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अनाक क्राकाटाऊ फिर दहाड़ा: राख के बाद आसमान बंद, 2.70 लाख से ज्यादा यात्री प्रभावित; इंडोनेशिया एक साथ ज्वालामुखी, जंगल की आग और खाद्य संकट से जूझ रहा

पश्चिमी हिमालय पर जलवायु संकट की दस्तक: सदी के अंत तक 7°C से ज्यादा बढ़ सकती है सर्दियों की गर्मी, बर्फ पिघलने की रफ्तार तीन गुना होने का खतराअनाक क्राकाटाऊ फिर दहाड़ा: इंडोनेशिया में ज्वालामुखी, विमान और स्वास्थ्य संकट

जकार्ता | 7 सितंबर 2026

इंडोनेशिया इस समय एक साथ कई प्राकृतिक और मानवीय संकटों से जूझ रहा है। सुंडा जलडमरूमध्य में स्थित माउंट अनाक क्राकाटाऊ की लगातार ज्वालामुखीय गतिविधि ने देश के विमानन नेटवर्क को बुरी तरह प्रभावित किया है। ज्वालामुखीय राख के फैलाव के कारण कई हवाई अड्डों पर परिचालन रोकना पड़ा, हजारों उड़ानें रद्द, विलंबित या डायवर्ट हुईं और बड़ी संख्या में यात्री एयरपोर्टों पर फंस गए।

लेकिन यह संकट सिर्फ विमानन तक सीमित नहीं है। देश के कई हिस्सों में जंगल और पीटलैंड की आग से जहरीला धुआं फैल रहा है, जबकि राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की महत्वाकांक्षी मुफ्त पौष्टिक भोजन योजना से जुड़े संदिग्ध खाद्य-विषाक्तता मामलों में करीब 2,000 लोग बीमार पड़ने के बाद सरकार के सामने खाद्य-सुरक्षा का भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

25 घंटे तक जारी रहा लगातार विस्फोट

इंडोनेशिया के Badan Geologi के अनुसार अनाक क्राकाटाऊ में लगातार चलने वाला एक प्रमुख eruptive episode 4 सितंबर की रात 11:07 बजे शुरू हुआ और करीब 25 घंटे बाद 6 सितंबर की मध्यरात्रि 12:04 बजे समाप्त हुआ।

इसके बाद भी ज्वालामुखी शांत नहीं हुआ। 6 से 7 सितंबर के बीच तीन Strombolian eruptions दर्ज किए गए। 7 सितंबर की आधिकारिक स्थिति रिपोर्ट में भी ज्वालामुखीय भूकंपीय गतिविधि बनी हुई पाई गई।

आधिकारिक आकलन के अनुसार आगे भी विस्फोट की संभावना अभी ऊंची है। ज्वालामुखी का Alert Status Level III — Siaga यानी चेतावनी स्तर पर बरकरार है।

अधिकारियों ने ज्वालामुखी के केंद्र से तीन किलोमीटर के दायरे में जाने पर रोक लगाई है। लोगों को भारी राख, गर्म चट्टानों, लावा और अन्य ज्वालामुखीय खतरों से सावधान रहने को कहा गया है।

राख ने आसमान को बना दिया ‘नो-फ्लाई जोन’

इस पूरे संकट की सबसे बड़ी वजह सिर्फ विस्फोट नहीं, बल्कि वोल्कैनिक ऐश यानी ज्वालामुखीय राख का विमानन क्षेत्र में फैलना है।

BMKG के मुताबिक 7 सितंबर की सुबह तक राख अलग-अलग ऊंचाई पर पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रही थी। करीब 15,000 फीट तक राख का फैलाव पश्चिम की ओर देखा गया, जबकि ऊंची परतों में राख का फैलाव 50,000 फीट तक दर्ज किया गया।

यही कारण है कि हवाई यातायात के लिए स्थिति अत्यंत संवेदनशील हो गई है। विमान के इंजन में ज्वालामुखीय राख जाने पर इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और गंभीर स्थिति में इंजन बंद होने तक का खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए विमानन अधिकारी अक्सर उड़ान रद्द करने को यात्री सुविधा से अधिक सुरक्षा का विषय मानते हैं।

कितने यात्री प्रभावित हुए ?

