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भारत-चीन संबंधों को मोदी-शी ने दी ‘स्पष्ट और सकारात्मक दिशा’, डोभाल बोले—सीमा पर शांति से लौटी रिश्तों में सामान्य स्थिति

बीजिंग में भारत-चीन के बीच 25वें विशेष प्रतिनिधि दौर की वार्ता; NSA अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने सीमा, शांति और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर की चर्चा

बीजिंग/नई दिल्ली | 25 अगस्त 2026

भारत और चीन के रिश्तों में लंबे तनाव के बाद संवाद और स्थिरता की कोशिशों का एक और महत्वपूर्ण दौर मंगलवार को बीजिंग में सामने आया। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत-चीन सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं वार्ता में हिस्सा लिया।

वार्ता के बाद डोभाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दोनों देशों के संबंधों को लेकर एक “स्पष्ट और सकारात्मक दिशा” निर्धारित की है। उनके मुताबिक, सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने से दोनों देशों के व्यापक संबंधों में सामान्य स्थिति लौटने में मदद मिली है।

यह वार्ता ऐसे समय हुई है जब भारत और चीन 2020 के बाद पैदा हुए गंभीर तनाव से आगे बढ़कर संबंधों को धीरे-धीरे स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, सीमा से जुड़े मुद्दों पर राजनयिक और सैन्य स्तर की बातचीत जारी रही है और अक्टूबर 2024 में दोनों देशों के बीच एलएसी पर पेट्रोलिंग व्यवस्था को लेकर समझ बनी थी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद भी आगे बढ़ा।

सीमा पर शांति—रिश्तों की बुनियाद

बीजिंग वार्ता में सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह रहा कि सीमा पर शांति को भारत-चीन संबंधों के सामान्यीकरण की बुनियादी शर्त के रूप में देखा जा रहा है।

डोभाल और वांग यी की बातचीत केवल सीमा विवाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। रॉयटर्स के अनुसार, दोनों पक्षों ने सीमा पर शांति एवं स्थिरता बनाए रखने, द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने और सीमा प्रश्न के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर चर्चा की।

चीन के विदेश मंत्रालय ने भी 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधि वार्ता की पुष्टि की थी। उसके अनुसार, वांग यी और भारत के विशेष प्रतिनिधि अजीत डोभाल ने 25 अगस्त को बीजिंग में सीमा प्रश्न पर वार्ता की।

मोदी-शी संवाद का असर ?

इस पूरी प्रक्रिया का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद ने पिछले कुछ समय में रिश्तों को स्थिर करने का संकेत दिया है।

डोभाल का यह बयान कि मोदी और शी ने संबंधों को “स्पष्ट और सकारात्मक दिशा” दी है, यह संकेत देता है कि दोनों देश फिलहाल टकराव की जगह संवाद, प्रबंधन और स्थिरता को प्राथमिकता दे रहे हैं।

हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत-चीन सीमा विवाद का अंतिम समाधान हो गया है। दोनों देशों के बीच वास्तविक सीमा निर्धारण का प्रश्न अब भी जटिल है। इसलिए वर्तमान प्रक्रिया को तनाव कम करने और संबंधों को स्थिर करने की कोशिश के रूप में देखना अधिक उचित होगा।

BRICS और संभावित मोदी-शी मुलाकात

बीजिंग में डोभाल-वांग वार्ता का समय भी महत्वपूर्ण है। नई दिल्ली में सितंबर में BRICS शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान बना हुआ है। हालांकि, उनकी यात्रा की आधिकारिक पुष्टि को लेकर सावधानी जरूरी है।

ऐसे में डोभाल-वांग संवाद को आगामी उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क की जमीन तैयार करने वाले कदम के रूप में भी देखा जा रहा है।

क्या भारत-चीन संबंध पूरी तरह सामान्य हो गए ?

नहीं।

यह सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है।

दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ा है और सीमा पर स्थिति में पहले की तुलना में स्थिरता के संकेत हैं, लेकिन सीमा विवाद का व्यापक समाधान अभी बाकी है। भारत के लिए सीमा पर शांति और एलएसी पर स्थिरता अत्यंत महत्वपूर्ण है, जबकि चीन भी द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक संदर्भ में देख रहा है।

इसलिए मौजूदा स्थिति को “पूर्ण सामान्यीकरण” नहीं बल्कि “सावधानीपूर्वक स्थिरीकरण” कहना अधिक सटीक होगा।