कॉर्बेट में भावुक विदाई : इंसान और वन्यजीव के रिश्ते की अनूठी मिसाल, विदाई समारोह में छलक पड़े सभी की आंखों से आंसू
‘हाथी मेरे साथी‘
उत्तराखंड के कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ एलीफैंट कैंप में एक ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। लगभग छह दशक की उम्र में वन विभाग की सेवा से सेवानिवृत्त हुए वन दरोगा भारत सिंह रावत अपने कार्यकाल के अंतिम दिन उस नन्हीं हथिनी ‘मालिनी’ से बिछड़ने का दर्द सहन नहीं कर सके, जिसकी उन्होंने पिछले कई महीनों तक अपने बच्चे की तरह देखभाल की थी।
कॉर्बेट में भावुक विदाई : विदाई समारोह के दौरान भारत सिंह रावत पहले हथिनी मालिनी के पास पहुंचे, उसके पैर छूकर आशीर्वाद लिया और फिर उसे गले लगाकर भावुक हो गए। कुछ ही क्षणों में उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। इस मार्मिक पल को देखकर वहां मौजूद वन अधिकारी, कर्मचारी, महावत और अन्य स्टाफ भी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके।
मरणासन्न हालत में मिली थी नन्हीं हथिनी
मालिनी की कहानी लगभग दस महीने पहले शुरू हुई थी। कोटद्वार क्षेत्र की मालन नदी के किनारे वन विभाग की रेस्क्यू टीम को महज 15 से 20 दिन की एक हथिनी बेहद कमजोर और मरणासन्न अवस्था में मिली थी। उसके जीवित बचने की संभावना बहुत कम मानी जा रही थी।
वन विभाग की टीम ने तत्काल उसे सुरक्षित रेस्क्यू कर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कालागढ़ एलीफैंट कैंप पहुंचाया। जिस नदी से वह मिली थी, उसी के नाम पर उसका नाम ‘मालिनी’ रखा गया। बाद में 19 फरवरी 2026 को उत्तराखंड के वन मंत्री सुबोध उनियाल की उपस्थिति में विधिवत नामकरण संस्कार भी संपन्न कराया गया।
भारत सिंह ने निभाई पिता जैसी जिम्मेदारी
कालागढ़ कैंप पहुंचने के बाद मालिनी की देखभाल की जिम्मेदारी वन दरोगा भारत सिंह रावत ने अपने हाथों में ली। उन्होंने उसे कभी केवल एक वन्यजीव नहीं माना, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह उसका पालन-पोषण किया।
समय पर दूध पिलाना, दवाइयां देना, स्वास्थ्य की निगरानी करना, भोजन की व्यवस्था करना और उसकी हर छोटी-बड़ी जरूरत का ध्यान रखना उनकी दिनचर्या बन गया। उन्होंने कैंप के कर्मचारियों को भी निर्देश दिए कि मालिनी की देखभाल में किसी प्रकार की लापरवाही न हो।
85 किलो से बढ़कर 280 किलो तक पहुंचा वजन
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार जब मालिनी को कैंप लाया गया था, तब उसका वजन केवल लगभग 85 किलोग्राम था। लगातार बेहतर चिकित्सा, संतुलित पोषण और नियमित देखभाल के कारण आज उसका वजन बढ़कर करीब 280 किलोग्राम हो चुका है।
वन क्षेत्राधिकारी नंद किशोर रुबाली के सहयोग से उपचार और आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था लगातार सुनिश्चित की जाती रही। अधिकारियों का कहना है कि मालिनी का स्वस्थ होना पूरी टीम की मेहनत और समर्पण का परिणाम है।
वन्यजीव संरक्षण को बनाया जीवन का लक्ष्य
विदाई समारोह में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों ने भारत सिंह रावत के लंबे सेवाकाल को याद करते हुए कहा कि उन्होंने वन विभाग की नौकरी को केवल सरकारी दायित्व नहीं माना, बल्कि जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा को अपना जीवन मिशन बनाया।
उनकी कार्यशैली, ईमानदारी और संवेदनशीलता आने वाली पीढ़ी के वनकर्मियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।
अब नई टीम संभालेगी जिम्मेदारी
कालागढ़ एलीफैंट कैंप में वर्तमान समय में गजराज, लक्षमा, सावन और मालिनी सहित कुल चार हाथी हैं। इनकी देखभाल के लिए महावत, चारा काटने वाले कर्मचारी तथा अन्य स्टाफ चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं। नियमित स्वास्थ्य परीक्षण पशु चिकित्सक डॉ. दुष्यंत कुमार शर्मा द्वारा किया जाता है।
भारत सिंह रावत की सेवानिवृत्ति के बाद कैंप की जिम्मेदारी रक्षित पांडेय को सौंपी गई है।
सीटीआर निदेशक ने बताया भावनात्मक जुड़ाव का महत्व
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने कहा कि वन क्षेत्रों में कार्य करने वाले कर्मचारी अक्सर उन वन्यजीवों से गहरा भावनात्मक संबंध बना लेते हैं, जिनका वे रेस्क्यू, उपचार और पालन-पोषण करते हैं।
उनके अनुसार किसी घायल या असहाय वन्यजीव को स्वस्थ होते और बड़ा होते देखना किसी भी वनकर्मी के लिए गर्व का विषय होता है। ऐसे में सेवा समाप्त होने या स्थानांतरण के समय उनसे बिछड़ना बेहद भावुक अनुभव बन जाता है।
समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश
भारत सिंह रावत और हथिनी मालिनी की यह भावुक विदाई केवल एक कर्मचारी की रिटायरमेंट नहीं, बल्कि इंसान और वन्यजीव के बीच विश्वास, प्रेम और संवेदनाओं के अद्भुत रिश्ते की मिसाल बन गई। यह घटना बताती है कि स्नेह, करुणा और अपनापन केवल इंसानों तक सीमित नहीं, बल्कि वन्यजीव भी उसे गहराई से महसूस करते हैं।















