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UNESCO की Tentative List में भारत के 5 नए विरासत प्रस्ताव शामिल, उदयगिरि गुफाओं से लेकर सत्याग्रह स्थलों तक बढ़ी धरोहरों की सूची

UNESCO की Tentative List में भारत

UNESCO की Tentative List में भारत : बाघ गुफा चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला और चंबल घाटी के मंदिर समूह भी शामिल; भारत की UNESCO Tentative List में अब 78 प्रविष्टियां

नई दिल्ली/भोपाल, 30 सितंबर 2026। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। UNESCO की World Heritage Tentative List में भारत से पांच नई प्रविष्टियां शामिल की गई हैं। इनमें मध्य प्रदेश की बाघ गुफा चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला, चंबल घाटी के मंदिर समूह और उदयगिरि गुफाएं शामिल हैं। पांचवीं प्रविष्टि महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन के विकास और संस्थागत रूप से स्थापित होने से जुड़े भारत और दक्षिण अफ्रीका के स्थलों का एक serial transnational proposal है। UNESCO के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इन नई प्रविष्टियों के साथ भारत की Tentative List में कुल 78 प्रविष्टियां हो गई हैं।

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Tentative List में शामिल होने का क्या मतलब है ?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि Tentative List में शामिल होना World Heritage Site का अंतिम दर्जा मिलना नहीं है। UNESCO के अनुसार Tentative List उन संपत्तियों की सूची है, जिन्हें संबंधित देश भविष्य में World Heritage List में नामांकन के लिए विचार करना चाहता है। यानी यह विश्व धरोहर का अंतिम चयन नहीं, बल्कि नामांकन प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है।

UNESCO के मौजूदा रिकॉर्ड में नई भारतीय प्रविष्टियों के लिए जुलाई और सितंबर 2026 की submission dates दर्ज हैं। इनमें बाघ गुफा चित्रकारी, गिन्नौरगढ़ किला, चंबल घाटी के मंदिर समूह और उदयगिरि गुफाएं 8 जुलाई 2026 को दर्ज की गईं, जबकि ‘The Sites of Satyagraha’ नामक transnational proposal 3 सितंबर 2026 को दर्ज हुआ।

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उदयगिरि गुफाएं: गुप्तकालीन कला और धार्मिक स्थापत्य की महत्वपूर्ण विरासत

मध्य प्रदेश की उदयगिरि गुफाएं इस नई सूची में शामिल प्रमुख स्थलों में से एक हैं। UNESCO के अनुसार उदयगिरि पहाड़ी पर चट्टानों को काटकर बनाए गए धार्मिक परिसर का विकास मुख्य रूप से चौथी सदी के अंतिम दौर और पांचवीं सदी के प्रारंभ में गुप्त शासकों के संरक्षण में हुआ। यहां करीब 20 उत्खनित गुफाएं, मूर्तिकला पैनल, शिलालेख और पहाड़ी के प्राकृतिक भू-दृश्य से जुड़े तत्व मौजूद हैं।

उदयगिरि की पहचान विशेष रूप से इसके विशाल वराह शिल्प-पैनल और विष्णु से जुड़े अन्य शिल्पों के कारण है। UNESCO के नामांकन दस्तावेज में इसे प्रारंभिक हिंदू धार्मिक स्थापत्य, मूर्तिकला, शिलालेख और प्राकृतिक भू-दृश्य के एकीकृत रूप के महत्वपूर्ण उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया गया है। प्रस्ताव में उदयगिरि के लिए UNESCO के सांस्कृतिक मानदंड (ii), (iii) और (iv) का उल्लेख किया गया है।

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बाघ गुफाएं: गुप्तकालीन बौद्ध भित्तिचित्रों की विरासत

मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में बाघनी नदी के किनारे विंध्य क्षेत्र की दक्षिणी ढलान पर स्थित बाघ गुफाएं नौ चट्टानी बौद्ध गुफाओं का समूह हैं। UNESCO के अनुसार इनका विकास लगभग चौथी से छठी सदी ईस्वी के बीच हुआ। गुफाओं में मिले शिलालेख और वास्तु अवशेष इस क्षेत्र की धार्मिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की जानकारी देते हैं।

बाघ गुफाओं की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में वहां सुरक्षित भित्तिचित्र हैं। विशेष रूप से गुफा संख्या 4, जिसे रंग महल के नाम से भी जाना जाता है, में संरक्षित चित्रों को भारतीय बौद्ध mural tradition की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। UNESCO के दस्तावेज में इन चित्रों में धार्मिक विषयों के साथ-साथ राजदरबार, जुलूस, नर्तक, संगीतकार और सामाजिक जीवन से जुड़े दृश्य होने का उल्लेख है।

