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PM मोदी के लिए बेल्जियम PM का खास तोहफा… चॉकलेट से बनाया था इंडिया गेट, लेकिन रास्ते में हुआ खराब

नई दिल्ली | 3 सितंबर 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर की गुरुवार को नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में मुलाकात के बीच एक दिलचस्प और अनोखी घटना सामने आई। बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने बताया कि वह प्रधानमंत्री मोदी के लिए बेल्जियम की बेहतरीन चॉकलेट से बनी दिल्ली के प्रतिष्ठित इंडिया गेट की प्रतिकृति उपहार में लाना चाहते थे, लेकिन चॉकलेट से बनी यह कलाकृति भारत की यात्रा के दौरान सुरक्षित नहीं रह सकी।

बार्ट डी वेवर ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के लिए एक खास और प्रतीकात्मक उपहार तैयार करवाया था। यह पूरी तरह बेल्जियन चॉकलेट से बनी इंडिया गेट की एक प्रतिकृति थी।

हालांकि, वास्तविक इंडिया गेट लगभग एक सदी से दिल्ली में मजबूती से खड़ा है, लेकिन उसका चॉकलेट संस्करण भारत तक का सफर पूरा नहीं कर सका।

बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने इस घटना को हल्के-फुल्के अंदाज में लेते हुए कहा कि चॉकलेट कूटनीति के लिए तो शानदार है, लेकिन राजनयिक यात्रा के लिए शायद उतनी अच्छी नहीं है।

उन्होंने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है, क्योंकि इस प्रतिकृति का एक बैकअप संस्करण अभी बेल्जियम में मौजूद है और वह किसी न किसी तरह उसे प्रधानमंत्री मोदी तक सुरक्षित पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

इंडिया गेट को ही क्यों चुना गया ?

इस उपहार के पीछे केवल चॉकलेट की मिठास नहीं, बल्कि भारत और बेल्जियम के साझा इतिहास का संदेश भी था।

बार्ट डी वेवर के अनुसार, इंडिया गेट की प्रतिकृति को जानबूझकर चुना गया था। यह दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों और भविष्य की साझेदारी का प्रतीक है।

उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान बेल्जियम की धरती पर लड़ने वाले भारतीय सैनिकों के साहस और बलिदान को भी याद किया। उनके मुताबिक, एक सदी से अधिक समय पहले भारतीय सैनिक हजारों किलोमीटर दूर बेल्जियम पहुंचे थे और वहां युद्ध में हिस्सा लिया था।

इस चॉकलेट प्रतिकृति के साथ भारतीय सैनिकों के बलिदान की स्मृति को भी जोड़ा गया था।

‘चॉकलेट डिप्लोमेसी’ से शांति का संदेश

बेल्जियम के प्रधानमंत्री ने इस पूरे प्रसंग को सिर्फ एक मजेदार उपहार की कहानी के तौर पर पेश नहीं किया। उन्होंने इसे भारत और बेल्जियम के साझा इतिहास तथा शांति के संदेश से भी जोड़ा।

उन्होंने कहा कि शांति को कभी भी स्वाभाविक या स्थायी मानकर नहीं चलना चाहिए। प्रथम विश्व युद्ध की स्मृतियां दोनों देशों को यह याद दिलाती हैं कि युद्ध की कीमत कितनी बड़ी हो सकती है।

यानी प्रधानमंत्री मोदी के लिए तैयार किया गया यह चॉकलेट गिफ्ट एक तरफ बेल्जियम की प्रसिद्ध चॉकलेट संस्कृति को दर्शाता है, तो दूसरी तरफ भारत-बेल्जियम के ऐतिहासिक रिश्ते और भारतीय सैनिकों के बलिदान की याद भी दिलाता है।

भारत-बेल्जियम रिश्तों में भी अहम दिन

यह दिलचस्प चॉकलेट कहानी ऐसे समय सामने आई है जब भारत और बेल्जियम अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर बातचीत कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बार्ट डी वेवर के बीच बातचीत में रक्षा, व्यापार, निवेश, नवाचार, सेमीकंडक्टर, फिनटेक, महत्वपूर्ण खनिज, समुद्री क्षेत्र तथा अकादमिक और शोध सहयोग जैसे मुद्दे शामिल रहे। दोनों नेताओं ने भारत-बेल्जियम साझेदारी को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, बार्ट डी वेवर 2 से 4 सितंबर 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। फरवरी 2025 में पद संभालने के बाद यह उनकी भारत की पहली यात्रा है।

अब क्या होगा ?

पहली चॉकलेट प्रतिकृति भारत तक सुरक्षित नहीं पहुंच पाई, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई है।

बार्ट डी वेवर ने बताया कि इंडिया गेट की एक दूसरी प्रतिकृति बेल्जियम में बैकअप के तौर पर मौजूद है। उनका कहना है कि वह इसे किसी न किसी तरीके से प्रधानमंत्री मोदी तक सुरक्षित पहुंचाएंगे।

इस तरह एक ऐसी कलाकृति, जो भारत और बेल्जियम के साझा इतिहास को चॉकलेट के रूप में सामने लाने वाली थी, अब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों की एक दिलचस्प याद भी बन गई है।

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