हिंदी विंडो

हिंदी में दुनिया, दुनिया में हिंदी…!

Advertisement

तिब्बत में 7.0 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, कम से कम 16 लोगों की मौत; सैकड़ों मकान ध्वस्त

तिब्बत के नागचू क्षेत्र में भूकंप से प्रभावित मकान और राहत अभियान

उत्तरी तिब्बत के नागचू क्षेत्र में भूकंप के बाद राहत और बचाव अभियान जारी। शुरुआती रिपोर्टों में दर्जनों लोगों के घायल होने की जानकारी; कई इलाकों में संचार और परिवहन प्रभावित।

हिंदी विंडो | अंतरराष्ट्रीय समाचार

तिब्बत/नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2026। चीन के दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र तिब्बत में 22 अक्टूबर की रात आए शक्तिशाली भूकंप ने कई इलाकों में भारी नुकसान पहुँचाया है। उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के अनुसार, भूकंप के कारण कम से कम 16 लोगों की मौत हुई है। दर्जनों लोग घायल हुए हैं और सैकड़ों मकानों के ढहने की खबर है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स और एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्टों के मुताबिक, चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने स्थानीय अधिकारियों के हवाले से मृतकों की संख्या 16 बताई है। घायलों के आँकड़े अलग-अलग अपडेट में भिन्न हैं। रॉयटर्स की शुरुआती रिपोर्ट में 32 घायलों का उल्लेख है, जबकि 23 अक्टूबर को प्रकाशित एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट में यह संख्या 46 बताई गई। इसलिए घायलों की अंतिम संख्या की पुष्टि के लिए आधिकारिक अपडेट आवश्यक है।

कहाँ आया भूकंप और कितनी थी तीव्रता ?

रिपोर्टों के अनुसार, भूकंप गुरुवार, 22 अक्टूबर को स्थानीय समयानुसार रात करीब 10 बजकर 33 मिनट पर आया। इसका केंद्र उत्तरी तिब्बत के नागचू शहर के एक विरल आबादी वाले, ऊँचाई पर स्थित क्षेत्र में था।

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने भूकंप की तीव्रता 7.0 दर्ज की। उसकी रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र नागचू से लगभग 191 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व में था और भूकंप की गहराई करीब 18 किलोमीटर थी। वहीं चीनी स्रोतों में इसकी गहराई लगभग 10 किलोमीटर बताई गई है। अलग-अलग एजेंसियों की गणना में अंतर हो सकता है, इसलिए स्थान और गहराई के आँकड़ों को संबंधित एजेंसी के संदर्भ में ही समझना चाहिए।

नागचू तिब्बत की राजधानी ल्हासा से लगभग 400 किलोमीटर दूर स्थित है। यह क्षेत्र ऊँचाई, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और ठंडे मौसम के कारण राहत एवं बचाव कार्यों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

सैकड़ों मकानों को नुकसान, बचाव अभियान जारी

स्थानीय अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में कम से कम 339 मकानों के ढहने की जानकारी दी गई है। कुछ पशुशालाओं को भी नुकसान पहुँचा है। भूकंप के बाद कई लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने लगे।

रिपोर्टों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र में राहत और बचाव कार्यों के लिए 1,600 से अधिक कर्मियों को लगाया गया। राहत सामग्री में तंबू, अस्थायी आवास, बिस्तर, टॉर्च और ठंड से बचाव के कपड़े शामिल हैं। इन सामग्रियों की आवश्यकता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि प्रभावित क्षेत्र ऊँचाई पर स्थित है और रात के समय तापमान काफी कम हो सकता है।

अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में मलबे में फँसे लोगों की तलाश, घायलों को चिकित्सा सहायता पहुँचाना, क्षतिग्रस्त इमारतों का आकलन और प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराना शामिल है।

