हिंदी विंडो

हिंदी में दुनिया, दुनिया में हिंदी…!

Advertisement

उत्तराखंड की भिलंगना घाटी में ग्लेशियरों का संकट गहराया, 51 साल में 5.33 किमी पीछे खिसका खतलिंग ग्लेशियर

देहरादून/टिहरी। उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल की भिलंगना घाटी से हिमालयी पर्यावरण में हो रहे बदलाव की एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, भिलंगना घाटी के प्रमुख ग्लेशियरों में लंबे समय से बर्फ का द्रव्यमान घट रहा है और हाल के वर्षों में यह प्रक्रिया और तेज हुई है।

वैज्ञानिकों ने वर्ष 1973 से 2025 तक भिलंगना घाटी के छह ग्लेशियरों—खतलिंग, फेटिंग, दूधगंगा, रतंगरियां, जोगिन और एक अनाम ग्लेशियर—का उपग्रह तस्वीरों तथा डिजिटल एलिवेशन मॉडल यानी DEM के माध्यम से अध्ययन किया। यह शोध 28 अगस्त 2026 को Regional Environmental Change में प्रकाशित हुआ है।

खतलिंग ग्लेशियर 5.33 किलोमीटर पीछे

अध्ययन का सबसे प्रमुख निष्कर्ष खतलिंग ग्लेशियर से जुड़ा है। वर्ष 1973 से 2024 के बीच इसका अग्रिम सिरा लगभग 5.33 किलोमीटर पीछे खिसका। शोध के अनुसार खतलिंग और फेटिंग ग्लेशियर लगभग वर्ष 2000 के आसपास एक-दूसरे से अलग हो गए।

खतलिंग ग्लेशियर का पीछे हटना शुरुआती अध्ययन अवधि में विशेष रूप से तेज रहा। 1973–2001 के दौरान इसके अग्रिम हिस्से के पीछे हटने की अधिकतम दर लगभग 150 मीटर प्रति वर्ष दर्ज की गई।

छह ग्लेशियरों के क्षेत्रफल में कमी

1973 से 2024 के बीच अध्ययन किए गए सभी छह ग्लेशियरों के क्षेत्रफल में कमी दर्ज की गई।

सबसे अधिक क्षेत्रफल खतलिंग ग्लेशियर ने खोया, जिसकी कमी लगभग 2.79 वर्ग किलोमीटर रही। इसके बाद फेटिंग में करीब 0.71, दूधगंगा में 0.64, अनाम ग्लेशियर में 0.50, जोगिन में 0.35 और रतंगरियां में 0.23 वर्ग किलोमीटर की कमी दर्ज हुई।

2014 के बाद बर्फ की कमी और तेज

शोध का सबसे महत्वपूर्ण संकेत हाल की अवधि से जुड़ा है। वैज्ञानिकों के अनुसार 2014–2025 के दौरान खतलिंग और अनाम ग्लेशियर में mass loss की दर 1973–2000 की तुलना में लगभग चार से पांच गुना तक बढ़ी। अध्ययन में यह भी पाया गया कि सतह का पतला होना केवल ग्लेशियर के निचले हिस्से तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ऊंचाई की ओर accumulation zone तक इसका प्रभाव दिखाई दे रहा है।

शोध में छह ग्लेशियरों के औसत वार्षिक mass balance में भी नकारात्मक रुझान दर्ज किया गया। इसका अर्थ है कि ग्लेशियर जितना बर्फीला द्रव्यमान जमा कर रहे हैं, उससे अधिक द्रव्यमान खो रहे हैं।

बढ़ रही है हिमनदीय झील

अध्ययन में भिलंगना घाटी के एक अनाम ग्लेशियर के सामने बन रही झील को भी विशेष रूप से चिन्हित किया गया है। शोध के अनुसार इस proglacial lake का क्षेत्रफल वर्ष 2024 तक लगभग 0.36 वर्ग किलोमीटर हो गया था। वैज्ञानिकों ने इसे संभावित रूप से खतरनाक हिमनदीय झील बताया है।

ऐसी झीलों में यदि प्राकृतिक बांध कमजोर पड़ता है और पानी अचानक बाहर निकलता है तो Glacial Lake Outburst Flood यानी GLOF की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए बढ़ती झीलों की निगरानी और संभावित खतरे का आकलन महत्वपूर्ण हो जाता है।

क्या उत्तराखंड में तत्काल बाढ़ आने वाली है ?

इस वैज्ञानिक अध्ययन को इस अर्थ में नहीं पढ़ा जाना चाहिए कि उत्तराखंड में तत्काल किसी बड़ी बाढ़ की भविष्यवाणी की गई है। अध्ययन मुख्य रूप से ग्लेशियरों के पीछे हटने, उनके mass loss और बढ़ती proglacial lake के कारण भविष्य के हिमनदीय खतरों की निगरानी की आवश्यकता पर जोर देता है।

भिलंगना घाटी क्यों महत्वपूर्ण है ?

भिलंगना नदी भागीरथी नदी की प्रमुख सहायक नदी है और भिलंगना घाटी के ग्लेशियरों से मिलने वाला पिघला हुआ पानी इस नदी तंत्र में योगदान करता है। वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार यह घाटी टिहरी जलाशय तथा downstream कृषि और आबादी के लिए भी महत्वपूर्ण है।

अध्ययन के मुताबिक भिलंगना नदी बेसिन लगभग 1,483 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। खतलिंग ग्लेशियर वर्ष 2024 में लगभग 10 किलोमीटर लंबाई के साथ इस घाटी का सबसे लंबा ग्लेशियर था।

वैज्ञानिकों का संदेश

वैज्ञानिक अध्ययन का निष्कर्ष स्पष्ट है—भिलंगना घाटी में ग्लेशियरों के thinning, retreat और mass loss की प्रक्रिया तेज हुई है। इसका असर भविष्य में जल संसाधनों, जलविद्युत, कृषि और ग्लेशियर-सम्बंधी प्राकृतिक खतरों पर पड़ सकता है।

इसलिए वैज्ञानिकों ने ग्लेशियरों और उनसे जुड़ी झीलों की लगातार निगरानी, hazard assessment और sustainable water management की आवश्यकता पर जोर दिया है।

हिंदी विंडो विश्लेषण: हिमालय में ग्लेशियरों का पीछे हटना केवल पर्यावरणीय बदलाव का संकेत नहीं है। यह आने वाले दशकों में उत्तराखंड के जल-स्रोतों, पहाड़ी बस्तियों, जलविद्युत परियोजनाओं और आपदा प्रबंधन के लिए भी महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है। इसलिए चेतावनी का अर्थ तत्काल भय नहीं, बल्कि समय रहते वैज्ञानिक निगरानी और तैयारी है।

#HindiWindow #Uttarakhand #KhatlingGlacier #BhilanganaValley #Glacier #Himalayas #GLOF #Tehri #ClimateChange #UttarakhandNews