पिथौरागढ़ की व्यास घाटी में आयोजित आदि कैलाश परिक्रमा रन 2.0 में देशभर के धावकों ने दिखाया दमखम। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विजेताओं को सम्मानित किया। अगले वर्ष 100 मील की अल्ट्रा रन आयोजित करने की योजना पर भी चर्चा।
पिथौरागढ़, 25 अक्टूबर 2026 | हिंदी विंडो डेस्क
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले की दुर्गम व्यास घाटी में आयोजित आदि कैलाश परिक्रमा रन 2.0 ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में साहसिक खेल और पर्यटन की संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर सामने रखा है। गुंजी में आयोजित कार्यक्रम के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया और विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए।
आदि कैलाश और उसके आसपास का क्षेत्र धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य तथा सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमांत भूभाग के लिए जाना जाता है। ऐसे क्षेत्र में उच्च हिमालयी परिस्थितियों के बीच लंबी दूरी की दौड़ का आयोजन खिलाड़ियों के लिए चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ उत्तराखंड के पर्यटन क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
26 राज्यों के धावकों ने लिया हिस्सा
आयोजन से संबंधित प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, दूसरे संस्करण में देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में धावक पहुंचे। 24 अक्टूबर को जारी एक रिपोर्ट में 26 राज्यों के लगभग 1,100 प्रतिभागियों के पंजीकरण की जानकारी दी गई थी, जबकि 25 अक्टूबर को प्रकाशित समापन संबंधी रिपोर्ट में पर्यटन विभाग के हवाले से कुल संख्या 1,300 बताई गई। इसलिए दोनों आंकड़ों को उनके संबंधित रिपोर्टिंग समय और संदर्भ के साथ समझना चाहिए।
इस आयोजन में 70 किलोमीटर की अल्ट्रा रन और 42 किलोमीटर की मैराथन प्रमुख आकर्षण रहे। इसके अतिरिक्त 25 अक्टूबर को 21 किलोमीटर, 10 किलोमीटर और 5 किलोमीटर की दौड़ की श्रेणियां भी निर्धारित थीं। आयोजन कार्यक्रम के अनुसार, 26 अक्टूबर को माउंटेन टेरेन बाइकिंग प्रतियोगिता भी रखी गई।
कठिन हिमालयी परिस्थितियों में धावकों की परीक्षा
आदि कैलाश क्षेत्र में दौड़ का अनुभव सामान्य मैदानी मैराथन से काफी अलग है। यहां ऊंचाई, कम ऑक्सीजन, कम तापमान, दुर्गम पहाड़ी रास्ते और मौसम में तेजी से होने वाले बदलाव प्रतिभागियों की शारीरिक क्षमता तथा तैयारी की परीक्षा लेते हैं।
आयोजन की 70 किलोमीटर श्रेणी ज्योलिंगकांग से शुरू होकर निर्धारित पहाड़ी मार्ग से गुंजी की ओर जाती है। इतनी लंबी दूरी और ऊंचाई वाले क्षेत्र में दौड़ आयोजित करने के लिए मार्ग प्रबंधन, चिकित्सा सहायता, आपातकालीन प्रतिक्रिया और प्रतिभागियों की सुरक्षा महत्वपूर्ण पहलू हैं।
जिला प्रशासन ने आयोजन की तैयारियों के दौरान धावकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर ध्यान देने की बात कही थी। अधिकारियों की ओर से मार्ग पर चिकित्सा सहायता और एंबुलेंस की व्यवस्था करने की जानकारी भी प्रकाशित हुई थी।
70 किलोमीटर दौड़ में दिगंबर रावत और मीनाक्षी नेगी विजेता
24 अक्टूबर को प्रकाशित अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, 70 किलोमीटर की दौड़ में चमोली के दिगंबर रावत ने पुरुष वर्ग में पहला स्थान हासिल किया। महिला वर्ग में पौड़ी गढ़वाल की मीनाक्षी नेगी विजेता रहीं। दोनों खिलाड़ियों ने पिछले संस्करण में भी जीत दर्ज की थी।
42 किलोमीटर की दौड़ में भी विभिन्न वर्गों में प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के परिणामों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पूरे मार्ग पर सेंसर और धावकों के जूतों में चिप लगाए जाने की जानकारी भी प्रकाशित हुई। इससे दौड़ के दौरान प्रतिभागियों की प्रगति और परिणामों के सत्यापन में मदद मिली।
सीमांत क्षेत्र और स्थानीय समुदाय के लिए क्या मायने हैं ?
