BRICS Summit 2026: मोदी का UNSC सुधार पर जोर, 7 साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग; साझा बयान पर बनी सहमति
नई दिल्ली, 12 सितंबर 2026। भारत की मेजबानी में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आगाज नई दिल्ली में हो गया है। 12 और 13 सितंबर को आयोजित हो रहे इस सम्मेलन में वैश्विक शासन व्यवस्था, आर्थिक सहयोग, व्यापार, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों जैसे मुद्दे प्रमुख एजेंडे में हैं। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के उद्घाटन संबोधन में BRICS को किसी देश या समूह के खिलाफ गठबंधन नहीं, बल्कि सहयोग और साझा हितों को आगे बढ़ाने वाला मंच बताया। उन्होंने बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच बहुपक्षीय संस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी बनाने की जरूरत पर जोर दिया। खासतौर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में सुधार को लेकर भारत ने अपनी स्थिति मजबूती से रखी है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के साथ मोदी की 11 सितंबर की बैठक में भी बहुपक्षीय संस्थाओं और UNSC सुधार की जरूरत पर चर्चा हुई थी।
सात साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग
सम्मेलन के बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी नई दिल्ली पहुंचे हैं। यह करीब सात साल बाद उनकी भारत यात्रा है। उनकी यात्रा को भारत-चीन संबंधों में जारी सावधानीपूर्ण सुधार की प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच BRICS सम्मेलन से इतर द्विपक्षीय बातचीत भी निर्धारित है। चीन के विदेश मंत्रालय ने इससे पहले कहा था कि दोनों देशों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से संबंधों को देखना चाहिए तथा संवाद और सहयोग बढ़ाते हुए मतभेदों को उचित तरीके से संभालना चाहिए।
भारत और चीन के संबंध 2020 के गलवान संघर्ष के बाद लंबे समय तक तनावपूर्ण रहे। अक्टूबर 2024 में दोनों देशों के बीच सैन्य गतिरोध कम करने की दिशा में समझौता हुआ और इसके बाद संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने के प्रयास तेज हुए। हालांकि सीमा पर सैन्य तैनाती और अरुणाचल प्रदेश से जुड़े विवाद सहित कई मुद्दे अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं।
व्यापार में बढ़ोतरी, लेकिन बड़ा व्यापार घाटा
भारत-चीन संबंधों में आर्थिक आयाम भी बेहद महत्वपूर्ण है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक दोनों देशों के बीच व्यापार में वृद्धि हुई है, लेकिन भारत का व्यापार घाटा भी काफी बड़ा बना हुआ है। चीन भारत के लिए महत्वपूर्ण आयात स्रोत है और इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, कंपोनेंट्स, रसायन तथा अन्य औद्योगिक उत्पादों की आपूर्ति में उसकी भूमिका बड़ी है।
इस स्थिति के कारण भारत के सामने एक दोहरी चुनौती है—एक तरफ चीन के साथ व्यापार और निवेश संबंधों को व्यावहारिक तरीके से आगे बढ़ाना, दूसरी तरफ रणनीतिक क्षेत्रों में अत्यधिक निर्भरता कम करना।
BRICS में साझा बयान पर सहमति
सम्मेलन से पहले BRICS सदस्य देशों के बीच लंबी बातचीत के बाद साझा घोषणा-पत्र पर सहमति बनने की खबर सामने आई है। Reuters के अनुसार, चार सूत्रों ने बताया कि सदस्य देशों ने संयुक्त घोषणा पर सहमति बनाई है। वार्ता में खास चुनौती ईरान और संयुक्त अरब अमीरात सहित अलग-अलग देशों के बीच पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर मतभेदों को समायोजित करना था।
यह सहमति भारत के लिए महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि मानी जा सकती है, क्योंकि BRICS के विस्तार के साथ समूह के भीतर राजनीतिक और भू-राजनीतिक प्राथमिकताएं भी अधिक विविध हो गई हैं।
11 सदस्य देशों का समूह
BRICS अब मूल पांच देशों तक सीमित नहीं है। आधिकारिक BRICS स्रोतों के अनुसार समूह में 11 पूर्ण सदस्य हैं—ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, इथियोपिया, इंडोनेशिया और ईरान। इंडोनेशिया 2025 में पूर्ण सदस्य बना।
इस विस्तार ने BRICS के आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाया है, लेकिन साथ ही समूह के भीतर अलग-अलग राष्ट्रीय हितों के बीच संतुलन बनाना भी बड़ी चुनौती बन गया है।
भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताएं
नई दिल्ली में हो रहे सम्मेलन में भारत का जोर ऐसे BRICS पर है जो विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज को वैश्विक संस्थाओं में अधिक प्रभावी बनाए। प्रधानमंत्री मोदी पहले भी BRICS के मंच से वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और Global South की भूमिका बढ़ाने की वकालत करते रहे हैं।
11 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की और भारत ने संवाद तथा कूटनीति के जरिए विवादों के समाधान की अपनी स्थिति दोहराई।
दुनिया की नजर मोदी-शी मुलाकात पर
BRICS सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक को माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार के संकेतों के बावजूद सीमा विवाद, सुरक्षा चिंताएं और व्यापार असंतुलन जैसे मुद्दे मौजूद हैं।
ऐसे में यह बैठक केवल दो नेताओं की मुलाकात नहीं, बल्कि एशिया की दो बड़ी शक्तियों के बीच संबंधों की दिशा का संकेत देने वाली बातचीत के रूप में भी देखी जा रही है।
निष्कर्ष:
नई दिल्ली में हो रहा BRICS Summit 2026 भारत के लिए केवल एक बहुपक्षीय सम्मेलन नहीं, बल्कि वैश्विक शासन सुधार, Global South की आवाज, आर्थिक सहयोग और भारत-चीन संबंधों को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण अवसर है। आने वाले दिनों में साझा घोषणा-पत्र और मोदी-शी वार्ता के परिणाम इस सम्मेलन की वास्तविक कूटनीतिक सफलता का आकलन तय करेंगे।












