हिंदी विंडो

हिंदी में दुनिया, दुनिया में हिंदी…!

Advertisement

Mirabai Chanu Asian Games 2026 Silver: मीराबाई चानू ने जीता पहला एशियन गेम्स पदक, भारत को 28 साल बाद वेटलिफ्टिंग में मेडल

12 साल का इंतजार खत्म: मीराबाई चानू

मीराबाई चानू ने Asian Games 2026 में महिलाओं की 49 किग्रा वेटलिफ्टिंग में 198 किग्रा कुल वजन उठाकर सिल्वर मेडल जीता। यह उनका पहला एशियन गेम्स पदक और भारत का 28 साल बाद वेटलिफ्टिंग पदक है।

12 साल का इंतजार खत्म: मीराबाई चानू ने एशियन गेम्स में जीता पहला पदक, 49 किग्रा वेटलिफ्टिंग में भारत को मिला रजत198 किग्रा के कुल वजन के साथ मीराबाई चानू ने रचा इतिहास; 28 साल बाद एशियन गेम्स की वेटलिफ्टिंग में भारत को मिला पदक

मीराबाई चानू ने Asian Games 2026 में इतिहास रच दिया है। नागोया में आयोजित महिलाओं की 49 किग्रा वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में भारतीय स्टार ने 198 किग्रा का कुल वजन उठाकर रजत पदक जीता। चानू ने स्नैच में 87 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 111 किग्रा का सफल प्रदर्शन किया। यह एशियन गेम्स में उनका पहला पदक है।

भारत की स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू ने आखिरकार एशियन गेम्स में अपने पदक का इंतजार खत्म कर दिया है। Aichi-Nagoya Asian Games 2026 में बुधवार, 23 सितंबर को महिलाओं की 49 किग्रा वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में चानू ने रजत पदक अपने नाम किया। उन्होंने कुल 198 किग्रा वजन उठाया, जिसमें 87 किग्रा स्नैच और 111 किग्रा क्लीन एंड जर्क शामिल रहा। इस प्रदर्शन के साथ चानू ने अपने शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ दी।

यह पदक मीराबाई चानू के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले एशियन गेम्स उनके करियर का वह बड़ा मंच था, जहां उन्हें पदक नहीं मिल पाया था। 2014 के इंचियोन एशियन गेम्स में उन्होंने महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में हिस्सा लिया था और नौवें स्थान पर रही थीं। इसके बाद 2018 के जकार्ता एशियन गेम्स में वह चोट के कारण हिस्सा नहीं ले सकीं। 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में वह पदक के बेहद करीब पहुंचकर चौथे स्थान पर रही थीं।

हांगझोउ में चानू ने चोट के बावजूद मुकाबला किया था। क्लीन एंड जर्क के अंतिम प्रयासों में वह सफल नहीं हो सकीं और पदक से चूक गईं। उस प्रतियोगिता ने उनके एशियन गेम्स अभियान को एक बार फिर अधूरा छोड़ दिया था। 2026 में नागोया पहुंचने से पहले उनके सामने यही चुनौती थी कि वह अपने करियर में छूट गए इस बड़े पदक को हासिल करें। इस बार उन्होंने मौके को हाथ से नहीं जाने दिया।

नागोया में मीराबाई ने स्नैच में 83 किग्रा से शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने 85 किग्रा और फिर 87 किग्रा का सफल प्रयास किया। स्नैच चरण के बाद वह पदक की दौड़ में बनी हुई थीं। क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 107 किग्रा सफलतापूर्वक उठाया और इसके बाद 111 किग्रा का प्रयास भी सफल रहा। 198 किग्रा के कुल स्कोर ने उन्हें रजत पदक दिलाया।

इस स्पर्धा का स्वर्ण उत्तर कोरिया की री सोंग गुम ने जीता। उन्होंने कुल 215 किग्रा वजन उठाया—94 किग्रा स्नैच और 121 किग्रा क्लीन एंड जर्क। इंडोनेशिया की लुलुक डायना त्रि विजायाना ने 191 किग्रा के कुल स्कोर के साथ कांस्य पदक हासिल किया।

री सोंग गुम के प्रदर्शन ने प्रतियोगिता को एक अलग स्तर पर पहुंचा दिया। उन्होंने स्नैच, क्लीन एंड जर्क और कुल वजन—तीनों में विश्व रिकॉर्ड बनाए। उनका 215 किग्रा का कुल स्कोर पुराने विश्व रिकॉर्ड से सात किग्रा अधिक रहा। इस प्रदर्शन के साथ वह एशियन गेम्स में तीन स्वर्ण पदक जीतने वाली महिला भारोत्तोलकों के विशेष समूह में शामिल हो गईं।

मीराबाई चानू के लिए हालांकि मुकाबले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उनका अपना प्रदर्शन था। ओलंपिक रजत पदक, विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण और कॉमनवेल्थ गेम्स के कई पदकों के बावजूद उनके पदक संग्रह में एशियन गेम्स का पदक नहीं था। नागोया में रजत के साथ अब उन्होंने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने का अपना संग्रह पूरा कर लिया है।

इस उपलब्धि का महत्व केवल मीराबाई चानू तक सीमित नहीं है। उनके रजत पदक के साथ एशियन गेम्स की वेटलिफ्टिंग में भारत का 28 साल लंबा पदक इंतजार भी खत्म हुआ। इससे पहले भारतीय भारोत्तोलक कर्णम मल्लेश्वरी ने 1998 के बैंकॉक एशियन गेम्स में रजत पदक जीता था। इसके बाद भारत को इस खेल में एशियन गेम्स पदक के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।

मीराबाई का यह प्रदर्शन उनके 2026 सीजन की निरंतरता को भी दर्शाता है। इससे पहले जुलाई 2026 में उन्होंने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। वहां उन्होंने कुल 190 किग्रा वजन उठाया था और कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीसरा स्वर्ण हासिल किया था।

इस तरह 23 सितंबर 2026 का दिन मीराबाई चानू के करियर में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। एशियन गेम्स के मंच पर पहली बार पदक, भारत के लिए 28 साल बाद वेटलिफ्टिंग पदक और अपने प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पदक संग्रह को पूरा करने की उपलब्धि—तीनों बातें एक ही दिन उनके नाम हुईं।

मीराबाई ने नागोया में 198 किग्रा के कुल प्रदर्शन के साथ रजत पदक जीता और एक लंबे इंतजार को खत्म किया।