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मोहन भागवत के UK दौरे का 100 से अधिक हिंदू संगठनों ने किया स्वागत, ब्रिटिश सरकार ने वीजा पर दिया जवाब

RSS प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका और कनाडा के बाद ब्रिटेन पहुंचे हैं। 100 से अधिक ब्रिटिश हिंदू एवं सामुदायिक संगठनों ने उनके दौरे का स्वागत किया है। वहीं, ब्रिटिश संसद में उठे सवाल पर UK Security Minister Dan Jarvis ने कहा कि UK में प्रवेश करने वाले सभी व्यक्तियों को इमिग्रेशन नियमों की आवश्यकताओं को पूरा करना होता है।

लंदन/नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे को लेकर वहां की हिंदू और भारतीय मूल की सामुदायिक संस्थाओं के बीच समर्थन सामने आया है। 100 से अधिक ब्रिटिश हिंदू एवं सामुदायिक संगठनों ने भागवत के UK पहुंचने पर संयुक्त रूप से उनका स्वागत किया है।

मोहन भागवत अमेरिका और कनाडा की यात्रा के बाद अपने तीन देशों के दौरे के अंतिम चरण में ब्रिटेन पहुंचे हैं। यह अंतरराष्ट्रीय दौरा RSS के शताब्दी वर्ष के अवसर पर चल रहे अंतरराष्ट्रीय संपर्क अभियान का हिस्सा है।

किन संगठनों ने किया स्वागत?

भागवत के UK दौरे के समर्थन में जारी संयुक्त बयान में Hindu Council UK, Hindu Forum of Britain, Hindu Swayamsevak Sangh UK और INSIGHT UK समेत कई संगठनों के नाम शामिल हैं। इन संगठनों ने RSS को स्वयंसेवा, चरित्र निर्माण, नेतृत्व, सामाजिक एकता और वैश्विक भाईचारे से जुड़े कार्यों वाला संगठन बताया।

संयुक्त बयान में RSS के सामाजिक कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि संगठन दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में शिक्षा तथा सामाजिक कार्यों में योगदान देता है और प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत एवं सहायता पहुंचाने में सक्रिय रहता है। यह इन संगठनों का पक्ष है; इसे स्वतंत्र सरकारी या न्यायिक निष्कर्ष के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए।

‘पांच परिवर्तन’ का भी किया गया उल्लेख

ब्रिटिश हिंदू संगठनों ने RSS के शताब्दी वर्ष के दौरान मोहन भागवत के नेतृत्व में बताए जा रहे ‘पांच परिवर्तन’ के एजेंडे का भी स्वागत किया।

इनमें प्रमुख रूप से—

  • सामाजिक समरसता और सामाजिक एकता
  • परिवार को समाज की महत्वपूर्ण इकाई के रूप में मजबूत करना
  • निस्वार्थ सेवा
  • पर्यावरण संरक्षण
  • नागरिक कर्तव्यों का जिम्मेदारी से निर्वहन

शामिल हैं।

ब्रिटिश संसद में उठा था भागवत के दौरे का सवाल

इस बीच मोहन भागवत के UK दौरे को लेकर ब्रिटिश संसद में भी सवाल उठा। Labour सांसद Nadia Whittome ने गृह विभाग से पूछा था कि क्या भागवत की प्रस्तावित यात्रा को UK के उन मानकों के तहत जांचा गया है, जिनके आधार पर ऐसे व्यक्तियों को प्रवेश से रोका जा सकता है जो हिंसा या नफरत को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों से जुड़े हों।

इस सवाल का जवाब UK Security Minister Dan Jarvis ने 3 सितंबर 2026 को दिया। उन्होंने कहा कि Home Office व्यक्तिगत मामलों पर टिप्पणी नहीं कर सकता, लेकिन सरकार देश के सामने मौजूद विभिन्न सुरक्षा खतरों से निपटने और ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है जो व्यक्तियों या समुदायों के खिलाफ हिंसा और नफरत को बढ़ावा देने वाले विचार फैलाते हैं।

ब्रिटिश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि UK में प्रवेश की मांग करने वाले सभी व्यक्तियों को देश के इमिग्रेशन नियमों की आवश्यकताओं को पूरा करना होता है।

दौरे के विरोध की आवाजें भी सामने आईं

भागवत के दौरे को लेकर ब्रिटेन में विरोध भी हुआ है। South Asia Solidarity Group और Hindus for Human Rights UK समेत कुछ नागरिक समाज संगठनों ने ब्रिटिश सरकार से RSS प्रमुख के दौरे का बहिष्कार करने की अपील की थी।

इस तरह मोहन भागवत के UK दौरे को लेकर ब्रिटेन में दो अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं—एक ओर 100 से अधिक हिंदू और सामुदायिक संगठनों का स्वागत और दूसरी ओर कुछ नागरिक समाज समूहों की आपत्ति।

प्रवासी भारतीयों के बीच कार्यक्रम

मोहन भागवत के UK दौरे के दौरान एक बड़े भारतीय प्रवासी समुदाय के कार्यक्रम को संबोधित करने की उम्मीद है। यह यात्रा RSS के शताब्दी वर्ष के अवसर पर उसके अंतरराष्ट्रीय संपर्क अभियान के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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