तरनतारन में 15 किलो हेरोइन के साथ पकड़े गए एंटी-ड्रोन ड्यूटी कांस्टेबल करनदीप सिंह को लेकर NCB की जांच; रिपोर्ट के मुताबिक, कथित तौर पर ड्रोन से भेजी गई खेपों के लिए सुरक्षित ड्रॉप-जोन बताने में की मदद।
तरनतारन/नई दिल्ली | हिंदी विंडो समाचार डेस्क
पंजाब में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए मादक पदार्थों की कथित तस्करी से जुड़ा एक मामला सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सीमा पार से ड्रोन के जरिए भेजी जाने वाली नशीले पदार्थों की खेपों को रोकने के लिए तैनात पंजाब पुलिस के एक कांस्टेबल पर ही तस्करी में मदद करने का आरोप लगा है।
हिंदुस्तान टाइम्स की 22 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की पूछताछ में कांस्टेबल करनदीप सिंह ने कथित तौर पर जून 2026 से सीमा पार से भेजी गई दो दर्जन से अधिक नशीले पदार्थों की खेपों को प्राप्त करने की बात बताई। रिपोर्ट में एक अनाम NCB अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि जांचकर्ताओं ने पाकिस्तान में मौजूद कथित तस्करी संचालकों के साथ संचार और बताए गए ड्रॉप-जोन के आधार पर कम-से-कम 24 डिलीवरी की पुष्टि की है।
यह विवरण जांच से जुड़े अधिकारियों के हवाले से सामने आया है। इसे अदालत में सिद्ध तथ्य या अंतिम जांच निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।
15 किलो हेरोइन के साथ पकड़ा गया कांस्टेबल
रिपोर्ट के अनुसार, करनदीप सिंह को 15 अक्टूबर 2026 को पंजाब के तरनतारन जिले में सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने कथित तौर पर 15 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली हेरोइन ले जाते समय पकड़ा था। इसके बाद मामला NCB को सौंप दिया गया।
इससे पहले की रिपोर्टों में भी पंजाब पुलिस के इस कांस्टेबल की गिरफ्तारी और हेरोइन की बरामदगी की जानकारी दी गई थी। शुरुआती विवरण के मुताबिक, करनदीप सिंह पंजाब पुलिस की एंटी-ड्रोन व्यवस्था से जुड़ी यूनिट में तैनात था। उसकी जिम्मेदारी सीमा पार से ड्रोन के जरिए भेजे जाने वाले मादक पदार्थों और हथियारों की गतिविधियों को रोकने में सहायता करना थी।
अब जांच का केंद्र यह है कि जिस व्यवस्था का उद्देश्य तस्करी रोकना था, उसका कथित तौर पर इस्तेमाल तस्करों को मदद पहुंचाने के लिए कैसे किया गया।
सुरक्षित ड्रॉप-जोन बताने का आरोप
NCB के एक अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि करनदीप सिंह को सीमा क्षेत्र में एंटी-ड्रोन तैनाती और परिचालन व्यवस्था की जानकारी थी। आरोप है कि उसने इस जानकारी का इस्तेमाल तस्करों को ऐसे स्थानों की जानकारी देने के लिए किया, जहां ड्रोन से भेजी गई खेपें अपेक्षाकृत सुरक्षित तरीके से गिराई जा सकें।
रिपोर्ट के मुताबिक, जून से वह कथित तौर पर खेपें प्राप्त कर रहा था और अगस्त से तस्करों को सुरक्षित ड्रॉप-जोन बताने में भी मदद करने लगा था।
जांच एजेंसियां कथित संपर्कों, ड्रोन की गतिविधियों और खेपों की आवाजाही से जुड़े विवरणों की पड़ताल कर रही हैं। यह स्पष्ट होना अभी बाकी है कि प्रत्येक कथित डिलीवरी में कौन-कौन शामिल था, नशीले पदार्थ कहां से आए और उनका अंतिम गंतव्य क्या था।
नशे की लत का कथित इस्तेमाल
रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से यह भी कहा गया है कि पूछताछ के दौरान करनदीप सिंह ने कथित तौर पर हेरोइन की लत होने की बात बताई। जांच से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, तस्करी नेटवर्क ने उसकी इस कमजोरी का फायदा उठाकर उसे अपने संपर्क में लिया।
यह दावा भी जांच से जुड़े अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित हुआ है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि और मामले के अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
यह पहलू व्यापक रूप से एक अहम सवाल उठाता है: संगठित तस्करी नेटवर्क उन लोगों तक किस तरह पहुंचते हैं, जिनकी भूमिका या स्थानीय जानकारी का इस्तेमाल सीमा सुरक्षा को कमजोर करने के लिए किया जा सकता है?
