इतिहास में छूट गए 9,909 भारतीय सैनिकों को मिला सम्मान, प्रथम विश्व युद्ध के बाद पहली बार आधिकारिक पहचान
लंदन: प्रथम विश्व युद्ध में अपनी जान गंवाने वाले 9,909 भारतीय सैनिकों को एक सदी से अधिक समय बाद आधिकारिक पहचान मिल गई है। Commonwealth War Graves Commission यानी CWGC ने इन सैनिकों के नाम अपने casualty records में शामिल कर लिए हैं। यह कदम एक पुराने ऐतिहासिक रिकॉर्ड-गैप को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ये सैनिक अविभाजित भारत से थे और ब्रिटिश भारतीय सेना का हिस्सा रहते हुए प्रथम विश्व युद्ध में सेवा कर रहे थे। उपलब्ध शोध के अनुसार, इनमें से बड़ी संख्या ऐसे सैनिकों की थी जिनकी मृत्यु युद्ध के दौरान भारत के गैर-सैन्य या non-operational क्षेत्रों में हुई थी। उस समय के प्रशासनिक निर्णयों के कारण उन्हें युद्ध कब्रों के लिए पात्र नहीं माना गया और उनके नाम CWGC तक नहीं पहुंच पाए।
पांच साल की शोध परियोजना से खुला इतिहास का बंद अध्याय
इन सैनिकों की पहचान Punjab Registers Project के तहत हुई। यह Commonwealth War Graves Commission, UK Punjab Heritage Association और University of Greenwich के बीच पांच साल की साझेदारी थी। शोधकर्ताओं ने लाहौर म्यूजियम में सुरक्षित बेहद पुराने और नाजुक दस्तावेजों को digitise और analyse किया। इन रजिस्टरों में लगभग 3.20 लाख पंजाबी सैनिकों के नाम और उनकी सेवा से जुड़ी जानकारी दर्ज थी।
शोध के दौरान लगभग 15,935 मौतों की जांच की गई और उन्हें CWGC के लगभग 74,000 मौजूदा Indian Army records से मिलाया गया। Computer-assisted analysis के साथ CWGC और भारतीय सेना के विशेषज्ञों ने भी verification किया। इस प्रक्रिया में 9,909 ऐसे सैनिकों की पहचान हुई जिनके नाम पहले CWGC records में नहीं थे।

प्रथम विश्व युद्ध में भारत की बड़ी भूमिका
1914 से 1918 के बीच 14 लाख से अधिक भारतीय सैनिकों ने प्रथम विश्व युद्ध में सेवा की। शोध स्रोतों के अनुसार ब्रिटिश सेना के साथ लड़ने वाले लगभग हर छह सैनिकों में से एक तत्कालीन अविभाजित भारत से था। अकेले पंजाब से करीब पांच लाख सैनिकों ने युद्ध में हिस्सा लिया था। इनमें Sikh, Muslim, Hindu और Christian समुदायों के सैनिक शामिल थे।
फिर भी इन सैनिकों का योगदान लंबे समय तक इतिहास के मुख्य रिकॉर्ड में पूरी तरह दर्ज नहीं हो पाया।
परिवारों के लिए सिर्फ नाम नहीं, विरासत की वापसी
इस ऐतिहासिक सुधार का असर केवल सरकारी रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। कई परिवारों को पहली बार अपने पूर्वज की सैन्य सेवा और मृत्यु से जुड़ी ठोस जानकारी मिली है।
University of Greenwich के अनुसार, कुछ शोधकर्ताओं और स्वयंसेवकों ने Punjab Registers में अपने ही पूर्वजों के नाम खोजे। ब्रिटेन में रहने वाली Manjinder Nagra को भी पता चला कि उनके maternal great-grandfather Jagat Singh उन सैनिकों में शामिल थे जिनकी अब आधिकारिक पहचान हो रही है।
CWGC की Director General Claire Horton ने इस परियोजना को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि हर नाम की पुनर्प्राप्ति परिवार और विश्व इतिहास के उन अध्यायों को वापस लाती है जो लंबे समय से अधूरे थे।

CWGC का Non-Commemoration Programme
यह पहल CWGC के व्यापक Non-Commemoration Programme का हिस्सा है, जिसे ऐतिहासिक असमानताओं को दूर करने के उद्देश्य से 2021 में शुरू किया गया था। CWGC के अनुसार इस कार्यक्रम के तहत अब तक 20,000 से अधिक अतिरिक्त नाम पहचानकर commemorate किए जा चुके हैं।
इस तरह 9,909 सैनिकों के नामों की बहाली केवल एक archival correction नहीं है, बल्कि यह उन परिवारों और समुदायों को उनकी ऐतिहासिक विरासत लौटाने की प्रक्रिया भी है, जिनके पूर्वजों का बलिदान आधिकारिक स्मृति से छूट गया था।
Hindi Window निष्कर्ष:
एक सदी से अधिक समय तक रिकॉर्ड से बाहर रहे 9,909 भारतीय सैनिकों की पहचान इतिहास को फिर से पढ़ने का अवसर देती है। यह घटना याद दिलाती है कि युद्ध का इतिहास केवल बड़े युद्धक्षेत्रों और प्रसिद्ध सेनापतियों का इतिहास नहीं होता—बल्कि उन लाखों सामान्य सैनिकों का भी होता है जिनके नाम और बलिदान पीढ़ियों तक परिवारों की स्मृति में जीवित रहते हैं।















