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भारत-जापान संबंधों : मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने AI, ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर किए अहम समझौते

भारत-जापान संबंधों :

भारत-जापान शिखर सम्मेलन 2026: मोदी और सनाए ताकाइची ने AI, ऊर्जा, रक्षा और आर्थिक सुरक्षा पर किए बड़े समझौते

नई दिल्ली में आयोजित भारत-जापान शिखर सम्मेलन 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। जानिए बैठक की प्रमुख बातें।

भारत-जापान साझेदारी का नया अध्याय, AI से रक्षा सहयोग तक कई अहम समझौते

नई दिल्ली।

भारत और जापान ने अपनी विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को नई गति देते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा, उभरती प्रौद्योगिकियों और रक्षा सहयोग के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति व्यक्त की है। नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने द्विपक्षीय सहयोग को अगले स्तर तक ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक के बाद दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत और जापान केवल आर्थिक साझेदार ही नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, नियम-आधारित व्यवस्था और सुरक्षित समुद्री मार्गों के समर्थक रणनीतिक सहयोगी भी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और जापान की साझेदारी विश्वास, पारदर्शिता और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच विज्ञान, प्रौद्योगिकी, उद्योग, निवेश, कौशल विकास और रक्षा सहयोग आने वाले वर्षों में और अधिक मजबूत होगा।

जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने कहा कि जापान और भारत की क्षमताएँ एक-दूसरे की पूरक हैं। जापान की उन्नत विनिर्माण क्षमता और भारत की डिजिटल तथा सॉफ्टवेयर विशेषज्ञता मिलकर वैश्विक स्तर पर नई संभावनाएँ पैदा कर सकती हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती तकनीकों पर विशेष जोर

शिखर वार्ता के दौरान दोनों देशों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिजों, डिजिटल नवाचार और उच्च तकनीक उद्योगों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। दोनों देशों का मानना है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था में तकनीकी सहयोग निर्णायक भूमिका निभाएगा।

ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा नया आधार

ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को अधिक सुरक्षित और लचीला बनाने, स्वच्छ ऊर्जा, एलएनजी, हरित ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। दोनों देशों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितताओं के बीच दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देने की बात कही।

रक्षा सहयोग में नया कदम

बैठक की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में रक्षा क्षेत्र में पहला सह-विकास (Co-development) समझौता भी शामिल रहा। इसके साथ ही दोनों देशों ने रक्षा प्रौद्योगिकी, समुद्री सुरक्षा, संयुक्त अभ्यास और रक्षा उद्योग सहयोग को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

भारत और जापान पहले से ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र, खुला और नियम-आधारित समुद्री ढाँचा बनाए रखने के पक्षधर रहे हैं। दोनों देशों ने इस दिशा में सहयोग और मजबूत करने पर बल दिया।

निवेश और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

भारत और जापान ने निवेश, विनिर्माण, आधारभूत संरचना, आपूर्ति श्रृंखला और औद्योगिक सहयोग को और गति देने का निर्णय लिया। जापानी कंपनियों की भारत में बढ़ती भागीदारी तथा भारतीय बाजार में नई संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी हुई चर्चा

दोनों नेताओं ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं, तकनीकी सहयोग और बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत और जापान लोकतांत्रिक मूल्यों तथा नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मिलकर कार्य करते रहेंगे।

क्यों महत्वपूर्ण है यह शिखर सम्मेलन?

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं, भारत और जापान का यह सहयोग एशिया-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक और रणनीतिक संतुलन को नई मजबूती दे सकता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा उद्योग जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग आने वाले वर्षों में दोनों देशों की साझेदारी को और गहरा बना सकता है।

(यह समाचार भारत और जापान सरकार द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी तथा अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों में प्रकाशित तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया है।)