ऑक्सफोर्ड में छाया उत्तराखंड का ‘आनंदम’ मॉडल, संस्कृत मंत्र और ध्यान से हुई शुरुआत
देहरादून/ऑक्सफोर्ड | 6 सितंबर 2026
उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था में बच्चों के सामाजिक और भावनात्मक विकास पर केंद्रित ‘आनंदम पाठ्यचर्या’ अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी चर्चा का विषय बनी है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में आयोजित Social Outcomes Conference में उत्तराखंड के इस शिक्षा मॉडल को प्रस्तुत किया गया, जहां शिक्षा को केवल परीक्षा और शैक्षणिक प्रदर्शन तक सीमित न रखकर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक समझ, सहानुभूति और समग्र विकास से जोड़ने पर जोर दिया गया।
सम्मेलन के विशेष सत्र “What Does Education System Transformation Look Like from Inside Government ?” में उत्तराखंड शिक्षा विभाग, समग्र शिक्षा के स्टाफ ऑफिसर भगवती प्रसाद मैंदोली ने राज्य के शिक्षा परिवर्तन मॉडल और आनंदम पाठ्यचर्या के अनुभव साझा किए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सम्मेलन 3 और 4 सितंबर को आयोजित हुआ था।
संस्कृत मंगलाचरण और ध्यान से हुई शुरुआत
ऑक्सफोर्ड के इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुति की शुरुआत संस्कृत मंगलाचरण और ध्यान अभ्यास से हुई। इस पहल के माध्यम से शिक्षा में मानसिक शांति, सजगता और बच्चों के समग्र विकास के महत्व को सामने रखा गया।
मैंदोली के अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक परिवर्तन केवल नई नीतियां बनाने या योजनाओं को बड़े स्तर पर लागू करने से नहीं आता। बदलाव तब दिखाई देता है, जब नीति विद्यालय और कक्षा तक पहुंचती है और शिक्षक उसे बच्चों के जीवन में सार्थक परिवर्तन में बदलते हैं।
शिक्षा का लक्ष्य सिर्फ अच्छे अंक नहीं
प्रस्तुति में इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बच्चों का शैक्षणिक प्रदर्शन बढ़ाना नहीं होना चाहिए। एक बेहतर शिक्षा व्यवस्था बच्चों को आत्मविश्वासी, संवेदनशील, रचनात्मक और जिम्मेदार नागरिक बनाने में भी भूमिका निभाती है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान के साथ आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मकता और कल्याण को भी महत्वपूर्ण बताया गया। सामाजिक एवं भावनात्मक अधिगम यानी Social-Emotional Learning (SEL) को बच्चों के समग्र विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।
2019 में शुरू हुई थी आनंदम पाठ्यचर्या
उत्तराखंड में ‘आनंदम पाठ्यचर्या’ की शुरुआत नवंबर 2019 में हुई थी। इसका मूल उद्देश्य ऐसा विद्यालयी वातावरण तैयार करना है, जहां बच्चे विषयगत ज्ञान के साथ-साथ स्वयं को और दूसरों को समझना, अपनी भावनाओं को पहचानना तथा सहानुभूति विकसित करना सीखें। भारत सरकार के शिक्षा संबंधी दस्तावेजों में भी आनंदम को मूल्य-आधारित और अनुभवात्मक अधिगम को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम के रूप में दर्ज किया गया है।
आनंदम के तहत स्कूल के शुरुआती 30–35 मिनट बच्चों के सामाजिक-भावनात्मक विकास के लिए निर्धारित किए जाते हैं। इसमें सामान्यतः माइंडफुलनेस/सचेतनता, कहानी, संवादात्मक गतिविधियां और अभिव्यक्ति जैसे आयाम शामिल हैं।
करीब 16 हजार विद्यालयों तक पहुंच
उपलब्ध नवीनतम रिपोर्टों में आनंदम पाठ्यचर्या की पहुंच करीब 16 हजार विद्यालयों और लगभग 30 हजार शिक्षकों तक बताई गई है। हालांकि विद्यार्थियों की संख्या के संबंध में अलग-अलग स्रोतों में अलग आंकड़े मिलते हैं।
अमर उजाला की 6 सितंबर की रिपोर्ट में करीब दो लाख विद्यार्थियों के लाभान्वित होने का उल्लेख है, जबकि एक हालिया स्वतंत्र शोध/रिपोर्टिंग स्रोत में उत्तराखंड के SEL कार्यक्रम के लिए लगभग 6.2 लाख विद्यार्थियों का आंकड़ा दिया गया है। इसलिए विद्यार्थियों की संख्या को लेकर बिना आधिकारिक नवीनतम आंकड़े के किसी एक संख्या को अंतिम आंकड़ा मानना उचित नहीं होगा।
एक अन्य विस्तृत रिपोर्ट में 2023–24 के लिए 15,979 स्कूलों और 30,927 प्रशिक्षित शिक्षकों का आंकड़ा दर्ज है।
बच्चों में एकाग्रता और संबंध निर्माण पर जोर
आनंदम पाठ्यचर्या का फोकस बच्चों को अपनी भावनाओं को पहचानने और व्यक्त करने, दूसरों को समझने तथा सकारात्मक संबंध विकसित करने में सक्षम बनाना है।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार आनंदम के संदर्भ में बच्चों की एकाग्रता, सहानुभूति और संबंध निर्माण में सकारात्मक बदलाव तथा शिक्षकों के कक्षा प्रबंधन में सुधार की बात सामने आई है। इन प्रभावों को लेकर व्यापक वैज्ञानिक निष्कर्ष निकालने से पहले अध्ययन की पद्धति और नवीनतम मूल्यांकन रिपोर्टों को देखना जरूरी है।
ऑक्सफोर्ड में क्यों महत्वपूर्ण रही यह प्रस्तुति ?
उत्तराखंड की आनंदम पाठ्यचर्या की खासियत यह है कि यह शिक्षा को केवल किताब, परीक्षा और अंक तक सीमित नहीं मानती। इसमें बच्चों के मन, व्यवहार, सामाजिक संबंध और भावनात्मक क्षमताओं को भी सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जाता है।
ऑक्सफोर्ड में इस मॉडल की चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आज दुनिया भर में शिक्षा व्यवस्था में Social and Emotional Learning, student wellbeing और experiential learning जैसे विषयों पर बढ़ता ध्यान देखा जा रहा है।
उत्तराखंड की पहल इसी वैश्विक विमर्श के साथ अपने अनुभव साझा करने का प्रयास करती दिखाई देती है।
‘आनंदम’ का बड़ा संदेश
आनंदम मॉडल का मूल विचार सरल है—बच्चे सिर्फ पढ़ें नहीं, बल्कि समझें; सिर्फ अंक न पाएं, बल्कि संवेदनशील बनें; सिर्फ प्रतिस्पर्धा न करें, बल्कि सहयोग करना भी सीखें।
ऑक्सफोर्ड में हुई प्रस्तुति ने उत्तराखंड के इस प्रयोग को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा विमर्श के सामने रखने का अवसर दिया है। अब इसकी वास्तविक सफलता का आकलन इस बात से होगा कि यह मॉडल लंबे समय में बच्चों के सीखने, मानसिक कल्याण, व्यवहार और सामाजिक संबंधों पर कितना टिकाऊ प्रभाव डालता है।
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