आदि कैलाश परिक्रमा रन का महत्व केवल खेल प्रतियोगिता तक सीमित नहीं है। इस तरह के आयोजन व्यास घाटी और आसपास के सीमांत गांवों को देश के अन्य हिस्सों से आए लोगों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर देते हैं।
यदि आयोजन नियमित रूप से और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ता है, तो इससे स्थानीय आवास, भोजन, परिवहन, गाइड सेवाओं, हस्तशिल्प और अन्य पर्यटन गतिविधियों की मांग बढ़ने की संभावना बन सकती है। हालांकि, वास्तविक आर्थिक लाभ का आकलन करने के लिए स्थानीय रोजगार, पर्यटकों के खर्च और समुदाय की भागीदारी से संबंधित आंकड़ों की आवश्यकता होगी।
आयोजन के दौरान रं समुदाय की पारंपरिक संस्कृति और स्थानीय पहचान भी सामने आई। सीमांत गांवों के लोगों की भागीदारी इस बात को रेखांकित करती है कि पर्यटन विकास में स्थानीय समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण है।

पिथौरागढ़ के गुंजी में हुई आदि कैलाश परिक्रमा रन-2.0 दौड़ के विजेताओं को पुरस्कृत करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। – फोटो : सूचना विभाग
अगले वर्ष 100 मील की अल्ट्रा रन की योजना ?
आदि कैलाश परिक्रमा रन से जुड़ी अमर उजाला की 25 अक्टूबर की रिपोर्ट के शीर्षक में अगले वर्ष 100 मील की अल्ट्रा रन आयोजित करने की योजना का उल्लेख है। 100 मील लगभग 161 किलोमीटर के बराबर होता है। इतनी लंबी दूरी की दौड़ उच्च हिमालयी क्षेत्र में आयोजित करना आयोजन प्रबंधन, सुरक्षा, चिकित्सा सहायता, मार्ग निर्धारण और प्रतिभागियों की तैयारी के लिहाज से बड़ी चुनौती होगी।
हालांकि, इस प्रस्ताव की विस्तृत आधिकारिक रूपरेखा, अंतिम दूरी, तारीख, मार्ग और पंजीकरण संबंधी नियमों की पुष्टि संबंधित विभाग की औपचारिक घोषणा से की जानी चाहिए। फिलहाल इसे प्रस्तावित योजना के रूप में ही प्रस्तुत करना उचित है।
आगे की राह
आदि कैलाश परिक्रमा रन 2.0 ने उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन की संभावनाओं पर ध्यान आकर्षित किया है। लेकिन किसी भी उच्च हिमालयी खेल आयोजन की सफलता का आकलन केवल प्रतिभागियों की संख्या से नहीं, बल्कि सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय लोगों की भागीदारी और दीर्घकालीन आर्थिक लाभ से भी किया जाना चाहिए।
हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशील पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखते हुए पर्यटन गतिविधियों का विस्तार करना प्रशासन और आयोजकों के सामने एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
हिंदी विंडो का निष्कर्ष: आदि कैलाश परिक्रमा रन उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र को खेल और पर्यटन के मानचित्र पर पहचान दिलाने का अवसर है। इस पहल की दीर्घकालीन सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि साहसिक पर्यटन, स्थानीय संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और प्रतिभागियों की सुरक्षा के बीच कितना संतुलन बनाया जाता है।

















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