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गिन्नौरगढ़ किला: गोंड शासन और आदिवासी स्थापत्य की कहानी

नई प्रविष्टियों में मध्य प्रदेश का गिन्नौरगढ़ किला भी शामिल है। UNESCO के अनुसार यह मध्य भारत में राज गोंड शासकों की एक प्रमुख किलाबंद राजधानी थी और इसका विकास लगभग 15वीं से 18वीं सदी के बीच की राजनीतिक और स्थापत्य परंपराओं से जुड़ा है। यह किला वर्तमान में रातापानी वन्यजीव अभयारण्य के भीतर एक पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है।

UNESCO के प्रस्ताव में किले की प्राकृतिक भौगोलिक स्थिति, रक्षा व्यवस्था, जल प्रबंधन और आंतरिक संरचना को विशेष महत्व दिया गया है। दस्तावेज में किले के तीन प्रमुख क्षेत्र—रक्षा एवं सेवा क्षेत्र, प्रशासनिक/सैन्य क्षेत्र और आंतरिक राजकीय क्षेत्र—का उल्लेख मिलता है। साथ ही किले में जल संग्रहण से जुड़ी संरचनाओं और स्थापत्य अवशेषों का भी विवरण दिया गया है।

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चंबल घाटी के मंदिर समूह को भी जगह

UNESCO की वर्तमान Tentative List में Group of Temples of the Chambal Valley: Bateshwar, Padavali and Kakarmath नाम से एक नई प्रविष्टि दर्ज है। इसका संबंध मध्य प्रदेश की चंबल घाटी में स्थित बटेश्वर, पदावली और ककरमठ के मंदिर समूह से है। UNESCO की सूची में इसे 8 जुलाई 2026 की submission date के साथ दर्ज किया गया है।

सत्याग्रह से जुड़े भारत-दक्षिण अफ्रीका के स्थल

पांचवीं नई प्रविष्टि अन्य चार से अलग प्रकृति की है। ‘The Sites of Satyagraha: The Emergence and institutionalization of the non-violent movement’ एक proposed serial transnational property है, जिसमें भारत और दक्षिण अफ्रीका के कुल नौ घटक स्थलों को शामिल करने का प्रस्ताव है। UNESCO के अनुसार दो स्थल दक्षिण अफ्रीका में और सात भारत में हैं।

प्रस्तावित भारतीय स्थलों में महात्मा गांधी सत्याग्रह स्मारक, साबरमती आश्रम, मणि भवन, हरिजन सेवक संघ, सेवाग्राम आश्रम, आगा खान पैलेस और गांधी स्मृति शामिल हैं। दक्षिण अफ्रीका के लिए पीटरमैरित्ज़बर्ग स्टेशन और फीनिक्स सेटलमेंट प्रस्तावित हैं। UNESCO के अनुसार यह श्रृंखला सत्याग्रह की अवधारणा के विकास, प्रयोग, भारत में विस्तार और संस्थागत रूप लेने की प्रक्रिया को दर्शाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

भारत की विरासत सूची के लिए इसका महत्व

इन पांच नई प्रविष्टियों की खासियत यह है कि इनमें भारत की विरासत के अलग-अलग आयाम दिखाई देते हैं—प्राचीन बौद्ध कला, गुप्तकालीन धार्मिक स्थापत्य, आदिवासी-राजकीय इतिहास, मंदिर वास्तुकला और आधुनिक भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े स्थल। UNESCO की Tentative List में शामिल होना इन स्थलों को भविष्य के World Heritage nomination process के लिए औपचारिक दायरे में लाता है, लेकिन अंतिम विश्व धरोहर दर्जा अलग प्रक्रिया और मूल्यांकन के बाद ही निर्धारित होता है।

इसलिए फिलहाल इन स्थलों के बारे में सबसे सटीक स्थिति यही है कि वे UNESCO की Tentative List में शामिल किए गए हैं, World Heritage List में अभी अंकित नहीं हुए हैं। UNESCO के आधिकारिक रिकॉर्ड में भारत की Tentative List में 78 प्रविष्टियां दर्ज हैं।

स्रोत: UNESCO World Heritage Centre, DD News/Prasar Bharati
तथ्य-जांच स्थिति: उपलब्ध आधिकारिक UNESCO रिकॉर्ड से मिलान किया गया।