उत्तरकाशी | Hindi Window Research Desk
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-34) एक बार फिर भू-धंसाव की चपेट में आ गया है। भटवाड़ी विकासखंड के पापड़गाड़ क्षेत्र में सोमवार सुबह सड़क पर दिखाई दी लगभग 50 मीटर लंबी दरार कुछ ही घंटों में तेजी से चौड़ी हो गई, जिससे प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
स्थिति गंभीर होने पर गंगोत्री हाईवे पर लगभग चार घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन तथा सीमा सड़क संगठन (BRO) ने कुछ समय के लिए केवल दोपहिया वाहनों की आवाजाही की अनुमति दी। बाद में दरारों में मिट्टी भरकर अस्थायी रूप से यातायात बहाल कर दिया गया, लेकिन विशेषज्ञों और स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल तात्कालिक समाधान है।
पहले भी हो चुकी है बड़ी घटना
ग्रामीणों के अनुसार पापड़गाड़ क्षेत्र पिछले कई वर्षों से लगातार भू-धंसाव की समस्या से जूझ रहा है। वर्ष 2025 की अगस्त आपदा के दौरान इसी स्थान पर करीब 100 मीटर लंबा हिस्सा धंस गया था, जिससे गंगोत्री हाईवे तीन दिनों तक पूरी तरह बंद रहा था।
उस दौरान धराली और हर्षिल क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए जा रहे प्रशासनिक अधिकारी और आपदा राहत दलों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था।
नहीं है कोई वैकल्पिक मार्ग
सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि यह मार्ग बंद होता है तो गंगोत्री धाम तक पहुंचने के लिए कोई प्रभावी वैकल्पिक सड़क उपलब्ध नहीं है। इससे चारधाम यात्रा, स्थानीय यातायात, आपदा प्रबंधन तथा सेना एवं प्रशासनिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।
स्थानीय निवासी प्रताप प्रकाश, संजीव नौटियाल और केशव नौटियाल का कहना है कि पिछले वर्ष की आपदा के बाद भी स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए हैं।
क्यार्क गांव पर भी मंडरा रहा खतरा
पूर्व प्रधान विपिन राणा, रवि रावत तथा प्रताप प्रकाश पंवार ने बताया कि बरसात के दौरान पापड़गाड़ से भारी मात्रा में मलबा और विशाल बोल्डर बहकर आते हैं। इससे गंगोत्री हाईवे के पुल के साथ-साथ ऊंचाई पर बसे क्यार्क गांव पर भी गंभीर खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते मजबूत सुरक्षात्मक कार्य नहीं हुए तो भविष्य में सड़क और गांव दोनों को भारी नुकसान हो सकता है।
प्रशासन क्या कह रहा है?
उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि-
“पापड़गाड़ क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा कार्यों के लिए बीआरओ द्वारा टीएचडीसी के माध्यम से विस्तृत सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के आधार पर डीपीआर तैयार की जा रही है। आवश्यक स्वीकृतियां मिलते ही स्थायी सुरक्षात्मक कार्य शुरू किए जाएंगे।”
प्रशासन का कहना है कि फिलहाल क्षेत्र की लगातार निगरानी की जा रही है तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी संबंधित विभागों को अलर्ट रखा गया है।
