रविवार को सामने आए शुरुआती आंकड़ों में करीब 1,558 उड़ानों और 1.70 लाख यात्रियों के प्रभावित होने की बात कही गई थी।

लेकिन सोमवार 7 सितंबर को सामने आए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार व्यवधान बढ़कर 2,300 से अधिक उड़ानों और 2.70 लाख से अधिक यात्रियों तक पहुंच चुका था। यह आंकड़ा बताता है कि संकट की शुरुआत में सामने आया 1.70 लाख का आंकड़ा अंतिम नहीं था।

हवाई अड्डों की स्थिति भी लगातार बदल रही है। कुछ एयरपोर्ट दोबारा खुले हैं, जबकि राख के फैलाव और मौसम की स्थिति के आधार पर दूसरे एयरपोर्टों पर बंदी बढ़ाई गई है। इंडोनेशिया के परिवहन मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि संचालन तभी पूरी तरह बहाल किया जाएगा जब उड़ान सुरक्षा सुनिश्चित हो।

स्कूल बंद नहीं, लेकिन पढ़ाई ऑनलाइन

राख और खराब वायु गुणवत्ता का असर बच्चों पर भी पड़ा है।

जकार्ता, बैंटन, पश्चिमी जावा और लैम्पुंग के प्रभावित इलाकों में कई स्कूलों ने बच्चों को घर से ऑनलाइन पढ़ाई कराने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य बच्चों को राख के सीधे संपर्क से बचाना है।

यानी एक ज्वालामुखी की गतिविधि का असर सिर्फ पहाड़ और उसके आसपास के इलाकों तक सीमित नहीं रहता। यह विमानन, शिक्षा, पर्यटन, व्यापार और रोजमर्रा की जिंदगी तक पहुंच सकता है।

क्या 2018 जैसी सुनामी का खतरा है ?

अनाक क्राकाटाऊ का नाम आते ही इंडोनेशिया में 2018 की यादें ताजा होना स्वाभाविक है।

दिसंबर 2018 में अनाक क्राकाटाऊ की गतिविधि से जुड़े समुद्र के भीतर हुए भूस्खलन ने सुनामी पैदा की थी, जिसमें 400 से अधिक लोगों की मौत हुई थी।

लेकिन वर्तमान स्थिति में ऐसा मान लेना कि हर नया विस्फोट सुनामी पैदा करेगा, गलत होगा।

इंडोनेशिया के Badan Geologi ने कहा है कि मौजूदा ज्वालामुखीय संरचना की स्थिति 2018 जैसी बड़े पैमाने की ढहने वाली घटना की तत्काल संभावना नहीं दिखाती। BMKG के InaTEWS monitoring system ने भी 6 सितंबर तक सुंडा जलडमरूमध्य में सुनामी का संकेत देने वाली समुद्री सतह की असामान्य गतिविधि दर्ज नहीं की थी।

इसलिए फिलहाल सबसे बड़ा खतरा राख, लावा, गर्म चट्टानों और आगे के ज्वालामुखीय विस्फोट से जुड़ा है।

दूसरा संकट: इंडोनेशिया के जंगल और पीटलैंड जल रहे हैं

इसी समय इंडोनेशिया के कई हिस्सों में जंगल और पीटलैंड की आग भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार जनवरी से जून 2026 के बीच देश में आग से प्रभावित वन और भूमि का क्षेत्रफल लगभग 202,011 हेक्टेयर तक पहुंच गया था।

जांबी में ही सितंबर की शुरुआत तक लगभग 1,879 हेक्टेयर पीटलैंड आग की चपेट में आ चुका था। आग को नियंत्रित करने के लिए water bombing और weather modification यानी cloud-seeding जैसे उपाय किए जा रहे हैं।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इंडोनेशिया ने जापान से भी सहायता मांगी है। जापान ने कालिमंतान की आग बुझाने में मदद के लिए तीन CH-47 Chinook हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने की घोषणा की है, जिनमें प्रत्येक करीब 5,000 लीटर पानी ले जा सकता है।

यानी इंडोनेशिया में अब सवाल सिर्फ आग बुझाने का नहीं, बल्कि क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता और मानवीय स्वास्थ्य का भी है।

