
ऋषिकेश। भारत के अंतरिक्ष मिशन से जुड़े ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने युवाओं को सफलता का मूल मंत्र देते हुए कहा कि “सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। यदि लक्ष्य बड़ा है तो सपने भी बड़े होने चाहिए और उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प आवश्यक है।”
शुक्रवार को ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के ऑडिटोरियम में आयोजित संवाद कार्यक्रम में उन्होंने विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं से संवाद किया। कार्यक्रम का शुभारंभ एम्स निदेशक प्रो. मीनू सिंह एवं ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने संयुक्त रूप से किया।
अपने प्रेरणादायक संबोधन में शुभांशु शुक्ला ने कहा कि भारत के युवाओं में अपार प्रतिभा और असीम संभावनाएं हैं। यदि युवा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में आगे बढ़ें तो भारत अंतरिक्ष विज्ञान में विश्व स्तर पर नई उपलब्धियां हासिल कर सकता है।
अंतरिक्ष में शरीर पर पड़ता है गहरा प्रभाव
छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण लगभग न होने के कारण शरीर की मांसपेशियों और हड्डियों पर विशेष प्रभाव पड़ता है। साथ ही शरीर की संतुलन प्रणाली भी बदल जाती है।
उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर लौटने के बाद शरीर को सामान्य स्थिति में वापस लाने के लिए विशेष चिकित्सा प्रशिक्षण, फिजियोथेरेपी और पुनर्वास कार्यक्रम से गुजरना पड़ता है।
साझा किए अंतरिक्ष मिशन के अनुभव
ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने छात्रों को मेडिकल इमरजेंसी प्रशिक्षण, मिशन लॉन्च की तैयारियों, भारहीनता (Microgravity) के अनुभव और अंतरिक्ष में किए जाने वाले वैज्ञानिक प्रयोगों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने युवाओं से कहा कि असफलताओं से घबराने के बजाय लगातार सीखते रहना चाहिए। विज्ञान और अनुसंधान का क्षेत्र देश के भविष्य का निर्माण करेगा और आने वाली पीढ़ी भारत को अंतरिक्ष अनुसंधान में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने अंतरिक्ष यात्रा, वैज्ञानिक प्रयोगों और अंतरिक्ष जीवन से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे, जिनका शुभांशु शुक्ला ने सरल और रोचक तरीके से उत्तर दिया।















