हिंदी विंडो

हिंदी में दुनिया, दुनिया में हिंदी…!

Advertisement

18वां BRICS शिखर सम्मेलन 2026: सदस्यों ने क्या पाया ? नई दिल्ली घोषणा से भारत को क्या मिला

BRICS Summit 2026: नई दिल्ली घोषणा-पत्र में क्या मिला ? भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत से लेकर AI, व्यापार और स्थानीय मुद्रा तक

नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने वैश्विक तनावों और आपसी मतभेदों के बावजूद एक साझा मंच पर सहमति कायम करते हुए नई दिल्ली घोषणा-पत्र 2026 को सर्वसम्मति से मंजूरी दी।

12 से 13 सितंबर तक नई दिल्ली में हुए सम्मेलन की थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” यानी लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के लिए निर्माण रही। भारत सरकार के अनुसार, भारत की अध्यक्षता के दौरान 30 शहरों में 400 से अधिक BRICS बैठकें और विभिन्न स्तरों के कार्यक्रम आयोजित किए गए।

सबसे बड़ी उपलब्धि—साझा घोषणा-पत्र

BRICS के लिए इस बार सर्वसम्मति बनाना आसान नहीं था। संगठन के भीतर पश्चिम एशिया संकट, ईरान और UAE की अलग-अलग परिस्थितियों, रूस-यूक्रेन युद्ध, व्यापार प्रतिबंधों और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव जैसे कई संवेदनशील मुद्दे मौजूद थे।

इसके बावजूद नई दिल्ली घोषणा में सभी सदस्य देशों ने संवाद, कूटनीति और बहुपक्षीय सहयोग को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई। Reuters के अनुसार, घोषणा-पत्र में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जताते हुए अधिकतम संयम और कूटनीतिक समाधान का आह्वान किया गया।

भारत के लिए बड़ा कूटनीतिक लाभ—पहलगाम हमले की कड़ी निंदा

भारत के नजरिए से घोषणा-पत्र की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा रही।

घोषणा में आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ कार्रवाई, आतंकवाद के वित्तपोषण, सुरक्षित पनाहगाहों और सीमा पार आतंकवाद से निपटने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। भारतीय दृष्टिकोण से यह महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती के रूप में प्रमुखता से उठाता रहा है।

BRICS ने टैरिफ और एकतरफा व्यापार प्रतिबंधों पर जताई चिंता

नई दिल्ली घोषणा में एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापारिक प्रतिबंधों पर चिंता जताई गई।

BRICS देशों ने ऐसे एकतरफा आर्थिक उपायों का विरोध किया जिन्हें वे अंतरराष्ट्रीय कानून और WTO के नियमों के विपरीत मानते हैं। हालांकि, समूह ने किसी नए प्रतिशोधात्मक व्यापार तंत्र की घोषणा नहीं की।

इसका अर्थ यह है कि BRICS फिलहाल पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ कोई नया व्यापारिक ब्लॉक बनाने की बजाय बहुपक्षीय और नियम-आधारित व्यापार व्यवस्था में सुधार पर जोर दे रहा है।

BRICS की अपनी साझा मुद्रा ? अभी नहीं

BRICS सम्मेलन से पहले “BRICS Currency” को लेकर काफी चर्चा थी, लेकिन नई दिल्ली घोषणा ने ऐसी किसी साझा मुद्रा की घोषणा नहीं की।

इसके बजाय सदस्य देशों ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और सीमा-पार भुगतान को आसान, तेज, सुरक्षित और कम खर्चीला बनाने पर ध्यान केंद्रित किया। BRICS Payment Task Force इस दिशा में सदस्य देशों की भुगतान और मैसेजिंग प्रणालियों के बीच बेहतर संपर्क की संभावनाओं पर काम कर रहा है।

Global South के लिए AI पर साझा रुख

कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI भी BRICS एजेंडे में प्रमुख रहा।

