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अमेरिका में H-1B वीजा पर फिर $100,000 का शुल्क, अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी करने वाली कंपनियों पर बढ़ेगी जांच; भारतीय IT प्रोफेशनल्स पर क्या असर ?

Trump H-1B Fee 2026: अमेरिका में फिर $100,000 H-1B शुल्क, छंटनी करने वाली कंपनियों पर सख्ती

Trump H-1B Fee 2026: अमेरिका ने H-1B से जुड़े $100,000 भुगतान की व्यवस्था अगले साल तक बढ़ाई। अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी करने वाली कंपनियों के H-1B आवेदनों की जांच भी बढ़ेगी। भारतीय IT प्रोफेशनल्स पर असर जानें।

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा कार्यक्रम को लेकर अपनी सख्त नीति को एक बार फिर आगे बढ़ाया है। अमेरिकी प्रशासन ने कुछ H-1B वीजा आवेदनों से जुड़े $100,000 के भुगतान की व्यवस्था को अगले 12 महीनों के लिए जारी रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही उन कंपनियों के H-1B आवेदनों की अतिरिक्त जांच के निर्देश दिए गए हैं, जिन्होंने हाल में अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की है या ऐसी छंटनी की योजना बनाई है।

व्हाइट हाउस की 18 सितंबर 2026 की घोषणा के अनुसार, 2025 में लागू की गई H-1B संबंधी राष्ट्रपति घोषणा को अतिरिक्त 12 महीनों के लिए बढ़ाया गया है। नई व्यवस्था 21 सितंबर 2026 से प्रभावी होगी और मौजूदा घोषणा के अनुसार 12 महीने बाद समाप्त होगी, जब तक इसे आगे नहीं बढ़ाया जाता।

क्या है $100,000 H-1B शुल्क का नया नियम ?

H-1B अमेरिका का एक गैर-आप्रवासी वीजा कार्यक्रम है, जिसके माध्यम से अमेरिकी कंपनियां विशेष कौशल वाले विदेशी कर्मचारियों को कुछ निर्धारित पेशेवर भूमिकाओं के लिए नियुक्त कर सकती हैं। टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और अन्य उच्च-कौशल वाले क्षेत्रों में इसका लंबे समय से इस्तेमाल होता रहा है।

ट्रंप प्रशासन ने सितंबर 2025 में कुछ H-1B मामलों के लिए $100,000 भुगतान की शर्त लागू की थी। अब 18 सितंबर 2026 की नई राष्ट्रपति घोषणा के जरिए इसे एक और वर्ष के लिए जारी रखा गया है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि यह सामान्य अर्थ में हर H-1B मामले पर समान रूप से लागू होने वाला नियमित वीजा शुल्क नहीं है। नई घोषणा विशेष रूप से उन H-1B कर्मचारियों के अमेरिका में प्रवेश को प्रतिबंधित करती है, जो अमेरिका के बाहर हैं और जिनकी संबंधित याचिका के साथ निर्धारित $100,000 भुगतान नहीं किया गया है, हालांकि राष्ट्रीय हित के आधार पर कुछ अपवादों का प्रावधान भी है।

अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी करने वाली कंपनियों पर निगरानी

इस नीति का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी से जुड़ा है।

DD News के अनुसार, नए कार्यकारी आदेश के तहत अमेरिका के विदेश विभाग, श्रम विभाग और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग को यह देखने के लिए कहा गया है कि H-1B कर्मचारी को स्पॉन्सर करने वाला नियोक्ता पिछले एक वर्ष में समान स्थिति वाले अमेरिकी कर्मचारियों की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष छंटनी कर चुका है या नहीं। एजेंसियों को यह भी देखना होगा कि कंपनी भविष्य में ऐसी छंटनी की योजना तो नहीं बना रही, जिससे समान प्रकार के अमेरिकी कर्मचारी प्रभावित हो सकते हैं।

हालांकि, एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि केवल किसी कंपनी द्वारा छंटनी किए जाने से H-1B आवेदन स्वतः खारिज करने का प्रावधान DD News द्वारा उद्धृत आदेश में नहीं बताया गया है। इसका अर्थ है कि छंटनी अब जांच और मूल्यांकन का एक महत्वपूर्ण कारक होगी, लेकिन हर मामले में स्वतः अस्वीकृति की बात नहीं कही गई है।

कई अमेरिकी एजेंसियां मिलकर करेंगी समीक्षा

H-1B आवेदनों की समीक्षा प्रक्रिया को ज्यादा व्यापक बनाने के लिए अमेरिका के श्रम, विदेश और होमलैंड सिक्योरिटी विभागों को अन्य सरकारी एजेंसियों से भी जानकारी लेने का निर्देश दिया गया है।

इसमें वाणिज्य विभाग, शिक्षा विभाग और Small Business Administration से वेतन, रोजगार, उद्योग, शिक्षा और आर्थिक परिस्थितियों से जुड़ी जानकारी हासिल करना शामिल है। श्रम विभाग को पहले से जमा Labour Condition Application डेटा की समीक्षा शुरू करने के लिए 30 दिनों की समय-सीमा भी दी गई है।

ट्रंप प्रशासन का क्या तर्क है ?

