। फरवरी 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इस्लामाबाद की एक मस्जिद पर हुए हमले की कड़ी निंदा की थी। जनवरी 2026 में बलूचिस्तान में हुए कई आतंकी हमलों के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने भी आतंकवाद की निंदा की थी।

मई 2026 में बलूचिस्तान में एक ट्रेन को निशाना बनाए जाने की घटना पर भी संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने आतंकवाद की निंदा करते हुए जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाने की मांग की थी।

इन घटनाओं से यह तथ्य सामने आता है कि पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी हिंसा एक वास्तविक सुरक्षा चुनौती है। हालांकि, पाकिस्तान के भीतर सक्रिय सभी आतंकी संगठनों की उत्पत्ति या उन्हें राज्य का समर्थन मिलने के आरोप अलग-अलग मामलों में अलग-अलग स्तर के प्रमाण और राजनीतिक दावों से जुड़े हैं। इसलिए हर संगठन या घटना को एक ही श्रेणी में रखना पत्रकारिता की दृष्टि से उचित नहीं होगा।

FATF का भी आया जिक्र

भारत ने आतंकवाद के वित्तपोषण के मुद्दे को भी उठाया और आगामी Financial Action Task Force यानी FATF की बैठक का संदर्भ दिया। रिपोर्टों के अनुसार FATF का अगला प्लेनरी सत्र अक्टूबर के अंत में पेरिस में प्रस्तावित है। भारत ने आतंकवाद के वित्तीय नेटवर्क पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी और कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।

क्या है इस पूरे विवाद का बड़ा संदेश ?

संयुक्त राष्ट्र में हुई यह बहस केवल भारत-पाकिस्तान के बीच आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक प्रश्न यह है कि आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था किस हद तक समान मानकों पर लागू होती है।

भारत का तर्क है कि आतंकवाद को ‘अच्छे’ और ‘बुरे’ या राजनीतिक उद्देश्य के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में नहीं बांटा जा सकता। वहीं पाकिस्तान लगातार आतंकवाद से खुद को प्रभावित देश के रूप में भी प्रस्तुत करता रहा है और भारत पर विभिन्न आरोप लगाता रहा है।

इसलिए संयुक्त राष्ट्र में मौजूदा टकराव का वास्तविक महत्व इस बात में है कि दोनों देशों के दावों से आगे बढ़कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय आतंकवाद के स्रोत, वित्तपोषण, सुरक्षित ठिकानों और सीमा-पार नेटवर्क के खिलाफ कितनी प्रभावी और प्रमाण-आधारित कार्रवाई करता है।