शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त और मान्यता के लिए आवेदन कर चुके मदरसों पर लागू होगी नई व्यवस्था; राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने आवश्यक कार्रवाई के लिए शिक्षा विभाग को लिखा पत्र।
देहरादून, 21 अक्टूबर 2026।
उत्तराखंड में मदरसों की शैक्षिक व्यवस्था में बदलाव के बीच 206 संस्थानों के साप्ताहिक अवकाश को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया है। राज्य में शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त मदरसों और मान्यता के लिए आवेदन कर चुके संस्थानों में अब शुक्रवार के बजाय रविवार को साप्ताहिक अवकाश रखने की व्यवस्था लागू की जा रही है। इस संबंध में राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
अमर उजाला और आजतक की 21 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, यह व्यवस्था उन मदरसों से संबंधित है जो शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त कर चुके हैं या मान्यता लेने की प्रक्रिया में हैं। इसका उद्देश्य इन संस्थानों की शैक्षिक गतिविधियों को विभाग के निर्धारित मानकों और सामान्य विद्यालयों की व्यवस्था के अनुरूप संचालित करना है।
किन मदरसों पर लागू होगी नई व्यवस्था ?
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड में कुल 206 मदरसों को इस बदलाव के दायरे में रखा गया है। इनमें शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त संस्थान और मान्यता के लिए आवेदन करने वाले मदरसे शामिल हैं।
राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के हवाले से प्रकाशित जानकारी के अनुसार, कुछ मदरसे मान्यता प्राप्त करने के बाद भी पहले की तरह शुक्रवार को साप्ताहिक अवकाश रख रहे थे। इसी स्थिति को देखते हुए शिक्षा महानिदेशक को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कुंवर सिंह रावत के अनुसार, जिन मदरसों को विद्यालय के रूप में मान्यता दी गई है, उन्हें राजकीय विद्यालयों पर लागू नियमों का पालन करना होगा। रिपोर्ट में नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की बात भी कही गई है।
हालांकि, इस समाचार के प्रकाशन के समय उपलब्ध रिपोर्टों में संबंधित पत्र का पूरा पाठ, आदेश संख्या और नई व्यवस्था लागू होने की सटीक तारीख उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन विवरणों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
76 मदरसों को मिल चुकी है मान्यता
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड में 76 मदरसों को शिक्षा विभाग से मान्यता मिल चुकी है, जबकि 114 अन्य मदरसों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है।
रिपोर्ट में जिलावार मान्यता प्राप्त मदरसों के आंकड़े इस प्रकार दिए गए हैं:
- हरिद्वार: 44 मदरसों को मान्यता।
- ऊधम सिंह नगर: 24 मदरसों को मान्यता।
- देहरादून: 6 मदरसों को मान्यता।
- नैनीताल: 2 मदरसों को मान्यता।
इन जिलों में कुल 76 मान्यता प्राप्त मदरसों का आंकड़ा रिपोर्ट में दिए गए राज्यस्तरीय विवरण से मेल खाता है। इसके अलावा 114 आवेदन लंबित या प्रक्रियाधीन बताए गए हैं। हालांकि, 76 और 114 का योग 190 होता है, 206 नहीं। ऐसे में शेष 16 संस्थानों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित प्राधिकरण से जिलावार और श्रेणीवार आंकड़ों की पुष्टि की जानी चाहिए।
यह अंतर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 206 संस्थानों पर लागू होने वाली व्यवस्था की खबर में सभी संस्थानों की सटीक श्रेणी और मान्यता की स्थिति स्पष्ट होना आवश्यक है।
30 हजार से अधिक विद्यार्थियों का उल्लेख
राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के हवाले से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इन 206 मदरसों में 30 हजार से अधिक बच्चे शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े हुए हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि मदरसों में धार्मिक शिक्षा के साथ विद्यालयी शिक्षा भी दी जा रही है। शिक्षा विभाग से मान्यता लेने की प्रक्रिया के तहत इन संस्थानों को निर्धारित शैक्षिक मानकों के अनुरूप गतिविधियां संचालित करनी हैं।
हालांकि, 30 हजार से अधिक विद्यार्थियों का आंकड़ा प्राधिकरण के अध्यक्ष के बयान पर आधारित है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि के लिए संस्थानवार नामांकन, पंजीकरण और शैक्षणिक सत्र से संबंधित आधिकारिक आंकड़े उपयोगी होंगे।
मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का संदर्भ
इस फैसले को उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा और औपचारिक विद्यालयी व्यवस्था के बीच समन्वय बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है। शिक्षा विभाग से मान्यता लेने वाले संस्थानों के लिए विभागीय नियमों का पालन करना प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा है।
साप्ताहिक अवकाश में बदलाव का सीधा संबंध संस्थानों के शैक्षणिक कैलेंडर और कार्यदिवसों से है। यदि किसी संस्थान को सामान्य विद्यालयों के समान मानकों के तहत मान्यता दी गई है, तो उसके संचालन, उपस्थिति और पढ़ाई की समय-सारिणी पर संबंधित नियम लागू हो सकते हैं।
दूसरी ओर, मदरसों की धार्मिक और शैक्षिक गतिविधियों के बीच संतुलन, विद्यार्थियों की जरूरतें और संस्थानों की प्रशासनिक स्थिति भी इस विषय के महत्वपूर्ण पहलू हैं। इसलिए इस बदलाव का आकलन करते समय केवल अवकाश के दिन पर नहीं, बल्कि पढ़ाई की गुणवत्ता, पाठ्यक्रम, शिक्षकों की उपलब्धता और विद्यार्थियों के हितों पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
आगे क्या महत्वपूर्ण होगा ?
नई व्यवस्था को लेकर कुछ प्रश्नों के स्पष्ट उत्तर आधिकारिक दस्तावेजों से सामने आने चाहिए। इनमें यह शामिल है कि आदेश कब से प्रभावी होगा, क्या यह सभी 206 संस्थानों पर समान रूप से लागू होगा, मान्यता के लिए आवेदन कर रहे संस्थानों की स्थिति क्या होगी और नियमों का पालन नहीं करने पर किस प्रकार की कार्रवाई की जा सकती है।
इसके अतिरिक्त, संबंधित विभाग को 206 संस्थानों की सूची और मान्यता की स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों, अभिभावकों और संस्थानों के प्रबंधन को नई व्यवस्था समझने में सुविधा हो।
निष्कर्ष: उत्तराखंड के 206 मदरसों में शुक्रवार के साप्ताहिक अवकाश की जगह रविवार को अवकाश रखने की व्यवस्था लागू किए जाने की खबर सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने इस संबंध में शिक्षा विभाग को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है। अब संबंधित आदेश की प्रति, प्रभावी तिथि और संस्थानों की पूरी सूची सामने आने पर इस बदलाव की प्रशासनिक स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
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