पूर्व सरपंच की गिरफ्तारी से भी जुड़ रही जांच
हिंदुस्तान टाइम्स की इसी रिपोर्ट के अनुसार, तरनतारन के सीमावर्ती राजोके गांव के पूर्व सरपंच लकविंदर सिंह को भी NCB की हिरासत में लिया गया है। रिपोर्ट में BSF के एक अधिकारी के हवाले से बताया गया कि बरामद कुछ ड्रोन के फॉरेंसिक विश्लेषण में उनकी उड़ान का रास्ता कई बार लकविंदर सिंह के घर के पास से गुजरता दिखाई दिया था।
हालांकि, किसी स्थान के पास ड्रोन की गतिविधि मिलना अपने आप में किसी व्यक्ति की संलिप्तता का अंतिम प्रमाण नहीं है। इस मामले में प्रत्येक आरोपी की भूमिका और उससे जुड़े साक्ष्यों का आकलन जांच एजेंसियों तथा न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होना है।
पंजाब में ड्रोन से नशीले पदार्थों की तस्करी बड़ी चुनौती
भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे पंजाब के इलाकों में ड्रोन के जरिए हेरोइन और अन्य प्रतिबंधित सामग्री भेजने की कोशिशें सुरक्षा एजेंसियों के लिए लगातार चुनौती बनी हुई हैं।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में देशभर में ड्रोन से जुड़ी मादक पदार्थों की जब्ती के 305 मामले दर्ज किए गए और 468 किलोग्राम नशीले पदार्थ बरामद हुए। इनमें पंजाब में 298 मामले और 461 किलोग्राम बरामदगी दर्ज होने की बात कही गई है।
ये आंकड़े रिपोर्ट में उद्धृत हैं। इन्हें संबंधित सरकारी एजेंसियों के मूल आंकड़ों से मिलाकर देखना उचित होगा।
ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल से तस्कर पारंपरिक रास्तों पर निर्भर हुए बिना सीमा पार से खेप भेजने की कोशिश कर सकते हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए तकनीकी निगरानी, ड्रोन का पता लगाने वाली प्रणालियां, BSF और राज्य पुलिस के बीच समन्वय तथा बरामद उपकरणों का फॉरेंसिक विश्लेषण महत्वपूर्ण हैं।
लेकिन इस मामले का एक और पहलू है—तकनीक की प्रभावशीलता के साथ-साथ उन कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना, जिन्हें इस तकनीक का संचालन या उसके आधार पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी गई है।
आगे जांच में किन सवालों के जवाब जरूरी ?
NCB की जांच के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। कथित 24 डिलीवरी में कितनी खेपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की जा सकती है? क्या प्रत्येक खेप का संबंध करनदीप सिंह से जोड़ने वाले पर्याप्त डिजिटल, तकनीकी या अन्य साक्ष्य मौजूद हैं? कथित नेटवर्क में स्थानीय सहयोगियों और सीमा पार के संचालकों की क्या भूमिका थी? और क्या सुरक्षा व्यवस्था की किसी अन्य कमजोरी का भी फायदा उठाया गया?
इन सवालों के जवाब मामले की वास्तविक सीमा और सुरक्षा व्यवस्था में संभावित खामियों को समझने में मदद करेंगे।
निष्कर्ष
पंजाब का यह मामला केवल नशीले पदार्थों की कथित बरामदगी तक सीमित नहीं है। यह सीमा सुरक्षा, पुलिस की जवाबदेही और संगठित तस्करी नेटवर्क की कार्यप्रणाली से जुड़े गंभीर प्रश्न सामने लाता है।
हालांकि, निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए यह अंतर बनाए रखना जरूरी है कि गिरफ्तारी और बरामदगी की सूचना क्या है, जांच अधिकारियों के आरोप क्या हैं और अदालत में किन तथ्यों की पुष्टि होती है। जांच पूरी होने और न्यायिक निष्कर्ष आने तक सभी आरोपों को आरोप के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
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स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स की 22 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट तथा पंजाब पुलिस के कांस्टेबल की गिरफ्तारी और हेरोइन बरामदगी पर प्रकाशित अन्य समाचार रिपोर्टें।












