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सदाचारी मनुष्य ही समाज में सम्मान पाता है: पीएम मोदी ने साझा किया प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित

नई दिल्ली।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए उत्तम चरित्र, सदाचार और नेतृत्व के महत्व पर बल दिया।

प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया श्लोक है—

“शीलवान् पूजितो लोके, शीलवान् साधुसम्मतः।
शीलवान् सर्वकर्मार्हः, शीलवान् प्रियदर्शनः॥”

इस श्लोक का भावार्थ बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सदाचारी और उत्तम चरित्र वाला व्यक्ति समाज में सम्मान तथा सज्जनों का आदर प्राप्त करता है। ऐसा व्यक्ति अपनी सत्यनिष्ठा, विनम्रता और मर्यादित आचरण के कारण प्रत्येक उत्तरदायित्व के योग्य माना जाता है। उसका व्यक्तित्व समाज के लिए प्रेरणास्रोत और अनुकरणीय बन जाता है।

प्रधानमंत्री के अनुसार, सफलता, प्रभावी नेतृत्व और लोगों का अटूट विश्वास किसी भी व्यक्ति के उत्तम चरित्र पर आधारित होता है।

लगातार साझा कर रहे हैं सुभाषित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल के दिनों में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े संस्कृत सुभाषित लगातार साझा कर रहे हैं।

24 जुलाई को उन्होंने यह श्लोक साझा किया था—

“कर्मणा मनसा वाचा यदभीक्ष्णं निषेवते।
तदेवापहरत्येनं तस्मात्कल्याणमाचरेत्॥”

जिसका भावार्थ है कि मनुष्य अपने विचार, वाणी और कर्मों के निरंतर अभ्यास से स्वयं अपने व्यक्तित्व का निर्माण करता है। इसलिए सदैव कल्याणकारी विचारों, वचनों और कर्मों को अपनाना चाहिए।

इससे पहले 23 जुलाई को प्रधानमंत्री ने उपनिषदों से प्रेरित एक अन्य सुभाषित साझा करते हुए बताया था कि जिस दिव्य शक्ति का अस्तित्व सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में है, वही प्रत्येक मनुष्य की आत्मा में भी विद्यमान है।

प्रधानमंत्री द्वारा लगातार साझा किए जा रहे ये सुभाषित भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चिंतन को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास माने जा रहे हैं।