वृंदावन के प्रेमानंद आश्रम से जुड़े मामलों में जांच तेज :
कासगंज के 16 वर्षीय मयंक की तलाश जारी; अनुज चौधरी मामले में ताजा रिपोर्टों में बरामदगी की जानकारी, जबकि रसिक दुलारी शरण की मौत की जांच में पुलिस जुटी !
वृंदावन/मथुरा: उत्तर प्रदेश के वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े आश्रम और उसके आसपास के क्षेत्र को लेकर हाल के दिनों में सामने आए कुछ अलग-अलग मामलों ने पुलिस जांच और सार्वजनिक चर्चा को तेज कर दिया है। इनमें लापता युवकों के मामले और आश्रम से जुड़े एक शिष्य की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत प्रमुख हैं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर इन घटनाओं के बीच किसी प्रत्यक्ष आपराधिक संबंध की पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामलों की जांच जारी है और कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
सबसे हालिया चर्चा कासगंज के 16 वर्षीय मयंक सिंह चौहान के लापता होने को लेकर है। रिपोर्टों के अनुसार मयंक 7 अगस्त 2026 को घर से वृंदावन दर्शन के लिए निकलने के बाद वापस नहीं लौटा। उसके परिवार ने पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई है और परिजन मथुरा-वृंदावन, गोवर्धन और बरसाना सहित आसपास के क्षेत्रों में उसकी तलाश कर रहे हैं। परिवार का कहना है कि मयंक संत प्रेमानंद महाराज के वीडियो देखता था और धार्मिक गतिविधियों में उसकी रुचि थी। यह परिवार की ओर से बताया गया कारण है; इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसके लापता होने का कारण आश्रम ही था।
इसी क्रम में हाथरस जिले के सादाबाद क्षेत्र के अनुज चौधरी के लापता होने का मामला भी सामने आया। परिवार के अनुसार अनुज ने जून में संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली थी और 3 जुलाई को दोबारा आश्रम जाने की बात कहकर घर से निकला था। इसके बाद परिवार ने उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई और लंबे समय तक तलाश की। अक्टूबर की शुरुआत में परिजनों ने वृंदावन स्थित राधा केली कुंज के बाहर प्रदर्शन भी किया। पुलिस की मौजूदगी में धरना समाप्त कराया गया।
हालांकि, अनुज चौधरी के मामले में 3 अक्टूबर को सामने आई एक ताजा रिपोर्ट में उसकी बरसाना क्षेत्र में बरामदगी की जानकारी दी गई है। बरामदगी के बाद पुलिस ने मामले में आगे की कार्रवाई और परिस्थितियों की जांच की है।
इन मामलों के बीच सबसे गंभीर घटनाक्रम रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत का है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार 25 सितंबर 2026 को वृंदावन में आश्रम से जुड़े परिसर की चौथी मंजिल से गिरने के बाद उनकी मौत हुई। पुलिस की प्रारंभिक जांच में इसे आत्महत्या की दिशा में देखा गया, लेकिन घटनास्थल और फोरेंसिक साक्ष्यों से जुड़े कुछ सवालों के कारण जांच आगे बढ़ाई गई है।
रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, मोबाइल फोन, सीसीटीवी फुटेज और अन्य सामग्री को जांच के दायरे में रखा है। एक रिपोर्ट में कमरे से ग्राइंडर मिलने और फोरेंसिक जांच की बात कही गई है। पोस्टमार्टम से शरीर पर कई गंभीर चोटों की जानकारी सामने आने की भी रिपोर्टिंग हुई है। हालांकि, इन तथ्यों से अपने-आप हत्या या किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सिद्ध नहीं होती। पुलिस को यह निर्धारित करना है कि मौत की परिस्थितियां वास्तव में क्या थीं और घटनाक्रम में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
टीवी9 की 3 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, रसिक दुलारी शरण की मौत की जांच में पुलिस की सात टीमें काम कर रही हैं और 50 से अधिक लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। इसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मामले में विशेष जांच दल यानी SIT अथवा मजिस्ट्रियल जांच की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि SIT या मजिस्ट्रियल जांच की मांग किया जाना जांच के आदेश के बराबर नहीं है।
उधर, आश्रम से जुड़े ट्रस्ट की ओर से रसिक दुलारी शरण की मौत पर दुख जताते हुए लोगों से अफवाहों से बचने और जांच में सहयोग करने की अपील की गई है। इसका अर्थ यह है कि आश्रम पक्ष ने सार्वजनिक रूप से मामले की जांच का समर्थन किया है; इससे मामले में किसी पक्ष की कानूनी जिम्मेदारी या निर्दोषता स्वतः निर्धारित नहीं होती।
पूरे मामले में सबसे जरूरी बात यह है कि लापता होने की घटनाओं और रसिक दुलारी शरण की मौत के बीच फिलहाल कोई प्रमाणित प्रत्यक्ष संबंध सार्वजनिक रूप से स्थापित नहीं हुआ है। अलग-अलग मामलों को एक ही कारण या एक ही साजिश से जोड़ना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।
वर्तमान स्थिति में पुलिस के सामने प्राथमिक चुनौती लापता लोगों का पता लगाना, उपलब्ध CCTV और डिजिटल साक्ष्यों की जांच करना, प्रत्यक्षदर्शियों एवं संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ करना और मौत के मामले में फोरेंसिक निष्कर्षों के आधार पर घटनाक्रम की पुष्टि करना है।













