NHRC ने Eureka Forbes, Havells और Hindustan Unilever की सप्लाई चेन की जांच के निर्देश दिए; पुलिस भी मामले की जांच में जुटी
नई दिल्ली: दिल्ली में एक इलेक्ट्रिकल वायरिंग और कंपोनेंट सप्लायर के यहां कथित बाल श्रम का मामला सामने आने के बाद इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी Eureka Forbes ने अपनी सप्लाई चेन की आंतरिक जांच शुरू कर दी है। यह मामला उस समय सामने आया जब अधिकारियों ने दिल्ली की एक छोटी औद्योगिक इकाई से 14 से 16 वर्ष की उम्र के चार बच्चों को मुक्त कराया।
Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों को YY Harness नाम की इलेक्ट्रिकल वायरिंग और कंपोनेंट बनाने वाली कंपनी की इकाई से सोमवार को मुक्त कराया गया। मामले के दस्तावेजों के अनुसार, बच्चों की उम्र 14 से 16 वर्ष के बीच थी। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि वे सप्ताह में छह दिन काम करते थे और उन्हें लगभग 105 से 125 डॉलर प्रति माह का भुगतान किया जाता था। मामले की पुलिस जांच जारी है।
Eureka Forbes ने क्या कहा ?
मामला सामने आने के बाद Eureka Forbes ने अपनी सप्लाई चेन में तत्काल समीक्षा और ऑडिट शुरू करने की बात कही है। कंपनी के अनुसार, आरोपों को गंभीरता से लिया जा रहा है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सप्लायर स्तर पर क्या हुआ तथा कंपनी की सप्लाई चेन में निगरानी की प्रक्रिया कितनी प्रभावी थी।
NHRC ने कंपनियों से मांगी सप्लाई चेन जांच
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग यानी NHRC ने इस मामले के बाद Eureka Forbes के साथ-साथ इलेक्ट्रिकल उपकरण निर्माता Havells और Unilever की भारतीय इकाई से भी अपनी सप्लाई चेन की जांच करने को कहा है। आयोग की कार्रवाई का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संबंधित कंपनियों की आपूर्ति व्यवस्था में कहीं बाल श्रम जैसी गतिविधियां तो नहीं हो रही थीं।
Hindustan Unilever का अलग पक्ष
Reuters के अनुसार, Hindustan Unilever ने कहा है कि YY Harness उसका कारोबारी साझेदार नहीं था। वहीं Havells की ओर से Reuters के सवालों का तत्काल जवाब नहीं दिया गया। YY Harness ने भी Reuters के अनुरोध पर टिप्पणी नहीं की थी।
मामले में चार नाबालिगों की भूमिका सबसे अहम
इस मामले का सबसे गंभीर पहलू उन चार बच्चों की उम्र और काम की परिस्थितियां हैं। केस दस्तावेजों के अनुसार वे 14 से 16 वर्ष के थे और सप्ताह में छह दिन काम करने की बात सामने आई है। अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि बच्चों को किस प्रकार काम पर लगाया गया, उनकी नियुक्ति कैसे हुई और सप्लाई चेन में जिम्मेदारी किस स्तर तक जाती है।
कॉरपोरेट सप्लाई चेन पर फिर उठे सवाल
यह घटना केवल एक छोटी सप्लायर इकाई तक सीमित सवाल नहीं उठाती, बल्कि बड़ी कंपनियों की सप्लाई चेन की निगरानी और मानवाधिकार संबंधी जिम्मेदारियों पर भी ध्यान खींचती है। Reuters ने भी इस मामले को भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में श्रम प्रथाओं को लेकर बढ़ती निगरानी के संदर्भ में रिपोर्ट किया है।
हिंदी विंडो निष्कर्ष:
इस मामले में अभी जांच चल रही है। इसलिए उपलब्ध तथ्यों के आधार पर सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सप्लाई चेन में बाल श्रम की रोकथाम के लिए कंपनियों की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी और जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है।












