टेक्सास में 90 फुट की हनुमान प्रतिमा पर सियासी विवाद, ‘जीतेंगे तो इसे गिरा देंगे’ टिप्पणी से मचा बवाल !
शुगर लैंड के श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में स्थापित ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद; अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक रुचिर बख्शी और हिंदू संगठनों ने जताया विरोध !!
अमेरिका के टेक्सास में भगवान हनुमान की 90 फुट ऊंची प्रतिमा को लेकर धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक पहचान और राजनीति से जुड़ी बहस तेज हो गई है। शुगर लैंड स्थित श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर परिसर में स्थापित इस विशाल प्रतिमा को ‘Statue of Union’ नाम दिया गया है। हालिया विवाद तब शुरू हुआ, जब कंजर्वेटिव विचारों से जुड़े यूट्यूबर जेसी ह्यूजेस ने सोशल मीडिया पर प्रतिमा की तस्वीर साझा करते हुए लिखा—“Btw, when we win, we are tearing this down.” यानी, “जब हम जीतेंगे, तो इसे गिरा देंगे।” हालांकि, ह्यूजेस ने अपनी पोस्ट में यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस ‘जीत’ की बात कर रहे थे।
इस टिप्पणी के बाद अमेरिकी हिंदू समुदाय और अन्य लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक रुचिर बख्शी, जो खुद को हिंदू-अमेरिकी बताते हैं, ने इस बयान का कड़ा विरोध किया। बख्शी ने सवाल उठाया कि किसी धार्मिक समुदाय के पूजा स्थल या धार्मिक प्रतीक को केवल उसकी आस्था के कारण निशाना बनाने की बात अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्रता के मूल्यों से कैसे मेल खाती है। उनकी प्रतिक्रिया के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया।
क्या है ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ ?
शुगर लैंड के श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर में स्थापित यह प्रतिमा लगभग 90 फुट ऊंची है। मंदिर और प्रतिमा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, यह Panchaloha Abhaya Hanuman प्रतिमा है और इसे भगवान हनुमान के बल, भक्ति तथा निस्वार्थ सेवा के प्रतीक के तौर पर प्रस्तुत किया गया है। इसे ‘Statue of Union’ इसलिए कहा गया है क्योंकि मंदिर की व्याख्या के अनुसार रामायण में भगवान हनुमान ने भगवान श्रीराम और माता सीता के पुनर्मिलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा अगस्त 2024 में हुई थी। उस समय इसे अमेरिका की सबसे ऊंची हनुमान प्रतिमाओं में से एक और अमेरिका की सबसे ऊंची प्रतिमाओं में शामिल बताया गया था। भारतीय और अमेरिकी मीडिया में इसके उद्घाटन को टेक्सास में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की सांस्कृतिक और धार्मिक उपस्थिति के संदर्भ में भी रिपोर्ट किया गया था।
श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, मंदिर 10098 Synott Road, Sugar Land, Texas में स्थित है। मंदिर स्वयं को पूजा, वैदिक शिक्षा, धार्मिक आयोजनों और सामाजिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में प्रस्तुत करता है।
विवाद अचानक क्यों बढ़ा ?
हालिया विवाद को केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं देखा जा रहा है। टेक्सास में भारतीय-अमेरिकी और दक्षिण एशियाई समुदाय को लेकर राजनीतिक बहस भी हाल के महीनों में चर्चा में रही है। Moneycontrol की रिपोर्ट के अनुसार, हनुमान प्रतिमा से जुड़ा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब टेक्सास में आगामी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के संदर्भ में आव्रजन, धार्मिक पहचान और भारतीय-अमेरिकी समुदाय की भूमिका जैसे मुद्दे राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बने हुए हैं।
इसी व्यापक राजनीतिक वातावरण में एक अन्य विवाद का भी उल्लेख किया गया है। टेक्सास रेलरोड कमीशन के रिपब्लिकन उम्मीदवार बो फ्रेंच ने दक्षिण एशियाई मूल के टेक्सास विश्वविद्यालय के छात्रों की एक तस्वीर पर टिप्पणी की थी, जिस पर दोनों दलों के नेताओं की आलोचना सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी सीनेटर जॉन कॉर्निन ने भी उस पोस्ट की आलोचना की थी। इस मामले को हनुमान प्रतिमा विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि दोनों घटनाओं में टेक्सास में दक्षिण एशियाई मूल के लोगों और उनकी अमेरिकी पहचान को लेकर बहस सामने आई।
हिंदू संगठनों की प्रतिक्रिया
रुचिर बख्शी की प्रतिक्रिया को Coalition of Hindus of North America (CoHNA) और टेक्सास स्थित अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक एवं राजनीतिक टिप्पणीकार कार्ल व्हील्स का समर्थन भी मिला। CoHNA ने सोशल मीडिया पर धार्मिक कट्टरता को लेकर चिंता जताई और बख्शी के साथ खड़े होने की बात कही।
हालांकि, इस पूरे विवाद में यह ध्यान रखना जरूरी है कि उपलब्ध रिपोर्टों में प्रतिमा को हटाने या गिराने के संबंध में किसी सरकारी आदेश या आधिकारिक कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। विवाद फिलहाल मुख्यतः सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी और उसके बाद हुई राजनीतिक एवं सामुदायिक प्रतिक्रियाओं से जुड़ा है।
टेक्सास में भारतीय-अमेरिकी समुदाय
टेक्सास अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय की महत्वपूर्ण आबादी वाले राज्यों में शामिल है। शुगर लैंड और ह्यूस्टन क्षेत्र में भारतीय मूल के लोगों की सामाजिक, व्यावसायिक और सांस्कृतिक उपस्थिति लंबे समय से रही है। ऐसे में 90 फुट की हनुमान प्रतिमा सिर्फ धार्मिक संरचना नहीं, बल्कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय की सांस्कृतिक उपस्थिति के प्रतीक के रूप में भी देखी जाती है।
श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट अपने उद्देश्यों में “Worship your own and respect all” यानी अपनी आस्था का पालन करने और सभी का सम्मान करने की भावना को प्रमुखता देती है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि एक सोशल मीडिया पोस्ट ने धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक विविधता को लेकर बहस को फिर से सामने ला दिया है। प्रतिमा स्वयं 2024 में स्थापित की गई थी और मंदिर परिसर में मौजूद है। ह्यूजेस की टिप्पणी को लेकर प्रतिक्रियाएं जारी हैं, लेकिन इसे किसी आधिकारिक सरकारी निर्णय या प्रतिमा हटाने की कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत करना उपलब्ध स्रोतों के आधार पर सही नहीं होगा।
हिंदी विंडो फैक्ट नोट:
दावा: 90 फुट की हनुमान प्रतिमा को गिराने की मांग/टिप्पणी हुई।
सत्यापन: यूट्यूबर जेसी ह्यूजेस की सोशल मीडिया पोस्ट की रिपोर्ट कई मीडिया संस्थानों ने की है।
स्थिति: प्रतिमा हटाने का कोई सरकारी आदेश उपलब्ध रिपोर्टों में सामने नहीं आया है।
स्थान: श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर, शुगर लैंड, टेक्सास।
स्थापना: अगस्त 2024











