73 प्रतिबंधित खसरे, इनमें 52 विकासनगर क्षेत्र में; पांच साल में ऐसे मामलों की 25 से ज्यादा FIR, प्रशासन ने निवेश से पहले रिकॉर्ड जांचने की दी सलाह
देहरादून: अगर आप देहरादून या आसपास जमीन खरीदने की योजना बना रहे हैं तो जल्दबाजी बिल्कुल न करें। जमीन का आकर्षक दाम, अच्छी लोकेशन या रजिस्ट्री का भरोसा आपको कानूनी और आर्थिक संकट में डाल सकता है। खासकर Golden Forest और PACL से जुड़ी विवादित संपत्तियों को लेकर खरीदारों को बेहद सावधान रहने की जरूरत है।
15 सितंबर 2026 को प्रकाशित अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार देहरादून जिले में कई प्रतिबंधित खसरों की खरीद-फरोख्त पर रोक है। रिपोर्ट में 73 प्रतिबंधित खसरों का उल्लेख किया गया है, जिनमें 52 विकासनगर क्षेत्र में हैं।
देहरादून में जमीन खरीदने वालों के लिए बड़ा अलर्ट
देहरादून और उसके आसपास जमीन खरीदकर घर बनाने या कारोबार शुरू करने का सपना देखने वालों के लिए एक बार फिर गंभीर चेतावनी सामने आई है। जमीन का कोई सौदा सस्ता या बेहद आकर्षक दिखाई दे तो केवल कागजात और रजिस्ट्री देखकर फैसला लेना भारी पड़ सकता है।
Golden Forest और PACL जैसी कंपनियों से जुड़ी जमीनों पर लंबे समय से विवाद और कानूनी पाबंदियां बनी हुई हैं। इसके बावजूद कथित बिचौलियों और जमीन बेचने वालों के जरिए ऐसे भूखंडों के सौदे किए जाने के मामले सामने आते रहे हैं।
Golden Forest और PACL की जमीन क्यों बनी चिंता ?
Golden Forest और PACL ने देशभर में जमा योजनाओं के जरिए बड़ी संख्या में लोगों से धन जुटाया था। इन कंपनियों से जुड़ी संपत्तियों पर नियामकीय और न्यायिक कार्रवाई हुई और संपत्तियों की बिक्री/निपटान की प्रक्रिया SEBI तथा संबंधित न्यायिक आदेशों के अधीन रही है।
PACL मामले में यह प्रक्रिया आज भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। SEBI के आधिकारिक रिकॉर्ड में सितंबर 2026 तक PACL संपत्तियों की बिक्री से जुड़े प्रस्ताव और सुप्रीम कोर्ट से संबंधित आदेश दर्ज हैं। यानी PACL से जुड़ी संपत्ति को सामान्य निजी जमीन समझकर खरीदना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
देहरादून में 73 प्रतिबंधित खसरे
रिपोर्ट के मुताबिक देहरादून जिले में 73 ऐसे खसरा नंबर बताए गए हैं जिनकी खरीद-फरोख्त पर रोक है। इनमें 52 खसरे विकासनगर क्षेत्र के हैं।
इसके अलावा स्थानीय अदालतों और हाईकोर्ट के आदेशों के कारण भी कई अन्य जमीनों पर प्रतिबंध लागू हैं। प्रशासन ने प्रतिबंधित खसरों की सूची ई-रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर उपलब्ध कराई है और सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में भी सूची प्रदर्शित की गई है।
पांच साल में 25 से ज्यादा FIR
रिपोर्ट के अनुसार प्रतिबंधित जमीनों के बावजूद बिचौलियों द्वारा आम लोगों को सौदे में फंसाने के मामले सामने आते रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में ऐसे मामलों में लगभग 25 FIR विभिन्न थानों में दर्ज होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि फरवरी 2026 में PACL संपत्ति को बेचने से जुड़ा मामला सामने आया था, जिसमें पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की। Golden Forest की संपत्तियों को लेकर भी अलग-अलग समय पर मामले दर्ज होते रहे हैं।
सिर्फ Golden Forest और PACL ही नहीं—वन और नदी की जमीन भी जांचें
जमीन खरीदने वालों के लिए खतरा केवल कंपनियों से जुड़ी विवादित संपत्तियों तक सीमित नहीं है।
देहरादून और आसपास के इलाकों में आरक्षित वन भूमि और नदी क्षेत्र की जमीन से जुड़े मामले भी सामने आ चुके हैं। ऐसी जमीनों की खरीद-फरोख्त कानूनी विवाद में फंसा सकती है।
प्रशासन की सलाह—पहले रिकॉर्ड जांचें, फिर निवेश करें
देहरादून के एडीएम फाइनेंस के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेशकों को जमीन खरीदने से पहले प्रतिबंधित खसरों की जानकारी लेकर ही निवेश करना चाहिए। सूची ई-रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर उपलब्ध है और सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में भी इसे देखा जा सकता है।
सबसे जरूरी बात: केवल रजिस्ट्री हो जाना इस बात की गारंटी नहीं है कि जमीन विवाद-मुक्त है। PACL से संबंधित आधिकारिक SEBI दस्तावेजों में भी संपत्तियों की बिक्री के लिए विशेष प्रक्रिया और शर्तें दर्ज हैं।
हिंदी विंडो की सलाह: किसी भी जमीन की खरीद से पहले खसरा-खतौनी, मालिकाना हक, पूर्व विक्रय, न्यायालयी विवाद, सरकारी/वन भूमि की स्थिति और संबंधित प्रतिबंधों की स्वतंत्र कानूनी जांच जरूर कराएं।
