व्हाइट हाउस का कहना है कि H-1B कार्यक्रम का इस्तेमाल कुछ कंपनियों द्वारा अमेरिकी कर्मचारियों की जगह अपेक्षाकृत कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने के लिए किया गया। प्रशासन ने विशेष रूप से कुछ IT staffing और outsourcing कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। ये आरोप प्रशासन के आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज हैं; संबंधित उद्योगों की ओर से इन आरोपों का अलग-अलग जवाब और व्यापक कानूनी बहस जारी है।

व्हाइट हाउस के अनुसार, 2025 की नीति के बाद बड़ी IT outsourcing कंपनियों के H-1B registrations में काफी गिरावट आई। प्रशासन ने बताया कि बड़ी IT staffing और outsourcing कंपनियों के संयुक्त registrations 24,946 से घटकर 2,055 रह गए, यानी करीब 92 प्रतिशत की कमी। इसी तरह consular processing requests में FY2025 से FY2027 के बीच लगभग 97 प्रतिशत गिरावट का दावा किया गया है।

H-1B चयन प्रणाली में भी बदलाव

H-1B व्यवस्था में सिर्फ शुल्क ही नहीं, बल्कि चयन प्रणाली में भी बदलाव किया गया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, दिसंबर 2025 में Department of Homeland Security ने cap-subject H-1B petitions के लिए wage-weighted selection system लागू किया। इसका उद्देश्य अधिक वेतन और उच्च कौशल वाली नौकरियों को चयन प्रक्रिया में अधिक महत्व देना है।

व्हाइट हाउस के आंकड़ों के मुताबिक, FY2027 में कम से कम अमेरिकी Master’s degree वाले beneficiaries का हिस्सा FY2026 के 45.1 प्रतिशत से बढ़कर 66.1 प्रतिशत हो गया। वहीं, दो सबसे ऊंचे wage levels से जुड़े job offers कुल H-1B selections का लगभग 46.3 प्रतिशत रहे। ये आंकड़े अमेरिकी प्रशासन द्वारा जारी किए गए हैं और इन्हें उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

भारतीय IT प्रोफेशनल्स के लिए इसका क्या मतलब ?

भारत H-1B कार्यक्रम से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण देशों में से एक है। इसलिए अमेरिका की H-1B नीति में बड़े बदलाव का भारतीय IT professionals, technology companies और अमेरिका में skilled-worker hiring पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, मौजूदा घोषणा को इस रूप में नहीं देखा जाना चाहिए कि अमेरिका में पहले से काम कर रहे हर भारतीय H-1B कर्मचारी पर अचानक $100,000 का व्यक्तिगत शुल्क लगा दिया गया है। आधिकारिक घोषणा का मुख्य प्रावधान अमेरिका के बाहर मौजूद उन H-1B workers के प्रवेश से संबंधित है जिनकी petitions निर्धारित भुगतान के बिना हैं। मौजूदा H-1B holders और अलग-अलग परिस्थितियों वाले मामलों पर नियमों का प्रभाव अलग हो सकता है।

कानूनी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई

इस पूरी व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू अमेरिकी अदालतों में चल रही कानूनी चुनौती भी है। Reuters के अनुसार, जून 2026 में एक संघीय न्यायाधीश ने $100,000 शुल्क व्यवस्था को अवैध माना था और सरकार के खिलाफ फैसला दिया था। उस निर्णय के खिलाफ मामला Boston-based appeals court में विचाराधीन है। अमेरिकी Chamber of Commerce से जुड़े एक अन्य मामले में भी कानूनी प्रक्रिया जारी है।

इसलिए H-1B नीति को लेकर आने वाले महीनों में अदालतों के फैसले महत्वपूर्ण रहेंगे। प्रशासन ने फिलहाल व्यवस्था को आगे बढ़ाया है, लेकिन इसका अंतिम कानूनी स्वरूप न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम से प्रभावित हो सकता है।

आगे क्या ?

नई घोषणा के बाद H-1B hiring करने वाली अमेरिकी कंपनियों को अपने कर्मचारियों की भर्ती, वेतन, छंटनी और immigration compliance से जुड़े रिकॉर्ड पर अधिक ध्यान देना पड़ सकता है। खासकर उन कंपनियों के लिए जांच का दायरा बढ़ सकता है जो अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी के साथ-साथ समान भूमिकाओं के लिए H-1B workers नियुक्त कर रही हैं।

भारतीय professionals के लिए इसका सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अमेरिका में skilled-worker immigration का regulatory environment पहले की तुलना में अधिक सख्त और जांच-आधारित हो गया है। लेकिन प्रत्येक H-1B मामले पर प्रभाव व्यक्ति, employer, petition और अमेरिका में उसकी मौजूदा स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है।

निष्कर्ष: ट्रंप प्रशासन ने H-1B कार्यक्रम पर $100,000 भुगतान से जुड़ी पाबंदी को एक और वर्ष के लिए आगे बढ़ाया है और अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी करने वाले H-1B sponsoring employers की जांच बढ़ाने का फैसला किया है। साथ ही, इस नीति को अदालतों में चुनौती भी मिली हुई है। इसलिए भारतीय professionals और अमेरिकी employers के लिए आगे की न्यायिक और प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।