तीसरा संकट: मुफ्त भोजन योजना पर खाद्य-सुरक्षा का सवाल

इसी बीच राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की Free Nutritious Meals यानी मुफ्त पौष्टिक भोजन योजना भी गंभीर जांच के घेरे में आ गई है।

हालिया घटनाओं में करीब 1,950 लोग, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल हैं, भोजन खाने के बाद दस्त, उल्टी और मतली जैसे लक्षणों से बीमार हुए।

सबसे गंभीर मामलों में से एक सेंट्रल जावा के रेंबांग में सामने आया, जहां एक स्कूल में 770 से अधिक लोग प्रभावित हुए।

यह योजना इंडोनेशिया सरकार की सबसे बड़ी सामाजिक योजनाओं में से एक है और इसका उद्देश्य करोड़ों बच्चों तथा अन्य लक्षित समूहों तक पौष्टिक भोजन पहुंचाना है।

लेकिन योजना जितनी बड़ी है, खाद्य-सुरक्षा का जोखिम भी उतना ही बड़ा है।

अब सरकार के सामने चुनौती सिर्फ भोजन उपलब्ध कराने की नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने की है कि भोजन की खरीद, भंडारण, पकाने और वितरण की पूरी श्रृंखला सुरक्षित हो।

Hindi Window Analysis: असली कहानी क्या है ?

इंडोनेशिया की वर्तमान स्थिति को सिर्फ “अनाक क्राकाटाऊ का विस्फोट” कहकर समझना अधूरा होगा।

असल तस्वीर तीन परतों वाली है।

पहली परत — प्राकृतिक आपदा:
ज्वालामुखी सक्रिय है और राख ने विमानन व्यवस्था को प्रभावित किया है।

दूसरी परत — पर्यावरणीय संकट:
देश के अलग-अलग हिस्सों में जंगल और पीटलैंड की आग हवा को जहरीला बना रही है।

तीसरी परत — प्रशासनिक क्षमता:
सरकार को एक ही समय पर विमानन सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्कूलों, जंगल की आग, अंतरराष्ट्रीय सहायता और खाद्य-सुरक्षा जैसे अलग-अलग मोर्चों को संभालना पड़ रहा है।

यही वजह है कि अनाक क्राकाटाऊ का वर्तमान विस्फोट इंडोनेशिया के लिए सिर्फ एक volcanic event नहीं, बल्कि national resilience test बन चुका है।

और एक महत्वपूर्ण तथ्य

इंडोनेशिया Pacific Ring of Fire में स्थित है और दुनिया के सबसे अधिक ज्वालामुखीय रूप से सक्रिय देशों में शामिल है। इसलिए यहां आपदा-प्रबंधन को किसी एक घटना के बाद सक्रिय होने वाली व्यवस्था के बजाय लगातार तैयार रहने वाली प्रणाली के रूप में देखना जरूरी है।

अनाक क्राकाटाऊ का वर्तमान Level III status यह बताता है कि खतरा खत्म नहीं हुआ है। बल्कि अगले कुछ दिनों में ज्वालामुखीय गतिविधि, हवा की दिशा और राख के फैलाव की निगरानी सबसे महत्वपूर्ण रहेगी।

Hindi Window की ग्राउंड रिपोर्टिंग का निष्कर्ष यही है:
अभी घबराने की नहीं, लेकिन सतर्क रहने की जरूरत है।

हवाई यात्रियों को अपनी एयरलाइन और एयरपोर्ट से ताजा जानकारी लेते रहना चाहिए। प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को स्थानीय प्रशासन की सलाह माननी चाहिए और राख वाले वातावरण में मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए।

जकार्ता से,
डॉ. डी. ए. पुतु (Dr. Dewa Ayu Putu Mariana Kencanawati, S.Si.T, M.Kes)
Indonesia Correspondent
‘Hindi Window’

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पश्चिमी हिमालय पर जलवायु संकट की दस्तक: सदी के अंत तक 7°C से ज्यादा बढ़ सकती है सर्दियों की गर्मी, बर्फ पिघलने की रफ्तार तीन गुना होने का खतरा