सड़क और संचार व्यवस्था पर भी असर

समाचार रिपोर्टों के अनुसार, भूकंप के बाद कुछ क्षेत्रों में संचार सेवाएँ बाधित हुईं। चट्टानें गिरने के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग-317 के एक हिस्से पर भी आवाजाही प्रभावित हुई और वहाँ सामान्य यातायात पर प्रतिबंध लगाया गया। कुछ रेल सेवाओं को भी एहतियातन रोके जाने की जानकारी सामने आई।

ऐसी परिस्थितियों में राहत दलों तक उपकरण, चिकित्सा सामग्री और खाद्य आपूर्ति पहुँचाना कठिन हो सकता है। ऊँचाई वाले क्षेत्रों में मौसम की स्थिति भी अभियान की गति को प्रभावित कर सकती है। स्थानीय अधिकारियों को क्षतिग्रस्त मार्गों की जाँच और सुरक्षित आवाजाही बहाल करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने पड़ सकते हैं।

भूकंप के बाद आफ्टरशॉक का खतरा

बड़े भूकंप के बाद आसपास के क्षेत्रों में छोटे या अपेक्षाकृत कम तीव्रता वाले झटके आ सकते हैं, जिन्हें आफ्टरशॉक कहा जाता है। ये झटके पहले से कमजोर हो चुकी इमारतों को और नुकसान पहुँचा सकते हैं।

इसलिए विशेषज्ञों की जाँच और स्थानीय प्रशासन की अनुमति के बिना क्षतिग्रस्त मकानों में दोबारा प्रवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। प्रभावित लोगों के लिए सुरक्षित स्थानों पर रहना और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना महत्वपूर्ण है।

भूकंप की तीव्रता और उससे होने वाला नुकसान केवल एक संख्या से निर्धारित नहीं होता। जमीन की बनावट, भूकंप की गहराई, आबादी की स्थिति, इमारतों की गुणवत्ता और केंद्र से दूरी जैसे कारक भी नुकसान की मात्रा को प्रभावित करते हैं।

तिब्बत में भूकंप का खतरा क्यों महत्वपूर्ण है ?

तिब्बत और उसके आसपास का हिमालयी क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से सक्रिय क्षेत्र में आता है। भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों की परस्पर गति के कारण हिमालय में भूगर्भीय तनाव जमा होता रहता है। इस तनाव के मुक्त होने पर भूकंप आ सकते हैं।

हालाँकि, किसी क्षेत्र में भूकंप आने के बाद उसके अगले झटके की सटीक तारीख, समय या तीव्रता की विश्वसनीय भविष्यवाणी करना वर्तमान विज्ञान की क्षमता से बाहर है। इसलिए आपदा की तैयारी, भवन निर्माण में भूकंपरोधी मानकों का पालन, स्थानीय चेतावनी प्रणालियाँ और प्रभावी बचाव व्यवस्था महत्वपूर्ण हैं।

आगे क्या ?

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल हैं—कितने लोग अभी भी घायल हैं, क्या मलबे में कोई फँसा हुआ है, कितने परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाना पड़ा है और प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, संचार तथा बिजली सेवाएँ कब तक बहाल होंगी।

हिंदी विंडो इन पहलुओं पर उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय समाचार स्रोतों के आधार पर अपडेट प्रकाशित करेगा। मृतकों, घायलों और संपत्ति के नुकसान के आँकड़े राहत अभियान आगे बढ़ने के साथ बदल सकते हैं।

संपादकीय नोट: इस समाचार में उद्धृत आँकड़े 23 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध समाचार रिपोर्टों पर आधारित हैं। घायलों की संख्या और भूकंप की गहराई में स्रोतों के बीच अंतर है। अंतिम प्रकाशन से पहले संबंधित अधिकारियों और नवीनतम विश्वसनीय रिपोर्टों से इनकी पुनः पुष्टि की जानी चाहिए।

स्रोत: Reuters; Associated Press; अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS)।

हिंदी विंडो — ‘हिंदी में दुनिया, दुनिया में हिंदी।’