नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच ‘एक्स (X)’ पर एक प्रेरणादायी संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए आत्मिक विकास, सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मिक विकास व्यक्ति के भीतर सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की भावना का संचार करता है, और यही प्रेरणा आज भारत की युवा शक्ति को प्रत्येक क्षेत्र में देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने लिखा-
“आत्मिक विकास व्यक्ति के भीतर सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की भावना का संचार करता है। इसी से प्रेरित होकर आज हमारी युवा शक्ति देश को हर क्षेत्र में आगे ले जा रही है।”
इसके साथ उन्होंने संस्कृत का यह सुभाषित भी साझा किया-
“आत्मोदयः परज्ञानिर्द्वयं नीतिरितीयती।
तदूरीकृत्य कृतिभिर्वाचस्पत्यं प्रतायते॥”
क्या है इसका अर्थ?
इस सुभाषित का भावार्थ है कि स्वयं का निरंतर उत्थान और आगे बढ़ने का प्रयास ही जीवन की श्रेष्ठ नीति है। इसी उद्देश्य को अपनाकर विद्वान और गुणी व्यक्ति अपने ज्ञान, कौशल और प्रभाव का विस्तार करते हैं ताकि वे समाज के लिए सकारात्मक योगदान दे सकें।
लगातार तीसरे दिन साझा किया प्रेरक संदेश
प्रधानमंत्री मोदी पिछले तीन दिनों से संस्कृत श्लोकों और उनके जीवन मूल्यों को साझा कर रहे हैं।
मंगलवार का संदेश
मंगलवार को उन्होंने लिखा था कि-
“निरंतर प्रयास और साधना से हमारी प्रतिभा और निखरती है। आज हमारे युवा इन्हीं गुणों को आत्मसात कर दुनियाभर में देश का नाम रोशन कर रहे हैं।”
इसके साथ उन्होंने भगवद्गीता का प्रसिद्ध श्लोक साझा किया—
“न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।
तत्स्वयं योगसंसिद्धः कालेनात्मनि विन्दति॥”
इसका अर्थ है कि इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र कुछ भी नहीं है। साधना और कर्मयोग के माध्यम से अंतःकरण शुद्ध होने पर व्यक्ति उचित समय पर परम ज्ञान का स्वयं अनुभव करता है।
सोमवार का संदेश
सोमवार को प्रधानमंत्री ने धैर्य और कर्म के महत्व पर आधारित संस्कृत श्लोक साझा किया था—
“त्याज्यं न धैर्यं विधुरेऽपि दैवे…”
जिसका भावार्थ है कि भाग्य प्रतिकूल होने पर भी धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए। निरंतर कर्म और साहस के बल पर व्यक्ति पुनः सफलता प्राप्त कर सकता है।
आध्यात्मिक संदेशों पर लगातार जोर
प्रधानमंत्री मोदी हाल के दिनों में अपने सोशल मीडिया संदेशों के माध्यम से संस्कृत साहित्य, भारतीय ज्ञान परंपरा, आत्मविकास, कर्म, ज्ञान, धैर्य और राष्ट्र सेवा जैसे विषयों को लगातार सामने ला रहे हैं। उनके ये संदेश युवाओं को प्रेरित करने के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास भी माने जा रहे हैं।
















