हिंदी विंडो

हिंदी में दुनिया, दुनिया में हिंदी…!

Advertisement

देहरादून मास्टर प्लान पर नागरिकों की बड़ी पहल: एमडीडीए को 20 सूत्रीय सुझाव, स्थायी ‘देहरादून नागरिक सलाहकार परिषद’ बनाने की मांग

देहरादून | 18 जुलाई

देहरादून के भविष्य की विकास योजना को अधिक सहभागी, पर्यावरण-संतुलित और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा आयोजित देहरादून मास्टर प्लान की सार्वजनिक सुनवाई के दौरान देहरादून नागरिक मंच (DCF) ने एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंसीधर तिवारी को दो महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपे।

मंच की ओर से जगमोहन मेधीरत्ता, रेतु चटर्जी और अनूप नौटियाल उपस्थित रहे। पहले ज्ञापन में मंच ने ‘देहरादून नागरिक सलाहकार परिषद’ के गठन का प्रस्ताव रखा। मंच का कहना है कि शहर के विकास में नागरिकों की भूमिका केवल सार्वजनिक सुनवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें संस्थागत रूप से निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

प्रस्ताव के अनुसार एमडीडीए के अंतर्गत 11 सदस्यीय स्थायी नागरिक सलाहकार परिषद गठित की जाए, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और समाज के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। यह परिषद शहरी विकास, पर्यावरण संरक्षण, यातायात, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और नगर नियोजन जैसे विषयों पर एमडीडीए, नगर निगम, पुलिस तथा अन्य विभागों के साथ नियमित संवाद स्थापित करेगी।

मंच ने कहा कि सरकारें और अधिकारी समय के साथ बदलते रहते हैं, लेकिन नागरिक पीढ़ियों तक अपने शहर से जुड़े रहते हैं। इसलिए शहर की दीर्घकालिक विकास योजनाओं में नागरिक भागीदारी को स्थायी व्यवस्था के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंसीधर तिवारी ने इस सुझाव की सराहना की।

मास्टर प्लान पर 20 सूत्रीय सुझाव

दूसरे ज्ञापन में मंच ने देहरादून मास्टर प्लान के लिए 20 प्रमुख सुझाव प्रस्तुत किए। इनमें प्रमुख रूप से—

  • हरित क्षेत्रों और शहरी विकास के बीच संतुलन बनाए रखना।
  • पैदल यात्रियों एवं साइकिल चालकों के लिए सुरक्षित बुनियादी ढांचा विकसित करना।
  • प्राकृतिक जलधाराओं, जल निकासी तंत्र और जलमार्गों का संरक्षण।
  • भूवैज्ञानिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों एवं फॉल्ट लाइनों के आसपास ऊंची इमारतों पर प्रतिबंध।
  • वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली विकसित करना।
  • स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण एवं आधुनिक रीसाइक्लिंग व्यवस्था लागू करना।
  • वर्षा जल निकासी एवं सीवेज प्रणाली के लिए समेकित योजना तैयार करना।
  • शहरी बाढ़ रोकने हेतु व्यापक स्टॉर्म वॉटर मैनेजमेंट रणनीति बनाना।
  • ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रभावी नीति तैयार करना।

यातायात पर विशेष जोर

मंच ने कहा कि केवल सड़कें चौड़ी करने से देहरादून की ट्रैफिक समस्या का समाधान संभव नहीं है। इसके लिए आधुनिक सार्वजनिक परिवहन, स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन, बेहतर लास्ट माइल कनेक्टिविटी तथा पैदल और साइकिल आधारित परिवहन को बढ़ावा देना आवश्यक है।

साथ ही संकरी सड़कों पर बड़े व्यावसायिक परिसरों और ऊंची इमारतों पर नियंत्रण तथा नई सड़क एवं बाईपास परियोजनाओं से पहले स्वतंत्र तकनीकी व्यवहार्यता और पर्यावरणीय प्रभाव अध्ययन कराने की भी सिफारिश की गई।

पर्यावरण संरक्षण पर विशेष चिंता

ज्ञापन में देहरादून की जैव विविधता और प्राकृतिक पहचान को सुरक्षित रखने पर विशेष बल दिया गया। मंच ने मालसी, गलजवारी, दुधली, डांडा सहित जैव विविधता वाले क्षेत्रों को पारिस्थितिक गलियारों के माध्यम से जोड़ने तथा शहरी वृक्षारोपण में हिमालयी मूल की प्रजातियों को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया।

देहरादून नागरिक मंच ने एमडीडीए द्वारा आयोजित सार्वजनिक सुनवाई का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि प्रस्तुत सुझावों, विशेषकर स्थायी नागरिक सलाहकार परिषद के प्रस्ताव, पर अंतिम मास्टर प्लान तैयार करते समय गंभीरता से विचार किया जाएगा।