घोषणा में Global South के लिए AI तक व्यापक पहुंच, सुरक्षा, विश्वसनीयता, समावेशिता और ऊर्जा दक्षता जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया। BRICS देशों ने AI के वैश्विक शासन को लेकर पहले से जारी सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में भारत का मॉडल

भारत की एक प्रमुख प्राथमिकता Digital Public Infrastructure यानी DPI रही।

घोषणा में BRICS देशों के बीच डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का एक साझा Repository बनाने और सदस्य देशों में DPI आधारित पायलट परियोजनाओं की संभावना का स्वागत किया गया। यह भारत के डिजिटल सार्वजनिक ढांचे—जैसे बड़े पैमाने पर डिजिटल सेवाओं और भुगतान प्रणालियों—के अनुभव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा करने का अवसर देता है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग

BRICS ने स्वास्थ्य क्षेत्र में भी कई सहयोगात्मक पहलों को आगे बढ़ाया।

नई दिल्ली घोषणा में मानसिक स्वास्थ्य, स्वास्थ्य अनुसंधान, वैक्सीन R&D, डिजिटल हेल्थ, सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों और चिकित्सा उत्पादों की स्थानीय उत्पादन क्षमता को मजबूत करने पर जोर दिया गया। भारत के NIMHANS को BRICS Mental Health Centres of Excellence नेटवर्क के समन्वयक संस्थान के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका मिली है।

कृषि और खाद्य सुरक्षा पर बड़ा फोकस

कृषि के क्षेत्र में BRICS ने BRICS AGRIN—Agro-Inputs, Genetic Resources and Information Network को आगे बढ़ाने का स्वागत किया।

इसके अलावा किसानों के बीज अधिकारों से जुड़े Global Forum, Agroecology और Regenerative Agriculture के Centres of Excellence तथा Digital Agriculture Network जैसी पहलों को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। BRICS Grain Exchange पर भी आगे काम करने की बात कही गई।

ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु

पश्चिम एशिया के तनाव के बीच ऊर्जा सुरक्षा भी महत्वपूर्ण मुद्दा रही।

घोषणा में ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता, महत्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और ऊर्जा स्रोतों की विविधता पर जोर दिया गया। साथ ही विकासशील देशों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्यायपूर्ण और समावेशी ऊर्जा संक्रमण की बात कही गई।

भारत को रणनीतिक रूप से क्या मिला ?

भारत के लिए BRICS 2026 का सबसे बड़ा लाभ केवल घोषणा-पत्र नहीं, बल्कि वैश्विक दक्षिण की राजनीति में अपनी भूमिका को मजबूत करना है।

घोषणा में भारत और ब्राजील की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बड़ी भूमिका की आकांक्षा का चीन और रूस द्वारा समर्थन दोहराया गया। BRICS ने IMF, World Bank और WTO जैसी वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की आवाज और प्रतिनिधित्व बढ़ाने की भी मांग की।

भारत के लिए इसका अर्थ है—एक तरफ अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को बनाए रखना, तो दूसरी तरफ Global South और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच अपना प्रभाव बढ़ाना।

लेकिन क्या BRICS पूरी तरह एकजुट हो गया ?

नहीं।

यह बात समझना जरूरी है कि BRICS कोई सैन्य गठबंधन या EU जैसी राजनीतिक-संवैधानिक संस्था नहीं है। इसके सदस्य देशों के हित कई मामलों में अलग हैं।

नई दिल्ली घोषणा में आम सहमति बनी, लेकिन कई संवेदनशील मुद्दों पर भाषा संतुलित रखी गई। उदाहरण के लिए साझा BRICS मुद्रा की घोषणा नहीं हुई और पश्चिम एशिया संघर्ष पर ऐसा रुख अपनाया गया जिसे अलग-अलग सदस्य स्वीकार कर सकें।

यही BRICS 2026 की असली कहानी है—मतभेद खत्म नहीं हुए, लेकिन मतभेदों के बावजूद संवाद और साझा सहमति कायम रही।