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पेपर लीक पर सख्त कानून और फास्ट ट्रैक कोर्ट से बढ़ेगा छात्रों का भरोसा : सीएम धामी, दिल्ली में बनी विशेष अदालत

देहरादून/नई दिल्ली।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि परीक्षा पेपर लीक पर केंद्र सरकार की सख्त नीति और विशेष कानून छात्रों के आत्मविश्वास को मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक मामलों में कठोर कार्रवाई और फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था का निर्णय प्रतिभाशाली एवं मेहनती छात्रों के हितों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

देहरादून में मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री का हालिया वीडियो संदेश छात्रों के भविष्य को लेकर केंद्र सरकार की गंभीरता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि देश में लंबे समय से युवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णायक कदम उठाए गए हैं और अब पेपर लीक जैसी चुनौती से निपटने के लिए भी प्रभावी कानूनी व्यवस्था बनाई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून और त्वरित न्यायिक प्रक्रिया से भविष्य की परीक्षाओं में नकल और धांधली की संभावनाएं कम होंगी। इससे योग्य और मेहनती अभ्यर्थियों को उनकी प्रतिभा के आधार पर अवसर मिलेगा तथा परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता मजबूत होगी।

वन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े प्रश्नों पर मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड का 70 प्रतिशत से अधिक भूभाग वनों से आच्छादित है। इसलिए वन संरक्षण और विकास दोनों के बीच संतुलन बनाना राज्य की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वन विभाग से जुड़े निर्णय राज्य के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा ऐसी बैठकों से विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी।

दिल्ली में बना पेपर लीक मामलों के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा परीक्षा पेपर लीक मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की घोषणा के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के अंतर्गत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए एक विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया है।

हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, अनु ग्रोवर बलिगा को राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर में विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट-सीबीआई) के रूप में नियुक्त किया गया है। अधिनियम के अंतर्गत लंबित सभी मामलों को इसी अदालत में स्थानांतरित किया जाएगा, जिससे मामलों का शीघ्र निस्तारण संभव हो सके।

क्या कहता है कानून ?

सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत प्रश्नपत्र लीक करने या परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग करने के दोषी को अधिकतम 5 वर्ष का कारावास और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

यह कानून एनटीए, यूपीएससी, एसएससी, आरआरबी, आईबीपीएस सहित केंद्र सरकार द्वारा आयोजित विभिन्न भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं पर लागू होता है।