हिंदी विंडो

हिंदी में दुनिया, दुनिया में हिंदी…!

Advertisement

SCO Summit 2026: मोदी के आतंकवाद विरोधी संदेश से लेकर हैंडशेक तक—भारतीय मीडिया कवरेज पर उठा सवाल

नई दिल्ली/बिश्केक | हिंदी विंडो डेस्क

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक और व्यापक कार्रवाई का आह्वान किया। SCO के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित इस सम्मेलन में भारत ने सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर—इन तीन प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में आतंकवाद को मानवता के सामने गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि इससे लड़ाई केवल ‘एक्शन-रिएक्शन’ तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित ठिकानों समेत पूरे आतंकवादी तंत्र को खत्म करने की जरूरत बताई और आतंकवाद के मामले में दोहरे मानदंड नहीं अपनाने की अपील की।

मोदी ने यह भी कहा कि जो देश आतंकवाद को अपनी नीति के साधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं या आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाना और समर्थन देते हैं, उन्हें स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए कि आतंकवाद किसी के लिए रणनीतिक संपत्ति नहीं हो सकता। यह बयान ऐसे समय आया जब पाकिस्तान ने SCO की अगली अध्यक्षता संभाली है। पाकिस्तान 2026-27 के कार्यकाल में संगठन की अध्यक्षता करेगा और 2027 में इस्लामाबाद में अगले SCO शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।

कूटनीतिक मुलाकातें भी रहीं चर्चा में

SCO सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी मुलाकात में दोनों देशों के राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और लोगों के बीच संपर्क से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया और काला सागर क्षेत्र के संघर्षों से जुड़े विषयों पर भी विचार साझा किए।

सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी ने बिश्केक बैठक को व्यापक भू-राजनीतिक महत्व दिया। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भी SCO को बदलते बहुध्रुवीय वैश्विक परिदृश्य में चीन, रूस, भारत और मध्य एशिया के बीच बढ़ते रणनीतिक संवाद के संदर्भ में देखा।

लेकिन भारतीय टीवी पर क्या ज्यादा दिखा ?

ThePrint में प्रकाशित पत्रकार शैलजा बजपाई के Opinion लेख ने इसी बिंदु पर भारतीय समाचार मीडिया की कवरेज की आलोचनात्मक समीक्षा की है। लेख के अनुसार, कुछ भारतीय टीवी चैनलों ने SCO की बैठकों और मोदी की विभिन्न नेताओं के साथ बातचीत को मुख्यतः दृश्य घटनाओं—जैसे हैंडशेक, फोटो-ऑप और मंच पर नेताओं की स्थिति—के जरिए प्रस्तुत किया।

लेख में विशेष रूप से प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच दो बार हाथ मिलाने को टीवी कवरेज में प्रमुखता मिलने का उल्लेख है। कुछ चैनलों ने इसे गर्मजोशी भरा या ऐतिहासिक हैंडशेक बताया। इसी तरह मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग के एक साथ दिखाई देने वाले दृश्यों को भी कई चैनलों ने प्रमुख विजुअल के रूप में इस्तेमाल किया।

ThePrint के विश्लेषण में यह तर्क दिया गया कि इस तरह की दृश्य-केंद्रित कवरेज से कभी-कभी किसी शिखर सम्मेलन के वास्तविक कूटनीतिक और रणनीतिक मुद्दे पीछे छूट सकते हैं। हालांकि यह निष्कर्ष एक Opinion लेख का विश्लेषण है, इसे सभी भारतीय मीडिया संस्थानों के कवरेज पर अंतिम या सार्वभौमिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

अखबारों की प्राथमिकताएं भी अलग-अलग रहीं

ThePrint के अनुसार, दिल्ली के कुछ प्रमुख अखबारों ने SCO और मोदी के आतंकवाद संबंधी बयान को प्रमुख स्थान दिया, जबकि कुछ अन्य अखबारों ने घरेलू मुद्दों को पहले पन्ने पर अधिक महत्व दिया। Times of India ने मोदी के SCO संबोधन को प्रमुखता दी और पाकिस्तान द्वारा SCO की अध्यक्षता संभालने तथा आतंकवाद पर मोदी के संदेश को एक साथ प्रस्तुत किया।

वहीं, ThePrint ने Amar Ujala और Navbharat Times के दिल्ली संस्करणों में दिल्ली के 2.30 लाख घरों में मुफ्त रूफटॉप सोलर सिस्टम से जुड़ी खबर को प्रमुखता मिलने का उल्लेख किया। इस योजना की स्वतंत्र पुष्टि Amar Ujala की रिपोर्ट से भी होती है, जिसमें 3 किलोवाट क्षमता के रूफटॉप सोलर सिस्टम को 2.30 लाख पात्र घरों में मुफ्त लगाने की बात कही गई है।

असली सवाल: हैंडशेक या रणनीति ?

SCO जैसे बहुपक्षीय मंच की अहमियत केवल नेताओं की तस्वीरों या मुलाकातों तक सीमित नहीं होती। बिश्केक सम्मेलन में आतंकवाद, क्षेत्रीय सुरक्षा, कनेक्टिविटी, आर्थिक सहयोग, अफगानिस्तान, पश्चिम एशिया और ऊर्जा-सुरक्षा जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे।

भारत के लिए SCO विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत 2017 से संगठन का पूर्ण सदस्य है और इसे मध्य एशिया तथा व्यापक यूरेशियाई क्षेत्र में अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के मंच के रूप में देखता है।

इसलिए SCO Summit की मीडिया कवरेज को केवल इस आधार पर देखना कि किस नेता ने किससे हाथ मिलाया, सम्मेलन के व्यापक भू-राजनीतिक महत्व को सीमित कर सकता है।

हिंदी विंडो निष्कर्ष:
बिश्केक में मोदी का संदेश केवल पाकिस्तान या किसी एक देश तक सीमित नहीं था। उनका जोर आतंकवाद के पूरे नेटवर्क के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई, सुरक्षा, विश्वसनीय कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग पर था। दूसरी ओर, टीवी कवरेज में हैंडशेक और तस्वीरों की लोकप्रियता यह सवाल जरूर उठाती है कि क्या दृश्यात्मक राजनीति कभी-कभी वास्तविक कूटनीति पर भारी पड़ रही है।

#HindiWindow #SCOSummit #PMModi #NarendraModi #India #Russia #China #Pakistan #Diplomacy #Terrorism #Geopolitics #IndianMedia #NewsAnalysis